यशवंत सिन्हा की अलगाववादियों से मुलाकात में नहीं निकल सका अमन बहाली का रास्ता
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कश्मीर में अमन बहाली का ट्रैक टू मिशन भी फेल होता दिख रहा है। हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी ने इस बार दिल्ली की टीम के लिए दरवाजे तो बंद नहीं किए लेकिन वार्ता से अमन बहाली के लिए कोई रास्ता भी नहीं निकल पाया।
भाजपा नेता और पूर्व विदेश एवं वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा के नेतृत्व में कश्मीर आई टीम की गिलानी से तीन दिनों में दो बार बातचीत हुई लेकिन नतीजा सिफर रहा। गतिरोध पर जमी बर्फ नहीं पिघली। टीम की घाटी से दिल्ली वापसी के क्रम में ही अलगाववादियों ने हड़ताल का नया कलेंडर जारी कर दिया। हड़ताल को 3 नवंबर तक के लिए बढ़ा दिया गया है। यशवंत की टीम के बाद अब कांग्रेस नेता पी चिदंबरम के नेतृत्व में दूसरी टीम कश्मीर आ सकती है।
यशवंत सिन्हा के नेतृत्व में कश्मीर आई टीम की पहल से भले ही केंद्र सरकार और भाजपा ने केंद्रीय टीम घोषित नहीं किया हो लेकिन टीम को केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल की तरह ही सुविधाएं मुहैया कराई गईं थीं। यशवंत की टीम के श्रीनगर पहुंचने से ठीक एक दिन पहले हर्रियत के उदारवादी ग्रुप के नेता मीरवाइज उमर फारूक को जेल से रिहा कर वार्ता के लिए अनुकूल माहौल बनाया गया।
सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल से नहीं मिले थे अलगाववादी
इस पहल से भी जाहिर हुआ कि दिल्ली की इस टीम को केंद्र और रियासत सरकार की ओर से परोक्ष समर्थन हासिल था। मीरवाइज चश्मा शाही के टूरिस्ट हट के सब जेल से श्रीनगर के नगीन स्थित अपने घर आ गए लेकिन बंद और हड़ताल के अपने एजेंडे पर कायम रहे।
यशवंत की टीम में आई राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष वजाहत हबीबुल्लाह, पूर्व एयर वाइस मार्शल कपिल काक, पत्रकार भारत भूषण और सेंटर फार डायलाग एंड रिकौंसिलिएशन की कार्यकारी निदेशक सुशोभना बार्वे को शामिल कर टीम की सर्वस्वीकार्यता के लिए आधार तैयार किया गया था। पहले केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में आई सर्वदलीय टीम से अलगाववादियों ने बातचीत से इनकार कर दिया था।
इस बार गिलानी के अलावा शब्बीर साह, अबुदल गनी भट और मीरवाइज से टीम के सदस्यों की लंबी बातचीत हुई। टीम ने चैंबर आफ कामर्स के अधिकारियों, वकीलों और सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और गवर्नर एनएन वोहरा से भी टीम ने विस्तार से चर्चा की।
अलगावादी पुराने एजेंडे पर कायम
दिल्ली लौटने से पहले यशवंत ने कहा कि उनकी टीम व्यक्तिगत पहल पर कश्मीरियों के दर्द को महसूस करने आई और दौरे में वार्ता का द्वार खुला। लेकिन टीम से मुलाकात के बाद मीरवाइज और गिलानी अपने पुराने सुर को अलापते नजर आए। अलगाववादियों के गुट अपने पुराने एजेंडे पर कायम हैं।
इस बार श्रीनगर के जामा मस्जिद कूच के अलावा सोमवार को सरकारी कर्मचारियों से भी विरोध मार्च करने को कहा गया है। हांलाकि कश्मीर में छिटपुट घटनाओं के बीत स्थिति समान्य होने लगी है और अलगाववादियों की हड़ताल को नजरअंदाज कर दुकानें खुल चुकी हैं।