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कश्मीर मुद्दे पर गृहमंत्री राजनाथ ने खेला वाजपेयी का मास्टरस्ट्रोक
बृजेश कुमार सिंह, अमर उजाला/जम्मू
Updated Sat, 27 Aug 2016 11:23 AM IST
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गृहमंत्री राजनाथ सिंह
- फोटो : PTI
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केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह का 15 दिनों के भीतर घाटी का दूसरा दौरा और अवाम से बातचीत अनायास ही नहीं है। केंद्र के दूत के रूप में राजनाथ के मिशन कश्मीर का असल मकसद अलगाववादियों को अलग-थलग करना था।
कश्मीरियत, जम्हूरियत और इंसानियत के नारे का दांव चलकर राजनाथ ने अलगाववादियों को घेरने की कोशिश की। इसी फार्मूले पर अटल सरकार में हुर्रियत से बातचीत की पहल शुरू हुई थी।
केंद्र सरकार का इस मामले में रुख बिल्कुल स्पष्ट है। वह कश्मीर हिंसा पर नरमी नहीं दिखाना चाहती है। अलगाववादियों तथा पत्थरबाजों से सख्ती से निबटे जाने का भी संकेत है।
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कश्मीरियत, जम्हूरियत और इंसानियत के नारे का दांव चलकर राजनाथ ने अलगाववादियों को घेरने की कोशिश की। इसी फार्मूले पर अटल सरकार में हुर्रियत से बातचीत की पहल शुरू हुई थी।
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केंद्र सरकार का इस मामले में रुख बिल्कुल स्पष्ट है। वह कश्मीर हिंसा पर नरमी नहीं दिखाना चाहती है। अलगाववादियों तथा पत्थरबाजों से सख्ती से निबटे जाने का भी संकेत है।
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अलगाववाद और आतंकवाद से समझौता नहीं?
प्रेस वार्ता के दौरान महबूबा मुफ्ती और राजनाथ सिंह
- फोटो : PTI
संसद में घाटी की हिंसा पर सभी दलों की चिंता को देखते हुए भाजपा को आगामी कुछ महीनों में होने वाले उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड तथा पंजाब चुनावों की चिंता सताने लगी है। उसे यही चिंता है कि विपक्ष इस मुद्दे को हवा देकर पार्टी की चुनावी फिजां न बिगाड़ दे।
इस वजह से वह जल्द से जल्द घाटी में समस्या समाधान के लिए प्रयासरत है। इसके लिए गठबंधन के सहयोगी पार्टनर पीडीपी से भी बात की जा रही है जो लगातार घाटी में शांति स्थापना के लिए सभी पक्षकारों से बात करने की जिद पर अड़ी है।
माना जा रहा है कि राजनाथ के दौरे का मकसद यह संकेत देना भी रहा कि भाजपा अलगाववाद तथा आतंकवाद से कोई समझौता नहीं कर सकती। उसकी कथनी और करनी में फर्क नहीं है। यदि अलगाववादियों को बातचीत करनी है तो वह संविधान के तहत कश्मीरियत, जम्हूरियत तथा इंसानियत के दायरे में आकर बात करे। इसके लिए केंद्र का दरवाजा हर वक्त खुला है। इस दांव से पीडीपी को भी घेरने की कोशिश की गई है। साथ ही कश्मीरियों को यह बताना भी था कि केंद्र बातचीत के लिए तैयार है।
इस वजह से वह जल्द से जल्द घाटी में समस्या समाधान के लिए प्रयासरत है। इसके लिए गठबंधन के सहयोगी पार्टनर पीडीपी से भी बात की जा रही है जो लगातार घाटी में शांति स्थापना के लिए सभी पक्षकारों से बात करने की जिद पर अड़ी है।
माना जा रहा है कि राजनाथ के दौरे का मकसद यह संकेत देना भी रहा कि भाजपा अलगाववाद तथा आतंकवाद से कोई समझौता नहीं कर सकती। उसकी कथनी और करनी में फर्क नहीं है। यदि अलगाववादियों को बातचीत करनी है तो वह संविधान के तहत कश्मीरियत, जम्हूरियत तथा इंसानियत के दायरे में आकर बात करे। इसके लिए केंद्र का दरवाजा हर वक्त खुला है। इस दांव से पीडीपी को भी घेरने की कोशिश की गई है। साथ ही कश्मीरियों को यह बताना भी था कि केंद्र बातचीत के लिए तैयार है।