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'कश्मीर घाटी में डर सेना से नहीं बल्कि छोटे-छोटे बच्चों से है'
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Fri, 09 Sep 2016 10:03 PM IST
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सीएम महबूबा मुफ्ती
- फोटो : Amar Ujala
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मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि जम्मू कश्मीर को मुश्किल की घड़ी से बेटियां ही बाहर निकाल सकती हैं।
कश्मीर 62 दिनों से हिंसा की चपेट में है। लोग कह रहे हैं कि सरकार फेल हो गई है। यह कहना आसान भी है।
आज वहां मुकाबला आतंकवादियों से नहीं है बल्कि छोटे-छोटे बच्चों से हैं जिनके हाथ में पत्थर थमा दिए गए हैं। बच्चों को शरारती तत्व ढाल बना रहे हैं। उन्हें सामने लाकर खड़ा कर दिया जा रहा है। आज कश्मीर में लोग सेना से नहीं डरते हैं बल्कि इन बच्चों से डरते हैं जिनके हाथ में पत्थर हैं। मुख्यमंत्री ने जम्मू में गांधीनगर तथा परेड महिला कालेज में 50 फीसदी सब्सिडी पर स्कूटी योजना का शुभारंभ करने के कार्यक्रम के दौरान यह बातें कहीं।
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कश्मीर 62 दिनों से हिंसा की चपेट में है। लोग कह रहे हैं कि सरकार फेल हो गई है। यह कहना आसान भी है।
आज वहां मुकाबला आतंकवादियों से नहीं है बल्कि छोटे-छोटे बच्चों से हैं जिनके हाथ में पत्थर थमा दिए गए हैं। बच्चों को शरारती तत्व ढाल बना रहे हैं। उन्हें सामने लाकर खड़ा कर दिया जा रहा है। आज कश्मीर में लोग सेना से नहीं डरते हैं बल्कि इन बच्चों से डरते हैं जिनके हाथ में पत्थर हैं। मुख्यमंत्री ने जम्मू में गांधीनगर तथा परेड महिला कालेज में 50 फीसदी सब्सिडी पर स्कूटी योजना का शुभारंभ करने के कार्यक्रम के दौरान यह बातें कहीं।
हमारी सरकार फेल नहीं: महबूबा
स्कूटी पर बैठतीं महबूबा मुफ्ती
- फोटो : Amar Ujala
उन्होंने 300 छात्राओं को स्कूटियां दीं। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने कोट भलवाल में सरकारी डिग्री कालेज का शिलान्यास भी किया।
उन्होंने कहा कि कश्मीर में हालात बेहद खराब हैं। यह आम रियासत नहीं है। इस रियासत का वजीरे आला होना आसान है, लेकिन, इसे संभालना काफी मुश्किल है। 62 दिनों से जारी हिंसा में सरकार, स्वास्थ्य विभाग तथा डाक्टरों ने बेहतर ढंग से काम किया। लोगों को घर-घर राशन पहुंचाया गया।
बिजली-पानी की आपूर्ति सुचारु रखी गई। घायलों का बेहतर इलाज किया गया। शिक्षा विभाग ने कई प्रतियोगी परीक्षाओं को बेहतर ढंग से संपन्न कराया। अमरनाथ यात्रा सकुशल संपन्न हो गई। इसलिए यह कहना कि सरकार फेल हो गई, ठीक नहीं है। कोई भी वजीरे आला मसले को अकेले हल नहीं कर सकता है।
उन्होंने कहा कि कश्मीर में हालात बेहद खराब हैं। यह आम रियासत नहीं है। इस रियासत का वजीरे आला होना आसान है, लेकिन, इसे संभालना काफी मुश्किल है। 62 दिनों से जारी हिंसा में सरकार, स्वास्थ्य विभाग तथा डाक्टरों ने बेहतर ढंग से काम किया। लोगों को घर-घर राशन पहुंचाया गया।
बिजली-पानी की आपूर्ति सुचारु रखी गई। घायलों का बेहतर इलाज किया गया। शिक्षा विभाग ने कई प्रतियोगी परीक्षाओं को बेहतर ढंग से संपन्न कराया। अमरनाथ यात्रा सकुशल संपन्न हो गई। इसलिए यह कहना कि सरकार फेल हो गई, ठीक नहीं है। कोई भी वजीरे आला मसले को अकेले हल नहीं कर सकता है।
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छात्रा को स्कूटी की चाभी देतीं महबूबा मुफ्ती
- फोटो : Amar Ujala
पहले की सरकारों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि उमर अब्दुल्ला वजीरे आला थे और दो तिहाई बहुमत भी था लेकिन, वे कुछ नहीं कर पाए। यदि रियासत में कुछ हुआ तो मुफ्ती मोहम्मद सईद और वाजपेयी के कार्यकाल में।
पाक से बेहतर रिश्ते का असर रियासत पर पड़ता है। मुफ्ती और वाजपेयी के समय बात आगे बढ़ी थी। जनरल परवेज मुशर्रफ ने भी कदम बढ़ाया था, लेकिन दुर्भाग्य से यूपीए ने इसे आगे नहीं बढ़ाया। नेकां भी मुफ्ती के बताए रास्ते को भूल गई।
उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वही रास्ता अपनाया है। लाहौर चले गए, लेकिन, दुर्भाग्य से पठानकोट हो गया और फिर बात रुक गई। कहा कि मुफ्ती ने जम्मू कश्मीर को मुश्किलों से निकालने के लिए उनसे हाथ मिलाया जिसे 120 करोड़ लोगों ने चुना।
गृह मंत्री तीन बार कश्मीर हिंसा के बाद दौरा कर चुके हैं। सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भी लेकर आए। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को मुश्किलों से बचाने के लिए पूरा देश एक हो गया। अपनी पगड़ी वहां भी नीचे की जहां लगा कि बात बन सकती थी।
पाक से बेहतर रिश्ते का असर रियासत पर पड़ता है। मुफ्ती और वाजपेयी के समय बात आगे बढ़ी थी। जनरल परवेज मुशर्रफ ने भी कदम बढ़ाया था, लेकिन दुर्भाग्य से यूपीए ने इसे आगे नहीं बढ़ाया। नेकां भी मुफ्ती के बताए रास्ते को भूल गई।
उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वही रास्ता अपनाया है। लाहौर चले गए, लेकिन, दुर्भाग्य से पठानकोट हो गया और फिर बात रुक गई। कहा कि मुफ्ती ने जम्मू कश्मीर को मुश्किलों से निकालने के लिए उनसे हाथ मिलाया जिसे 120 करोड़ लोगों ने चुना।
गृह मंत्री तीन बार कश्मीर हिंसा के बाद दौरा कर चुके हैं। सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भी लेकर आए। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को मुश्किलों से बचाने के लिए पूरा देश एक हो गया। अपनी पगड़ी वहां भी नीचे की जहां लगा कि बात बन सकती थी।