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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   may be Governor's rule in Jammu and Kashmirr

कश्मीरः महबूबा सरकार पर लटकी तलवार, लागू होगा राज्यपाल शासन?

Fri, 16 Sep 2016 01:33 PM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/जम्मू
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/जम्मू Updated Fri, 16 Sep 2016 01:33 PM IST
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प्रधानमंत्री के साथ मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती - फोटो : PTI
जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन के आसार बढ़ गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अचानक गवर्नर एन एन वोहरा को दिल्ली बुलाकर घाटी के हालात पर विस्तार से चर्चा को राज्यपाल शासन की संभावना से जोड़कर देखा जा रहा है।
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घाटी में जारी हिंसा पर मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के पांच दिनों से चुप्पी के भी निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। इससे पहले महबूबा अलगाववादियों पर तल्ख अंदाज में लगातार हमले कर रहीं थीं। 
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राज्यपाल और मोदी की दिल्ली में वीरवार को मुलाकात हुई। दिल्ली जाने से पहले राज्यपाल ने पीडीपी के वरिष्ठ नेता और मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के करीबी शिक्षा मंत्री नईम अख्तर से मंत्रणा की थी।
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उपद्रवियों पर सख्ती बढ़ी, अतिरिक्त बल तैनात

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राजनाथ सिंह और महबूबा मुफ्ती - फोटो : ANI
दरअसल, दक्षिण कश्मीर में सड़कों और गांवों की गलियों में उपद्रवियों के जारी तांडव को केंद्र ने गंभीरता से लिया है। उपद्रवी पेट्रोल बम लेकर खुलेआम सड़कों पर घूमने लगे थे।

इस दौरान सेना और सुरक्षा बलों पर हमले लगातार बढ़े। नतीजतन केंद्र ने अघोषित रूप से दक्षिण कश्मीर को सेना के हवाले कर दिया। अब लगभग सात हजार सैनिक उपद्रव ग्रस्त इलाकों में तैनात हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा सुरक्षा बलों को एक सप्ताह में स्थिति सामान्य करने के निर्देश देने के बाद उपद्रवियों पर सख्ती बढ़ी है।

सीएम महबूबा मुफ्ती ने साधी चुप्पी?

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राज्यपाल के साथ सीएम महबूबा मुफ्ती - फोटो : File Photo
सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री महबूबा इस स्थिति से असहज हैं। दिल्ली से आई सर्वदलीय टीम से अलगाववादियों द्वारा मुलाकात से इनकार के बाद महबूबा ने उन्हें अलग-थलग करने के लिए हमले तेज किए थे।

बीते 9 सितंबर को जम्मू में छात्राओं को स्कूटी बांटने के क्रम तक महबूबा का यह तेवर बना रहा। लेकिन, 10 सितंबर को जब उन्हें सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अनंतनाग के एक युवक की मौत की खबर मिली तो वे आहत हुईं। उन्होंने इसका इजहार भी किया। उस दिन श्रीनगर लौटने के बाद से वे मौन हैं।

ईद पर कर्फ्यू की मजबूरी ने भी उन्हें आहत किया। इसके लिए उन्होंने खुद सफाई नहीं दी। अपने करीबी शिक्षा मंत्री नईम अख्तर से बयान दिलावाया। उन्होंने अपना विरोध केंद्र तक पहुंचाया है। सूत्रों का कहना है कि विधानसभा को निलंबित कर राज्यपाल शासन लागू किया जा सकता है। इस कार्रवाई से मौजूदा सरकार के हटने को अलगाववादी और उपद्रवी अपनी जीत मान सकते हैं और हिंसा थम सकती है।
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