फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   lashkar new video in kashmir

कश्मीर: लश्कर की धमकी के बाद उड़ी नेताओं की नींद , दे सकते हैं पार्टी से इस्तीफा

Tue, 13 Sep 2016 12:24 AM IST
ओमपाल संब्याल/ अमर उजाला, जम्मू
ओमपाल संब्याल/ अमर उजाला, जम्मू Updated Tue, 13 Sep 2016 12:24 AM IST
विज्ञापन
lashkar new video in kashmir
आतंकी - फोटो : Demo Pic.
भीड़ के हमलों से सहमी घाटी में मुख्यधारा की सियासत आतंकी तंजीम लश्कर-ए-तैयबा की धमकी से सिहर उठी है।
विज्ञापन


खासकर फेहरिस्त में नाम पतों के साथ हिटलिस्ट के खुलासे ने उन सियासी कार्यकर्ताओं और नेताओं को सहमा दिया है, जिनके पास निजी सुरक्षा नहीं है। लश्कर के एक कमांडर द्वारा जारी ताजा वीडियो में फेहरिस्त पढ़कर दर्जन भर नाम जारी किए गए हैं।

खास बात है कि सियासत से जुड़े नामों में ज्यादातर सत्तारूढ़ पीडीपी से बावस्ता हैं। लगभग एक दशक बाद सत्ता में आई पार्टी के जमीनी स्तर के कार्यकर्ता और नेता जनता के बीच अपनी पैठ बढ़ाने के लिए एक्टिव हुए ही थे कि घाटी में हिंसा भड़क गई।
विज्ञापन


पहले हिंसक भीड़ ने सियासी लोगों के दिल में खौफ भर दिया। अब आतंकी तंजीम की सीधी धमकी ने उनकी नींदें उड़ा दी हैं। यह धमकी इसलिए भी गंभीरता से ली जा रही है, क्योंकि घाटी में मुख्यधारा की सियासत राजनीतिक हत्याओं का लंबा दौर देख चुकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

बारामुला के कई पीडीपी नेता लश्कर की लिस्ट में

lashkar new video in kashmir
घाटी में हिंसा - फोटो : PTI
पीडीपी के संस्थापक सदस्य और सांसद मुजफ्फर हुसैन बेग भी कह चुके हैं कि घाटी के माहौल में सबसे ज्यादा नुकसान और खामियाजा जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को ही भुगतना पड़ रहा है।

दक्षिणी कश्मीर के एक पीडीपी नेता ने बताया कि बुरहान की मौत के बाद भीड़ के गुस्से का डर हावी है। आतंकियों की धमकी से उनके लिए डर की दोहरी वजह बन गई है।

दीगर है कि लश्कर द्वारा जारी वीडियो में उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले की फेहरिस्त का हवाला दिया गया है, जिसमें स्थानीय नेताओं के नाम, स्थानीय उपनाम और घर के पते शामिल हैं। इससे पूर्व धमकियों में किसी के नाम का जिक्र नहीं होता था।

दो दशक में हुईं 587 राजनीतिक हत्याएं

lashkar new video in kashmir
डेमो पिक
राजनीतिक हत्याओं के पीछे लोगों को मुख्यधारा की सियासत से दूर रखने का मकसद रहा है। वर्ष 1990 से लेकर 2010 तक घाटी में 587 राजनीतिक हत्याएं हुईं। इनमें सबसे ज्यादा हत्याएं चुनावी वर्ष के दौरान हुईं। वर्ष 2002 में सर्वाधिक 87 राजनीतिक लोगों की हत्या कर दी गई। इसी तरह से वर्ष 1996 में 75, 1999 में 53, 2001 में 49, 2004 में 60 और 2005 में 39 हत्याएं हुईं।

धमकी से लग गया था इस्तीफों का अंबार 
आतंकियों की धमकी चुने हुए नुमाइंदों में पहले भी खौफ पैदा करती रही है। वर्ष 2011 में घाटी के 900 पंचायती नुमाइंदों ने इस्तीफे को लेकर सार्वजनिक घोषणा कर दी थी।

बारामुला से 400, शोपियां और पुलवामा से 150-150 नुमाइंदों ने धमकी के तत्काल बाद इस्तीफे की घोषणा की थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed