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जम्मू-कश्मीर को वाजपेयी के शांति मंत्र की जरूरत: महबूबा
ब्यूरो, अमर उजाला/श्रीनगर
Updated Tue, 02 Aug 2016 10:54 AM IST
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महबूबा मुफ्ती
- फोटो : PTI
मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने केंद्र को जम्मू-कश्मीर की नीति बनाने का आधार बदलने की सलाह दी है। महबूबा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पर राष्ट्र की नीति का निर्धारण केवल सुरक्षा और रणनीतिक पहलुओं पर ही आधारित नहीं होना चाहिए।
वैचारिक और मानवीय मूल्यों को भी नीति में उपयुक्त स्थान देना चाहिए। जब रियासत को विशेष दर्जा दिया गया है तो जम्मू-कश्मीर पूरे देश की जनता के दिलो दिमाग में खास जगह का भी हकदार है।
बारामुला में सिविल सोसायटी सदस्यों से मुखातिब महबूबा ने कहा यदि देश की जम्मू-कश्मीर नीति में लोकतंत्र के वैचारिक मूल्यों, कानून के शासन और सहिष्णुता को आधार बनाएं तो न सिर्फ भारत की मजबूती परिभाषित होगी बल्कि अमन का पैगाम जमीनी स्तर तक ले जाना मुमकिन होगा।
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वैचारिक और मानवीय मूल्यों को भी नीति में उपयुक्त स्थान देना चाहिए। जब रियासत को विशेष दर्जा दिया गया है तो जम्मू-कश्मीर पूरे देश की जनता के दिलो दिमाग में खास जगह का भी हकदार है।
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बारामुला में सिविल सोसायटी सदस्यों से मुखातिब महबूबा ने कहा यदि देश की जम्मू-कश्मीर नीति में लोकतंत्र के वैचारिक मूल्यों, कानून के शासन और सहिष्णुता को आधार बनाएं तो न सिर्फ भारत की मजबूती परिभाषित होगी बल्कि अमन का पैगाम जमीनी स्तर तक ले जाना मुमकिन होगा।
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कुछ लोग स्वार्थ के कारण हिंसा को दे रहे बढ़ावा
सीएम महबूबा मुफ्ती
- फोटो : Amar Ujala
उन्होंने कहा जम्मू कश्मीर को वर्ष 2002 की सरकार के शांति मंत्र की दरकार है। तत्कालीन सरकार ने भरोसे की खाई को पाटने के लिए विश्वास बहाली के कदम उठाए थे। इससे अमन भी बहाल हुआ और सरहद भी शांत हो गई। उल्लेखनीय है कि पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद भी कश्मीर नीति के लिए वाजपेयी के शांति मंत्र की वकालत करते रहे थे।
श्रीनगर-मुजफ्फराबाद हो या फिर पुंछ-रावलाकोट सड़क मार्ग, पासपोर्ट के बजाय परमिट के माध्यम से आवाजाही की इजाजत दी गई। रियासत की अवाम से सूझबूझ बरतने की अपील करते हुए महबूबा ने कहा अवाम को समझना होगा कि हिंसा का रास्ता अपनाने से उनके अपने हित ही प्रभावित हो रहे हैं।
अलगाववादियों पर उन्होंने कहा उनकी अपनी अलग विचारधारा हो सकती है पर कुछ लोग अपने स्वार्थ की खातिर हिंसा को बढ़ावा भी दे रहे हैं। हमें यह भी देखना होगा कि आखिर हिंसा तभी क्यों भड़काई जाती है जब रियासत में आर्थिक गतिविधियां रफ्तार पकड़ने लगती हैं।
महबूबा ने कहा हिंसा का सबसे ज्यादा असर युवा पीढ़ी पर पड़ा है। सरकार विशेष योजना लांच कर उनकी उम्मीदों और ऊर्जा के साथ न्याय करेगी। उन्होंने कहा एक तरफ हमारे बच्चे और बच्चियां राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का परचम फहरा रहे हैं तो दूसरी तरफ गरीब घरों के युवा हाथों में पेन के बजाय पत्थर पकड़े हुए हैं।
श्रीनगर-मुजफ्फराबाद हो या फिर पुंछ-रावलाकोट सड़क मार्ग, पासपोर्ट के बजाय परमिट के माध्यम से आवाजाही की इजाजत दी गई। रियासत की अवाम से सूझबूझ बरतने की अपील करते हुए महबूबा ने कहा अवाम को समझना होगा कि हिंसा का रास्ता अपनाने से उनके अपने हित ही प्रभावित हो रहे हैं।
अलगाववादियों पर उन्होंने कहा उनकी अपनी अलग विचारधारा हो सकती है पर कुछ लोग अपने स्वार्थ की खातिर हिंसा को बढ़ावा भी दे रहे हैं। हमें यह भी देखना होगा कि आखिर हिंसा तभी क्यों भड़काई जाती है जब रियासत में आर्थिक गतिविधियां रफ्तार पकड़ने लगती हैं।
महबूबा ने कहा हिंसा का सबसे ज्यादा असर युवा पीढ़ी पर पड़ा है। सरकार विशेष योजना लांच कर उनकी उम्मीदों और ऊर्जा के साथ न्याय करेगी। उन्होंने कहा एक तरफ हमारे बच्चे और बच्चियां राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का परचम फहरा रहे हैं तो दूसरी तरफ गरीब घरों के युवा हाथों में पेन के बजाय पत्थर पकड़े हुए हैं।