फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   kashmir bearing

सिंधु जल संधि में पंजाब से भी जम्मू-कश्मीर को 170 अरब का नुकसान

Wed, 28 Sep 2016 05:03 PM IST
ओमपाल संब्याल, अमर उजाला/जम्मू
ओमपाल संब्याल, अमर उजाला/जम्मू Updated Wed, 28 Sep 2016 05:03 PM IST
विज्ञापन
kashmir bearing
सिंधु जल समझौता - फोटो : File Photo
जल संसाधन के अकूत भंडार होने पर भी रियासत की अपनी झोली खाली है। सिंचाई और बिजली के लिए पानी का दोहन तो खूब हो रहा है, लेकिन पड़ोसियों की खातिर।
विज्ञापन


झेलम, सिंधु और चिनाब नदियों से जहां पाकिस्तान की चांदी है, वहीं भारतीय नियंत्रण वाली रावी नदी से पंजाब के घर रोशन और खेत खलिहान लहलहा रहे हैं। पानी सामने से बहकर निकल जाता है, लेकिन रियासत प्यासी रह जाती है।

उड़ी हमले के बाद जिस तरह से सिंधु जल संधि के मुद्दे पर केंद्र ने संधि तोड़ने तक के संकेत दिए हैं, उससे रियासत को हो रहे नुकसान का मुद्दा फिर से खड़ा हो गया है, लेकिन पाकिस्तान नियंत्रण वाली नदियों से इतर यदि भारतीय नियंत्रण वाली रावी नदी की बात करें तो रियासत दशकों से खुद को ठगा सा महसूस करने को मजबूर है।
विज्ञापन

सिंधु जल संधि से पाक, अंतरराज्यीय समझौते से पंजाब की मार 

kashmir bearing
सिंधु जल समझौता - फोटो : File Photo
सिंधु जल संधि से जो व्यवस्था चल रही है, उससे राज्य को बिजली उत्पादन क्षेत्र में 18 हजार मेगावाट क्षमता के बिजली उत्पादन की संभावना से हाथ धोना पड़ रहा है। राज्य में सिंचाई के लिए पानी के लिए हाहाकार की स्थिति है।

वर्तमान में कुल बिजली उत्पादन 3600 मेगावाट हो रहा है जिसमें से एनएचपीसी संचालित प्रोजेक्ट लगभग दो हजार मेगावाट बिजली पैदा कर रहे हैं। इसका कुछ अंश ही राज्य को मिलता है। इसी तरह से रावी नदी पर पंजाब के संचालन में चल रहे 600 मेगावाट क्षमता वाले रणजीत सागर बांध प्रोजेक्ट से 20 फीसदी बिजली राज्य को दी जानी थी।

प्रोजेक्ट वर्ष 2000 में कमीशन हुआ, लेकिन आज तक एक यूनिट बिजली भी रियासत को नहीं मिल पाई है।दरअसल सिंधु जल संधि के तहत जिन तीन नदियों के पानी का नियंत्रण भारत के पास है, उसमें जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले से बहकर निकलने वाली रावी नदी भी शामिल है। पंजाब सरकार ने रावी पर बांध बनाने के लिए जम्मू-कश्मीर सरकार के साथ वर्ष 1973 और 1979 में समझौता किया।

पंजाब ने पूरा नहीं किया नुकसान भरपाई का वादा

kashmir bearing
सिंधु जल समझौता - फोटो : file photo
इसके समझौते के तहत रणजीत सागर बांध निर्माण के एवज में पंजाब सरकार ने नुकसान की भरपाई करने का लिखित में वादा किया। लगभग चार दशक बीत जाने के बावजूद ये वादे अधूरे हैं।

जम्मू-कश्मीर विधान परिषद के तत्कालीन पर्यावरण समिति ने विस्तृत निरीक्षण और अध्ययन के बाद नुकसान का जो आकलन तैयार किया, उसके मुताबिक जम्मू-कश्मीर सरकार को बांध परियोजना से 17 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। पंजाब सरकार के साथ समझौते के मुताबिक 22 प्रभावित गांवों के विस्थापित 1802 परिवारों को उचित मुआवजा और रोजगार की सुविधा दी जानी थी। दशकों बाद भी अधिकांश मामले अधर में लटके हुए हैं।

सिंचाई के लिए जो समझौता हुआ, उसकी पंजाब ने वादाखिलाफी की। नतीजतन 53 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचाई के पानी को तरस गई। कायदे से 1150 क्यूसिक पानी जम्मू-कश्मीर को मिलना था, जबकि हकीकत में मुश्किल से 200 क्यूसिक पानी ही पंजाब की मर्जी पर नहर में छूटता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed