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'अलगाववादी नेता अपने बच्चों से जिहाद के नाम पर पत्थर क्यों नहीं फेंकवाते'?
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Sun, 28 Aug 2016 10:57 AM IST
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डॉ. जितेंद्र सिंह
- फोटो : File Photo
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पीएमओ राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कश्मीरी अलगाववादियों पर जमकर निशाना साधा और उन्हें हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया।
डॉ. सिंह ने कहा कि अलगाववादी घाटी के युवकों को जन्नत और जिहाद के नाम पर मरवा रहे हैं, जबकि अपने बच्चों को पढ़ने के लिए अमेरिका और इंग्लैंड भेज रहे।
अलगाववादी छोटे-छोटे बच्चों को भी नहीं छोड़ते। वो बच्चों से कहते हैं पत्थर मारो यही जिहाद है और जो बच्चे पुलिस और सुरक्षा बलों की फायरिंग में मारे जाएंगे वह जन्नत में जाएंगे। डॉ. सिंह ने कहा कि अगर ऐसा ही है तो वो अपने बच्चों को जन्नत क्यों नहीं भिजवाते।
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डॉ. सिंह ने कहा कि अलगाववादी घाटी के युवकों को जन्नत और जिहाद के नाम पर मरवा रहे हैं, जबकि अपने बच्चों को पढ़ने के लिए अमेरिका और इंग्लैंड भेज रहे।
अलगाववादी छोटे-छोटे बच्चों को भी नहीं छोड़ते। वो बच्चों से कहते हैं पत्थर मारो यही जिहाद है और जो बच्चे पुलिस और सुरक्षा बलों की फायरिंग में मारे जाएंगे वह जन्नत में जाएंगे। डॉ. सिंह ने कहा कि अगर ऐसा ही है तो वो अपने बच्चों को जन्नत क्यों नहीं भिजवाते।
'गरीब बच्चों को गलत रास्ते पर चलने को कर रहे मजबूर'
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
- फोटो : Amar Ujala
उन्होंने आगे कहा कि हुर्रियर पाकिस्तान के इशारे पर छोटे-छोटे बच्चों को भड़का रहा है और इनके बहकावे में आने वाले ज्यादातर बच्चे गरीब परिवार के होते हैं। उन्होंने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि पूरा विश्व जानता है कि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर और भारत के बाकी राज्यों में आतंकवाद फैला रहा है।
उन्होंने कहा कि अगर बातचीत शुरू होगी तो सभी वर्गों के साथ होगी, उसमें कश्मीर के लोगों के अलावा जम्मू के स्टैक होल्डर्स, पीओके, गिलगित और बाल्टिस्तान के लोगों के साथ भी बात की जाएगी।
गौरतलब है कि आठ जुलाई को हिजबुल कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से घाटी में हिंसा जारी है। हिंसा के चलते पिछले 51 दिनों से घाटी में कर्फ्यू लगातार जारी है। हिंसा में अब तक करीब 70 लोगों की मौत हो चुकी है तो वहीं 6000 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं।
उन्होंने कहा कि अगर बातचीत शुरू होगी तो सभी वर्गों के साथ होगी, उसमें कश्मीर के लोगों के अलावा जम्मू के स्टैक होल्डर्स, पीओके, गिलगित और बाल्टिस्तान के लोगों के साथ भी बात की जाएगी।
गौरतलब है कि आठ जुलाई को हिजबुल कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से घाटी में हिंसा जारी है। हिंसा के चलते पिछले 51 दिनों से घाटी में कर्फ्यू लगातार जारी है। हिंसा में अब तक करीब 70 लोगों की मौत हो चुकी है तो वहीं 6000 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं।