J&K: खराब प्रदर्शन के चलते 6 सरकारी वकील बर्खास्त
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विधि एवं न्याय मंत्रालय आपराधिक न्याय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकारी वकीलों की जवाबदेही तय करेगा। श्रीनगर में समीक्षा बैठक के दौरान अदालतों में सरकारी अभियोजन में कमजोर पक्ष के बढ़ते मामलों का कड़ा संज्ञान लेते हुए विधि एवं न्याय मंत्री अब्दुल हक ने कहा कि केस हारने पर सरकारी वकीलों को जवाब देना होगा।
कड़ी कार्रवाई की शुरूआत करते हुए मंत्री ने छह सरकारी वकीलों की सेवाएं बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया। बर्खास्त हुए सरकारी वकीलों पर आरोप है कि वे अपने काम को ठीक से अंजाम देने में नाकाम रहे।
हक ने कहा कि सरकारी वकीलों को तमाम तरह की सुविधाएं दी गईं हैं। इसके बावजूद अदालतों में सरकारी पक्ष पिटता जा रहा है। आपराधिक मामलों में आरोपियों को सजा दिलाने में लगातार नाकामी मिल रही है। इस व्यवस्था को बदले बिना न्याय व्यवस्था को दुरुस्त करना मुमकिन नहीं है।
केस हारने पर अब देना होगा जवाब
मंत्री ने कहा कि जिला स्तर पर तमाम आपराधिक मामलों की लगातार समीक्षा की जाएगी। सरकार ने प्रदेश स्तरीय मानीटरिंग कमेटी गठित करने का फैसला किया है जो एडवोकेट जनरल के नेतृत्व में काम करेगी। पुलिस जोन स्तर पर डीआईजी मानीटरिंग करेंगे।
पब्लिक प्रासिक्यूटर अथवा प्रासिक्यूटिंग अफसर की सेवाओं को बहाल रखने से पूर्व मानीटरिंग कमेटी की रिपोर्ट को ही आधार बनाया जाएगा। मंत्री ने निर्देश दिए कि अदालतों में सरकारी विभागों के जवाब समय से दाखिल किए जाएं।
इससे पूर्व एडवोकेट जनरल जहांगीर इकबाल गनेई, प्रिंसिपल सेक्रेटरी होम आरके गोयल सहित अन्य वरिष्ठ अफसरों की मौजूदगी में मंत्री ने आपराधिक न्याय विषय से जुड़े तमाम पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की।