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मोदी सरकार की गुगली से बिखर रहे अलगाववादियों के विकेट
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/जम्मू
Updated Fri, 09 Sep 2016 11:03 AM IST
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कश्मीर के अलगाववादी नेता
- फोटो : File Photo
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केंद्र सरकार की गुगली से अलगाववादियों की लोकप्रियता के विकेट छितराने लगे हैं। दोहरा चरित्र उजागर होने से अलगाववादियों की मुश्किलें बढ़ी हैं और अब उन्हें सफाई देनी पड़ रही है।
कश्मीर की आजादी के नाम पर दुकानदारी चला रहे बड़े अलगाववादी नेताओं के समक्ष अब अपने ही गुटों के लोगों का विश्वास कायम रखने की चुनौती भी खड़ी हुई है। हालांकि सभी बड़े अलगाववादी नेता सुविधाएं वापस करने को खुद को प्रस्तुत बताते हैं, लेकिन अब तक किसी की ओर से पहल नहीं हुई है।
आम कश्मीरियों के मन में भी अलगाववादियों को मिलने वाली सुविधाओं के बारे में सवाल खड़े होने लगे हैं। अलगाववादियों द्वारा अपने बच्चों को विदेशों और देश के अन्य राज्यों में महंगे स्कूल-कालेजों में पढ़ाने तथा आम कश्मीरियों के बच्चों को पत्थर उठाने के लिए उकसाने की नीति भी सवालों के घेरे में है।
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कश्मीर की आजादी के नाम पर दुकानदारी चला रहे बड़े अलगाववादी नेताओं के समक्ष अब अपने ही गुटों के लोगों का विश्वास कायम रखने की चुनौती भी खड़ी हुई है। हालांकि सभी बड़े अलगाववादी नेता सुविधाएं वापस करने को खुद को प्रस्तुत बताते हैं, लेकिन अब तक किसी की ओर से पहल नहीं हुई है।
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आम कश्मीरियों के मन में भी अलगाववादियों को मिलने वाली सुविधाओं के बारे में सवाल खड़े होने लगे हैं। अलगाववादियों द्वारा अपने बच्चों को विदेशों और देश के अन्य राज्यों में महंगे स्कूल-कालेजों में पढ़ाने तथा आम कश्मीरियों के बच्चों को पत्थर उठाने के लिए उकसाने की नीति भी सवालों के घेरे में है।
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'अपने बच्चों को जन्नत की राह पर क्यों नहीं भेजते अलगाववादी'
जम्मू में पत्रकारों से बात करते गृहमंत्री राजनाथ सिंह
- फोटो : PTI
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डा. जितेंद्र सिंह ने अलगाववादियों से सवाल किया है कि अगर हिंसक प्रदर्शन, आतंकवाद और पत्थरबाजी से जन्नत की राह आसान होती है तो अलगाववादी अपने बच्चों को इस राह पर क्यों नहीं भेजते। उन्हें अपने बच्चों को भी इस कथित पाक राह पर भेजना चाहिए।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कश्मीर को हिंसा और दहशत की घाटी नहीं बनने देगी। इसके लिए बातचीत के द्वार खोले गए हैं, लेकिन राष्ट्र हित की सर्वोपरियता किसी भी सूरत में बनाई रखी जाएगी। अब अलगाववादियों की गतिविधियां और उनके फैसले तय करेंगे कि वे कश्मीर का कितना हित चाहते हैं।
केंद्र सरकार ने कश्मीर के विकास के लिए कार्य योजना बनाई है और उस पर जल्दी से अमल शुरू होगा। जम्मू और लद्दाख के हितों की भी उपेक्षा नहीं होने दी जाएगी।
सूत्रों का कहना है कि दरअसल केंद्र और रियासत सरकार संयुक्त नीति के तहत आम कश्मीरियों को अलगाववादियों की असली सियासत समझना चाहती है। इसके तहत केंद्र और रियासत सरकार ने दोनों तरफ से अलगाववादियों की पोल खोलनी शुरू की है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कश्मीर को हिंसा और दहशत की घाटी नहीं बनने देगी। इसके लिए बातचीत के द्वार खोले गए हैं, लेकिन राष्ट्र हित की सर्वोपरियता किसी भी सूरत में बनाई रखी जाएगी। अब अलगाववादियों की गतिविधियां और उनके फैसले तय करेंगे कि वे कश्मीर का कितना हित चाहते हैं।
केंद्र सरकार ने कश्मीर के विकास के लिए कार्य योजना बनाई है और उस पर जल्दी से अमल शुरू होगा। जम्मू और लद्दाख के हितों की भी उपेक्षा नहीं होने दी जाएगी।
सूत्रों का कहना है कि दरअसल केंद्र और रियासत सरकार संयुक्त नीति के तहत आम कश्मीरियों को अलगाववादियों की असली सियासत समझना चाहती है। इसके तहत केंद्र और रियासत सरकार ने दोनों तरफ से अलगाववादियों की पोल खोलनी शुरू की है।
महबूबा के तल्ख सवाल करने लगे असर
राजनाथ सिंह और महबूबा मुफ्ती
- फोटो : ANI
मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने अलगाववादियों को कश्मीरी बच्चों को बरगलाने के लिए कोसना शुरू किया है। महबूबा पहली मुख्यमंत्री हैं जो तल्ख जुबान में अलगाववादियों से सवाल पूछने लगी हैं। उन्होंने अलगाववादियों द्वारा अपने बच्चों और आम कश्मीरियों के बच्चों में फर्क किए जाने को मुद्दा बनाया है। इस अभियान का घाटी के गांवों में कुछ असर दिखने लगा है। पत्थरबाजी की घटनाएं कम हुईं हैं।
हड़ताल के पाक कैलेंडर का पर्दाफाश
अलगाववादियों के नाम पर पाकिस्तान द्वारा जारी किए जा रहे हड़ताल कैलेंडर का सच भी लोगों के सामने आ गया है। इससे अलगाववादियों और पाकिस्तानी एजेंसियों में मिलीभगत की पोल खुल गई है।
सूत्र बताते हैं कि अलगाववादी गुटों की निचली पंक्तियों के नेताओं में भी बड़े नेताओं को पाकिस्तान से हो रही फंडिंग के बारे में संदेह पैदा होने लगा है। अलगाववादियों के बड़े नेता इस फंडिंग को भी गटकते रहे हैं। लिहाजा अब अपने गुट से ही शक की सुई उनकी ओर घूम रही है।
हड़ताल के पाक कैलेंडर का पर्दाफाश
अलगाववादियों के नाम पर पाकिस्तान द्वारा जारी किए जा रहे हड़ताल कैलेंडर का सच भी लोगों के सामने आ गया है। इससे अलगाववादियों और पाकिस्तानी एजेंसियों में मिलीभगत की पोल खुल गई है।
सूत्र बताते हैं कि अलगाववादी गुटों की निचली पंक्तियों के नेताओं में भी बड़े नेताओं को पाकिस्तान से हो रही फंडिंग के बारे में संदेह पैदा होने लगा है। अलगाववादियों के बड़े नेता इस फंडिंग को भी गटकते रहे हैं। लिहाजा अब अपने गुट से ही शक की सुई उनकी ओर घूम रही है।