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नौ दिन होटल में रह कर अमरनाथ यात्रियों ने बचाई जान
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Wed, 20 Jul 2016 12:16 AM IST
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कश्मीर से बच कर आए अमरनाथ यात्री
- फोटो : Amar Ujala
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आतंकी की मौत के बाद हालात खराब होने पर फंसे अमरनाथ यात्रियों का जम्मू पहुंचना मंगलवार को भी जारी रहा। कुछ ऐसे यात्री भी जम्मू पहुंचने लगे हैं, जो कि पहलगाम पहुंच कर भी बाबा बर्फानी के दर्शन के बिना अपने घरों को लौटने लगे हैं।
यात्रियों का कहना है कि खतरनाक हालात को देखकर लौटने में बेहतरी समझी और जब बाबा बर्फानी के अंतर्धान होने की जानकारी मिली तो हिम्मत ही टूट गई।
नौ जुलाई से घाटी में हालात लगातार खराब हैं और इसका असर यात्रा पर पड़ रहा है। अभी तक यात्री घाटी के विभिन्न हिस्सों में फंसे हैं और अब बिना दर्शन के लौटने लगे हैं। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से 21 यात्रियों का दल बाबा बर्फानी के दर्शन को छह जुलाई को जम्मू पहुंचा और सात जुलाई को बस में सवार होकर पहलगाम के लिए रवाना हो गया।
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यात्रियों का कहना है कि खतरनाक हालात को देखकर लौटने में बेहतरी समझी और जब बाबा बर्फानी के अंतर्धान होने की जानकारी मिली तो हिम्मत ही टूट गई।
नौ जुलाई से घाटी में हालात लगातार खराब हैं और इसका असर यात्रा पर पड़ रहा है। अभी तक यात्री घाटी के विभिन्न हिस्सों में फंसे हैं और अब बिना दर्शन के लौटने लगे हैं। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से 21 यात्रियों का दल बाबा बर्फानी के दर्शन को छह जुलाई को जम्मू पहुंचा और सात जुलाई को बस में सवार होकर पहलगाम के लिए रवाना हो गया।
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सेना की मदद से बचाई जान
कश्मीर में हिंसा
- फोटो : PTI
विक्की, अर्पित यादव, रवि कुमार ने बताया कि आठ जुलाई की शाम को पहलगाम पहुंचे और तभी आतंकी की मौत के बाद हालात खराब हो गए। उनके दल को होटल में कमरा मिल गया और फिर हर दिन हालात ठीक होने के इंतजार में गुजरने लगा।
हालात ठीक नहीं हुए। होटल में ही पता चला कि बाबा बर्फानी अंतर्धान हो गए हैं तो फिर अमरनाथ जाने के बजाय घर लौटने में ही भलाई समझी। किसी तरह से सबने सेना के साथ संपर्क किया और 16 जुलाई की रात को सेना ने उनकी बस को जम्मू के लिए रवाना किया।
पहलगाम में उनकी बस को प्रदर्शनकारियों ने पूरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया था। उन्होंने अपनी आंखों से देखा कि जो भी प्रदर्शनकारियों के हाथ चढ़ रहा था, उसकी हालत खराब कर दी जा रही थी।
हालात ठीक नहीं हुए। होटल में ही पता चला कि बाबा बर्फानी अंतर्धान हो गए हैं तो फिर अमरनाथ जाने के बजाय घर लौटने में ही भलाई समझी। किसी तरह से सबने सेना के साथ संपर्क किया और 16 जुलाई की रात को सेना ने उनकी बस को जम्मू के लिए रवाना किया।
पहलगाम में उनकी बस को प्रदर्शनकारियों ने पूरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया था। उन्होंने अपनी आंखों से देखा कि जो भी प्रदर्शनकारियों के हाथ चढ़ रहा था, उसकी हालत खराब कर दी जा रही थी।