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रियासत में आज से लागू होगी ड्रग पालिसी
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Wed, 01 Jun 2016 01:26 AM IST
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दवाइयां
- फोटो : Demo Pic.
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रियासत में बुधवार से ड्रग पालिसी लागू की जाएगी। इसमें जिला अस्पताल/कम्युनिटी हेल्थ सेंटर/उपजिला अस्पताल, सब सेंटर और पीएचसी स्तर पर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को नि:शुल्क दवाइयां मुहैया करवाई जाएंगी। सभी संबंधित चिकित्सा केंद्रों पर उपलब्ध दवाओं की सूची प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा इंडोर और आउटडोर मरीजों को डाक्टरों द्वारा अस्पतालों में उपलब्ध दवाइयों के साल्ट लिखने को कहा गया है। जेएंडके मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन की ओर से आगामी चार माह की सप्लाई चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाने का दावा किया गया है, जबकि अन्य एक वर्ष की दवाई के लिए टेंडर किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य सचिव डा. मंदीप कुमार भंडारी के अनुसार ड्रग पालिसी का जमीनी स्तर पर पहले ही मरीजों को लाभ दिया जा रहा है।
इसमें केंद्र की ओर से 33 फीसदी और राज्य सरकार 67 फीसदी दवाओं का खर्च वहन करेगा। कारपोरेशन के माध्यम से राज्य के सभी जिलों के चिकित्सा केंद्रों पर पालिसी से संबंधित दवाइयां पहुंचाई गई हैं। भविष्य में इसकी उपलब्धता सुनिश्चित बनाने के लिए उचित कदम उठाए जा रहे हैं।
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उल्लेखनीय है कि हाल ही में भारत सरकार के हेल्थ फार आल लक्ष्य को लेकर राज्य प्रशासनिक काउंसिल की बैठक में ड्रग्स पालिसी को मंजूरी दी गई थी। नि:शुल्क ड्रग पालिसी का उद्देश्य मरीजों की जेब पर चिकित्सा राशि का बोझ कम करना है। पालिसी में इंडोर और आउटडोर मरीजों को सब सेंटर पर 23, प्राइमरी हेल्थ सेंटर पर 53, उपजिला अस्पताल/कम्युनिटी हेल्थ सेंटर/जिला अस्पतालों में 68 किस्म की जरूरी दवाइयां मुहैया करवाई जाएंगी।
इनमें उल्टी, दस्त, बुखार सहित अन्य संक्रमित बीमारियों की दवाएं हर समय चिकित्सा केंद्रों पर उपलब्ध रहेंगी। इससे पूर्व सेंशल मेडिसन आफ इंडिया 2011 की राष्ट्रीय सूची से जरूरी दवाओं को लेकर वर्ष 2012 से ड्रग्स पालिसी पर काम करना शुरू किया गया था, लेकिन राज्य में दवाओं की खरीद के लिए कोई तंत्र विकसित नहीं था, मगर कारपोरेशन के स्थापित होने के साथ ही ड्रग पालिसी को अमल में लाया गया है।
सरकार ने ड्रग पालिसी के लिए वर्ष 2013 में शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस, सौरा के पहले निदेशक और टास्क फोर्स के संयोजक डा. अजीत के नागपाल की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया था। स्वास्थ्य निदेशालय कश्मीर के अधीन कुल 1646 और निदेशालय जम्मू के अधीन 1632 छोटे-बड़े चिकित्सा केंद्र चल रहे हैं।
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इसके अलावा इंडोर और आउटडोर मरीजों को डाक्टरों द्वारा अस्पतालों में उपलब्ध दवाइयों के साल्ट लिखने को कहा गया है। जेएंडके मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन की ओर से आगामी चार माह की सप्लाई चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाने का दावा किया गया है, जबकि अन्य एक वर्ष की दवाई के लिए टेंडर किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य सचिव डा. मंदीप कुमार भंडारी के अनुसार ड्रग पालिसी का जमीनी स्तर पर पहले ही मरीजों को लाभ दिया जा रहा है।
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इसमें केंद्र की ओर से 33 फीसदी और राज्य सरकार 67 फीसदी दवाओं का खर्च वहन करेगा। कारपोरेशन के माध्यम से राज्य के सभी जिलों के चिकित्सा केंद्रों पर पालिसी से संबंधित दवाइयां पहुंचाई गई हैं। भविष्य में इसकी उपलब्धता सुनिश्चित बनाने के लिए उचित कदम उठाए जा रहे हैं।
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उल्लेखनीय है कि हाल ही में भारत सरकार के हेल्थ फार आल लक्ष्य को लेकर राज्य प्रशासनिक काउंसिल की बैठक में ड्रग्स पालिसी को मंजूरी दी गई थी। नि:शुल्क ड्रग पालिसी का उद्देश्य मरीजों की जेब पर चिकित्सा राशि का बोझ कम करना है। पालिसी में इंडोर और आउटडोर मरीजों को सब सेंटर पर 23, प्राइमरी हेल्थ सेंटर पर 53, उपजिला अस्पताल/कम्युनिटी हेल्थ सेंटर/जिला अस्पतालों में 68 किस्म की जरूरी दवाइयां मुहैया करवाई जाएंगी।
इनमें उल्टी, दस्त, बुखार सहित अन्य संक्रमित बीमारियों की दवाएं हर समय चिकित्सा केंद्रों पर उपलब्ध रहेंगी। इससे पूर्व सेंशल मेडिसन आफ इंडिया 2011 की राष्ट्रीय सूची से जरूरी दवाओं को लेकर वर्ष 2012 से ड्रग्स पालिसी पर काम करना शुरू किया गया था, लेकिन राज्य में दवाओं की खरीद के लिए कोई तंत्र विकसित नहीं था, मगर कारपोरेशन के स्थापित होने के साथ ही ड्रग पालिसी को अमल में लाया गया है।
सरकार ने ड्रग पालिसी के लिए वर्ष 2013 में शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस, सौरा के पहले निदेशक और टास्क फोर्स के संयोजक डा. अजीत के नागपाल की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया था। स्वास्थ्य निदेशालय कश्मीर के अधीन कुल 1646 और निदेशालय जम्मू के अधीन 1632 छोटे-बड़े चिकित्सा केंद्र चल रहे हैं।