फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Differences on how to deal with violence in BJP and PDP

अरुण जेटली ने तल्ख अंदाज से संकेतों में दी महबूबा मुफ्ती को नसीहत

Mon, 22 Aug 2016 12:51 PM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/जम्मू
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/जम्मू Updated Mon, 22 Aug 2016 12:51 PM IST
विज्ञापन
Differences on how to deal with violence in BJP and PDP
वित्त मंत्री अरुण जेटली और सीएम महबूबा मुफ्ती - फोटो : File Photo
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने तल्ख अंदाज से संकेतों में मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को नसीहत दी है। महबूबा शुरू से पत्थरबाजों से नरमी बरतने की वकालत करती रही हैं जबकि जेटली ने उपद्रवियों को देशद्रोही की श्रेणी में खड़ा कर सख्ती से निपटने की बात कर केंद्र का संदेश स्पष्ट कर दिया है।
विज्ञापन


कश्मीर में जारी हिंसा से निपटने के तरीके पर भाजपा और पीडीपी में मतभेद बढ़ रहा है। दरअसल कश्मीर के गांवों में विरोध प्रदर्शनों के बाद पीडीपी को अपने जनाधार का चिंता सताने लगी है। आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद अलगाववादियों के बंद और विरोध प्रदर्शनों की पीडीपी ने तीखी आलोचना की थी लेकिन अब विरोध प्रदर्शन गांवों में भी हो रहा है।
विज्ञापन


इस कारण पीडीपी अब अलगाववादियों से बातचीत और कम उम्र के पत्थरबाजों से नरमी पर जोर दे रही है। जेटली ने पत्थरबाजों को सत्याग्रही मानने से इनकार कर महबूबा की अपील को खारिज कर दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

क्या खिसकते जनाधार की चिंता में डूबी पीडीपी?

Differences on how to deal with violence in BJP and PDP
वित्त मंत्रीअरुण जेटली - फोटो : Amar Ujala
मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कश्मीर समस्या के लिए नेहरू से लेकर अबतक की केंद्र सरकार की नीतियों को जिम्मेदार बताकर अपनी सख्त तेवर का इजहार किया था। लेकिन कश्मीर के संवेदनशील मुद्दे पर केंद्र गठबंधन दल के दवाब में आने के मूड में नहीं दिखता।

हिंसक प्रदर्शनों के दौरान पीडीपी के मंत्रियों और विधायकों को घरों को निशाना बनाए जाने के बाद मुख्यमंत्री महबूबा को खिसकते जनाधार की चिंता सता रही है। नतीजतन केंद्र की नीति पर भाजपा और पीडीपी के बीच तकरार बढ़ने के आसार हैं। 

केंद्र पर दवाब के लिए महबूबा ने पूर्व मुख्यमंत्री स्व. मुफ्ती मोहम्मद के वार्ता से समस्या के समाधान की नीति को आधार बनाया है। मुफ्ती अक्सर कहते थे कि- बंदूक से न गोली से, बात बनेगी बोली से। अब महबूबा ने उसी तर्ज पर कहा है कि बंदूक चाहे आतंकी की हो या सरकार की, उससे मसला हल होने वाला नहीं है।

उधर केंद्र ने आतंकियों, पत्थरबाजों और अलगाववादियों पर सख्ती बढ़ाने की नीति अपना ली है। कश्मीर के गांवों में लश्कर-ए- तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकियों द्वारा सार्वजनिक रूप से हथियार लहराए जाने और भीड़ को संबोधित करने की घटनाओं को केंद्र ने गंभीरता से लिया है।

निर्देश के बाद सेना और सुरक्षा बलों ने गांवों में आतंकियों की तलाशी का अभियान फिर से तेज किया है। इस क्रम में विरोध और पत्थरबाजी के कारण सुरक्षा बलों फिर से पेलेट गन का भी इस्तेमाल करना पड़ रहा है। यह स्थिति पीडीपी को असहज बना रही है।  
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed