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कश्मीर घाटी में एक दशक बाद फिर से हुई बीएसएफ की तैनाती, सख्ती के संकेत
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Wed, 24 Aug 2016 01:10 PM IST
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घाटी में तैनात बीएसएफ के जवान
- फोटो : PTI
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मुख्य रूप से सरहद की निगरानी में माहिर बीएसएफ की एक दशक से अधिक समय बाद फिर से घाटी के भीतर इलाकों में तैनाती की गई है। इसकी शुरुआत उपद्रवियों का केंद्र रहे श्रीनगर के लाल चौक और अन्य इलाकों से की गई है।
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कश्मीर घाटी में आतंकवाद के शुरुआती दौर से डेढ़ दशक तक घाटी के भीतरी इलाकों में तैनात रही बीएसएफ की नये सिरे से तैनाती को सख्ती बढ़ने का संकेत माना जा रहा है। सोमवार से सड़कों पर दिखाई दे रहे बीएसएफ के जवानों की टुकड़ियां मंगलवार को और एक्टिव हो गईं। इससे उपद्रवियों को भी सख्ती बढ़ने का संकेत चला गया है।
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हिंसा को लेकर सरकार की नई रणनीति
घाटी में कर्फ्यू जारी
- फोटो : PTI
दरअसल जम्मू-कश्मीर में इंटरनेशनल बॉर्डर और एलओसी पर तैनात बीएसएफ को आतंकी घुसपैठ रोकने सहित संदिग्धों की मूवमेंट ताड़ने का माहिर माना जाता है।
इसके अलावा घाटी के भीतरी इलाकों में वर्ष 1990 से लेकर 2004 तक आतंकवाद के खिलाफ चलाए गए अभियानों में बीएसएफ की मौजूदगी कारगर रही है। लेकिन 2004 में भीतरी इलाकों से हटाने के बाद बीएसएफ को फिर इन अभियानों में कभी शामिल नहीं किया गया। घाटी के वर्तमान हालात में बीएसएफ की वापसी को हालात बिगड़ने पर सख्ती बढ़ाने की जरूरत के जोड़कर देखा जा रहा है।
बीएसएफ की तैनाती पर प्रशासन कुछ भी बोलने से बच रहा है लेकिन सुरक्षा एजेंसियों की मानें तो सीआरपीएफ की जगह बीएसएफ को लाना डेढ़ महीने के हिंसा चक्र को लेकर नई सरकार की नई रणनीति का हिस्सा है।
घाटी में भीड़ की आड़ लेकर फायरिंग की कई वारदातें हो चुकी हैं। इसके अलावा पथराव की घटनाओं से निपटने के लिए एक ही तरह की रणनीति पर काम हो रहा है। सुरक्षा बलों के काम करने के अपने तौर तरीके होते हैं। बीएसएफ को उपद्रवियों से निपटने के लिए तैनात करना रणनीतिक बदलाव भर है जो परिस्थितियों के अनुसार किए जाते हैं।
इसके अलावा घाटी के भीतरी इलाकों में वर्ष 1990 से लेकर 2004 तक आतंकवाद के खिलाफ चलाए गए अभियानों में बीएसएफ की मौजूदगी कारगर रही है। लेकिन 2004 में भीतरी इलाकों से हटाने के बाद बीएसएफ को फिर इन अभियानों में कभी शामिल नहीं किया गया। घाटी के वर्तमान हालात में बीएसएफ की वापसी को हालात बिगड़ने पर सख्ती बढ़ाने की जरूरत के जोड़कर देखा जा रहा है।
बीएसएफ की तैनाती पर प्रशासन कुछ भी बोलने से बच रहा है लेकिन सुरक्षा एजेंसियों की मानें तो सीआरपीएफ की जगह बीएसएफ को लाना डेढ़ महीने के हिंसा चक्र को लेकर नई सरकार की नई रणनीति का हिस्सा है।
घाटी में भीड़ की आड़ लेकर फायरिंग की कई वारदातें हो चुकी हैं। इसके अलावा पथराव की घटनाओं से निपटने के लिए एक ही तरह की रणनीति पर काम हो रहा है। सुरक्षा बलों के काम करने के अपने तौर तरीके होते हैं। बीएसएफ को उपद्रवियों से निपटने के लिए तैनात करना रणनीतिक बदलाव भर है जो परिस्थितियों के अनुसार किए जाते हैं।