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कश्मीरी बच्चों को बे-तालीम रखने की साजिश, जलाए जा रहे हैं मासूमों के स्कूल

Fri, 28 Oct 2016 02:00 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू Updated Fri, 28 Oct 2016 02:00 PM IST
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conspiracy to keep kashmiri kids uneducated in jammu and kashmir
कश्मीर में जलाया गया एक स्कूल - फोटो : File Photo
111 दिन की हिंसा में कश्मीर में 21 स्कूलों को आग के हवाले कर दिया गया। यह अनायास नहीं है। जिस तरह तालिबान ने अफगानिस्तान में स्कूल तबाह किए थे, वैसा ही घाटी में हो रहा है। कश्मीर से हर क्षेत्र में एक के बाद एक होनहार युवाओं के आगे आने से आतंकी तंजीमों की चूलें हिल गईं हैं।
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उन्हें समझ आ गया है कि शिक्षित पीढ़ी उनके मंसूबों को भांप चुकी है। वह कश्मीर की आबोहवा बदलने को तत्पर है। तालीमशुदा बच्चे हाथ में पत्थर नहीं उठा रहे। उन्होंने अपने घरों के हालात देखे हैं। अपने से पहले की पीढ़ी को तबाह होते देखा है। उन्हें न आतंक कबूल है न आतंकी।
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आतंकियों को इलाकाई हिमायत की जो ताकत हासिल थी वह तेजी से खत्म होती जा रही है। इसीलिए आतंकी संगठनों ने कश्मीर में शिक्षा तंत्र ही नेस्तनाबूद करने की कोशिश शुरू की है। वे ज़ाहिलों की ऐसी जमात तैयार करना चाहते हैं जो उनके इशारे पर पत्थर से लेकर बंदूक तक उठा ले।
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घाटी का ही एक युवा शाह फैसल यूपीएससी के इम्तहान में अव्वल आकर पूरे देश का दुलारा बना। फैसल को जब स्कूल शिक्षा निदेशक की जिम्मेदारी मिली तो उन्हें लगा कि अब वह अपनी ही तरह की एक पूरी पीढ़ी तैयार कर सकेंगे। ऐसा न हुआ तो वे अपना दर्द बयान करने से खुद को रोक नहीं सके। 

चार महीने से बच्चों की पढ़ाई ठप

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चार महीने से पढ़ाई ठप - फोटो : File Photo
परवेज आलम की मिसाल भी सामने है। कश्मीर की बेटियां हाल ही में सियाचिन में तिरंगा लहराकर लौटी हैं। होनहार युवाओं की लंबी शृंखला बन रही है। सेना में भर्ती होती है तो सैलाब उमड़ पड़ता है। मां-बाप को भी अहसास हो गया है कि उन्होंने अपनी जिंदगी तो बर्बाद कर ली, लेकिन बच्चों के सपनों को नहीं मरने देंगे।

इसी संकल्प का नतीजा है कि अब आतंकियों की गतिविधियों की सूचनाएं सुरक्षा बलों तक तुरंत पहुंचने लगी हैं। ऐसी ही सूचना ने बुरहान का खात्मा कराया था। चार महीने से पढ़ाई ठप है। राज्य और केंद्र सरकार का फोकस इस पर जरूर है, लेकिन कोई कारआमद कोशिश नजर नहीं आती। 
 

शिक्षा मंत्री को मिल चुकी हैं धमकियां

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शिक्षा मंत्री नईम अख्तर - फोटो : Amar Ujala
शिक्षा मंत्री नईम अख्तर यह कहकर पल्ला झाड़ते दिखते हैं कि सरकार ने तो स्कूल खोल रखे हैं। शिक्षक भी स्कूल आ रहे हैं, लेकिन बच्चे विद्यालय नहीं पहुंच रहे। अभिभावकों को पहल करनी होगी कि उनके बच्चे स्कूल पहुंचें। शिक्षा मंत्री अलगाववादियों से भी गुहार लगा चुके हैं। बदले में धमकियां ही मिलीं।

बच्चों की जिंदगी तबाह हो रही है। नुकसान केवल इतना नहीं है कि वे तालीम से महरूम हैं, मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि खाली बैठे बच्चों के मन में हताशा, निराशा और गुस्से के जो भाव घर करते हैं वे उन्हें चिड़चिड़ा और असामान्य बना देते हैं। यह चिंताजनक भी है और भयावह भी।
 

अपराधियों को पकड़ने के लिए सिट गठित : डीजीपी

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डीजीपी ने दी जानकारी - फोटो : demo pic
पुलिस महानिदेशक के राजेंद्रा का कहना है कि घाटी के 21 स्कूलों को शरारती तत्वों ने निशाना बनाया है। इनकी पहचान करने के लिए स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम का गठन किया गया है।

यह टीम इन लोगों की जानकारी जुटाएगी। पकड़े जाने वालों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होगी। यही टीम स्कूलों की हिफाजत के लिए भी काम कर रही है। स्कूलों के आसपास की सुरक्षा को मॉनीटर किया जा रहा है।
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