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पेलेट गन से घायल हुए लोगों में 14 प्रतिशत की उम्र 15 साल से कम
ब्यूरो , अमर उजाला/श्रीनगर
Updated Mon, 22 Aug 2016 12:54 PM IST
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घाटी में हिंसा
- फोटो : PTI
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आतंकी बुरहान की मौत के बाद से कश्मीर घाटी में जारी हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही। वहीं पेलेट गन से घायल हो रहे लोगों की संख्या भी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।
इस बीच एक चौंकनी वाली रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक कश्मीर हिंसा में पेलेट गन से घायल लोगों में 14 प्रतिशत बच्चे हैं, जिनकी उम्र 15 साल से कम हैं। इन घायलों का उपचार कश्मीर घाटी के विभिन्न अस्पतालों और कुछ का दिल्ली स्थित एम्स में चल रहा है।
श्रीनगर के एसएममएचएस अस्पताल के डॉक्टरों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक अगस्त के पहले हफ्ते तक 933 गेलेट गन से घायल लोग अस्पताल में इलाज करवाने के लिए आए थे। जिसमें करीब 250 मरीजों की दोबारा सर्जरी करने की जरूरत है।
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इस बीच एक चौंकनी वाली रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक कश्मीर हिंसा में पेलेट गन से घायल लोगों में 14 प्रतिशत बच्चे हैं, जिनकी उम्र 15 साल से कम हैं। इन घायलों का उपचार कश्मीर घाटी के विभिन्न अस्पतालों और कुछ का दिल्ली स्थित एम्स में चल रहा है।
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श्रीनगर के एसएममएचएस अस्पताल के डॉक्टरों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक अगस्त के पहले हफ्ते तक 933 गेलेट गन से घायल लोग अस्पताल में इलाज करवाने के लिए आए थे। जिसमें करीब 250 मरीजों की दोबारा सर्जरी करने की जरूरत है।
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क्या बच्चों को भी प्रदर्शन में किया जा रहा शामिल
फाइल फोटो
डॉक्टरों के मुताबिक बच्चों की सर्जरी करने में उनको खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस रिपोर्ट के बाद सबसे बड़ा सवाल ये खड़ा हो रहा कि क्या हिंसा के दौरान बच्चों को आगे किया जा रहा है।
कश्मीर के जानकारों के मुताबिक सुरक्षा बलों को पेलेट गन को इस्तेमाल करने की अच्छी ट्रेनिंग दी जाती है। आमतौर पर जब भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पेलेट गन का इस्तेमाल होता है, तो छर्रों की चपेट में प्रदर्शन में आगे खड़े लोग ही आते हैं। ऐसे में यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या बच्चों को भी प्रदर्शन में शामिल किया जा रहा है?
कश्मीर के जानकारों के मुताबिक सुरक्षा बलों को पेलेट गन को इस्तेमाल करने की अच्छी ट्रेनिंग दी जाती है। आमतौर पर जब भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पेलेट गन का इस्तेमाल होता है, तो छर्रों की चपेट में प्रदर्शन में आगे खड़े लोग ही आते हैं। ऐसे में यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या बच्चों को भी प्रदर्शन में शामिल किया जा रहा है?