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उमस और गर्मी ने दी फूड प्वाइजनिंग को दावत
Jammu
Updated Mon, 04 Aug 2014 05:30 AM IST
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जम्मू। बारिश के बीच गर्मी और उमस बढ़ने के साथ ही फूड प्वाइजनिंग के मामलों में भी इजाफा होने लगा है। रोजाना अस्पतालों में फूड प्वाइजनिंग के मामले पहुंच रहे हैं। पिछले दो माह में ही विषाक्त भोजन करने से कई लोग जान गंवा चुके हैं। वातावरण में नमी के चलते बैक्टीरिया तेजी से पनप रहे हैं। डाक्टरों के अनुसार दूध से बने पदार्थों के खराब होने की सबसे अधिक आशंका रहती है, जो प्वाइजनिंग का कारक बनती है।
उमस में ऐसे पदार्थों में तेजी से संक्रमण पैदा हो जाता है, जो सीधे पाचन शक्ति पर हमला कर किसी भी व्यक्ति को डायरिया का शिकार बना देता है। जीएमसी के अधीक्षक डा. रविंद्र रतनपाल के अनुसार दूध से बने पदार्थों में सेलमोनिला और स्टेफीलोकाल (दोनों बैक्टीरिया के नाम) के कारण फूड प्वाइजनिंग की समस्या अधिक रहती है। सेलमोनिला फूड प्वाइजनिंग में थोड़ा बुखार होने के साथ अंतड़ियों में सूजन, उल्टी और दस्त के साथ कोई भी व्यक्ति डायरिया की चपेट में आ जाता है। मांसाहारी खाद्य पदार्थों में भी ऐसे संक्रमण रहते हैं। इसमें संक्रमण अपना असर 12 से 24 घंटे के बीच दिखाना शुरू कर देता है। इसी तरह स्टेफीलोकाल फूड प्वाइजनिंग में बैक्टीरिया तेजी से अपना जहर छोड़ते हैं। इसमें एक से 6 घंटे के भीतर फूड प्वाइजनिंग के लक्षण दिखना शुरू हो जाते हैं। मांसाहार से आम तौर पर क्लोसिटम फूड प्वाइजनिंग (बैक्टीरिया का नाम) की आशंका रहती है। किसी भी तरह के खाने में फूड प्वाइजनिंग से शुरुआत में खाना कितना जहरीला हो गया है, इसका पता चलना मुश्किल रहता है। हालांकि, ज्यादा खराब होने पर खाद्य पदार्थ का स्वाद बदल जाता है। और ज्यादा खराब होने पर वह बास मारता है, लेकिन किस खाने में कौन सा जहर बनता है यह बायोलाजिकल टेस्ट के बाद ही पता चल पाता है। मगर सेलमोनिला, स्टेफीलोकाल व क्लोसिटम बैक्टीरिया से ही खाद्य पदार्थ में सभी प्रकार के जहर बनते हैं।
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उमस में ऐसे पदार्थों में तेजी से संक्रमण पैदा हो जाता है, जो सीधे पाचन शक्ति पर हमला कर किसी भी व्यक्ति को डायरिया का शिकार बना देता है। जीएमसी के अधीक्षक डा. रविंद्र रतनपाल के अनुसार दूध से बने पदार्थों में सेलमोनिला और स्टेफीलोकाल (दोनों बैक्टीरिया के नाम) के कारण फूड प्वाइजनिंग की समस्या अधिक रहती है। सेलमोनिला फूड प्वाइजनिंग में थोड़ा बुखार होने के साथ अंतड़ियों में सूजन, उल्टी और दस्त के साथ कोई भी व्यक्ति डायरिया की चपेट में आ जाता है। मांसाहारी खाद्य पदार्थों में भी ऐसे संक्रमण रहते हैं। इसमें संक्रमण अपना असर 12 से 24 घंटे के बीच दिखाना शुरू कर देता है। इसी तरह स्टेफीलोकाल फूड प्वाइजनिंग में बैक्टीरिया तेजी से अपना जहर छोड़ते हैं। इसमें एक से 6 घंटे के भीतर फूड प्वाइजनिंग के लक्षण दिखना शुरू हो जाते हैं। मांसाहार से आम तौर पर क्लोसिटम फूड प्वाइजनिंग (बैक्टीरिया का नाम) की आशंका रहती है। किसी भी तरह के खाने में फूड प्वाइजनिंग से शुरुआत में खाना कितना जहरीला हो गया है, इसका पता चलना मुश्किल रहता है। हालांकि, ज्यादा खराब होने पर खाद्य पदार्थ का स्वाद बदल जाता है। और ज्यादा खराब होने पर वह बास मारता है, लेकिन किस खाने में कौन सा जहर बनता है यह बायोलाजिकल टेस्ट के बाद ही पता चल पाता है। मगर सेलमोनिला, स्टेफीलोकाल व क्लोसिटम बैक्टीरिया से ही खाद्य पदार्थ में सभी प्रकार के जहर बनते हैं।
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