{"_id":"27-45863","slug":"Jammu-45863-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"भाई की हत्या करने वाले की उम्रकैद बरकरार ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भाई की हत्या करने वाले की उम्रकैद बरकरार
Jammu
Updated Thu, 27 Mar 2014 05:32 AM IST
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जम्मू । संपत्ति के विवाद में अपने ही भाई की हत्या करने वाले जोगिंदर पाल को निचली अदालत द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने भी बरकरार रखा है। पुलिस केस के अनुसार 14 अप्रैल, 2008 को सुबह सवा आठ बजे सुंदरबनी थाने में लोकनाथ नामक व्यक्ति ने फोन पर बताया कि विशंभर नाथ (निवासी कालीदेह) ने फंदा लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। जांच के दौरान पता चला कि मृतक के दो भाई (हत्या आरोपी सहित) हैं और उसकी मौत के बाद दूसरे भाई ने उसकी संपत्ति पर कब्जा कर लिया। आरोपी द्वारा भाई की कब्जा की गई जमीन का विवाद पंचायत तक भी पहुंचा था और उसे सलाह दी गई थी कि भाई का हिस्सा उसे दे दिया जाए।
आरोपी भाई ने पंचायत का आदेश मानने से इंकार किया और मृतक के खिलाफ हो गया। जांच पूरी करने के बाद पुलिस ने अदालत में चालान पेश किया। सेशन जज राजोरी ने जिरह के बाद आरोपी जोगिंदर पाल को उम्रकैद की सजा सुनाई। खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान महसूस किया कि ट्रायल के दौरान यह निष्कर्ष निकला कि आरोपी ने ही अपराध को अंजाम दिया है। रिकार्ड में पेश किए गए प्रमाण भी यही संकेत देते हैं कि आरोपी ने ही हत्या को अंजाम दिया। खंडपीठ ने कहा कि सेशन जज ने प्रमाणों के आधार पर इस मामले में जो फैसला दिया, वह सही था। आरोपी को दोषी करार दिए जाने में किसी प्रकार की तथ्यात्मक या कानूनी खामी नहीं थी। इसलिए आरोपी के खिलाफ आरपीसी की धारा 302 (हत्या) में कार्रवाई के तहत उम्रकैद की सजा और पांच हजार रुपये का जुर्माना बरकरार रखा जाता है। खंडपीठ ने कहा कि इस त्वरित आपराधिक अपील में कोई दम नहीं है, इसलिए इसे खारिज किया जाता है। जेएनएफ
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आरोपी भाई ने पंचायत का आदेश मानने से इंकार किया और मृतक के खिलाफ हो गया। जांच पूरी करने के बाद पुलिस ने अदालत में चालान पेश किया। सेशन जज राजोरी ने जिरह के बाद आरोपी जोगिंदर पाल को उम्रकैद की सजा सुनाई। खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान महसूस किया कि ट्रायल के दौरान यह निष्कर्ष निकला कि आरोपी ने ही अपराध को अंजाम दिया है। रिकार्ड में पेश किए गए प्रमाण भी यही संकेत देते हैं कि आरोपी ने ही हत्या को अंजाम दिया। खंडपीठ ने कहा कि सेशन जज ने प्रमाणों के आधार पर इस मामले में जो फैसला दिया, वह सही था। आरोपी को दोषी करार दिए जाने में किसी प्रकार की तथ्यात्मक या कानूनी खामी नहीं थी। इसलिए आरोपी के खिलाफ आरपीसी की धारा 302 (हत्या) में कार्रवाई के तहत उम्रकैद की सजा और पांच हजार रुपये का जुर्माना बरकरार रखा जाता है। खंडपीठ ने कहा कि इस त्वरित आपराधिक अपील में कोई दम नहीं है, इसलिए इसे खारिज किया जाता है। जेएनएफ
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