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75 फीसदी यात्रियों की अनुमति मिलने पर बस व मेटाडोर चलाने को तैयार
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उधमपुर। 50 प्रतिशत यात्रियों को बिठाने के विरोध में मंगलवार को लगातार सातवें दिन बस व मेटाडोर ने आवाजाही को बंद रखा। इससे यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। बस व मेटाडोर के यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि आम जनता परेशान है और सरकार व प्रशासन इसको लेकर कुछ नहीं कर रहा है। अगर उनको 75 प्रतिशत यात्रियों को बिठाने की भी अनुमति दी जाती है तो वह वाहन चलाने को तैयार हैं।
गौरतलब है कि सरकारी आदेश के विरोध में बुधवार से बस व मेटाडोर ने आवाजाही को बंद रखा है। इसको लेकर एक बार सरकार के साथ बातचीत हुई, लेकिन बातचीत में किसी तरह से सहमति नहीं बन सकी है। यात्रियों की संख्या या फिर किराए में बढ़ोतरी किए बिना चालक वाहन चलाने को मजबूर नहीं है। मेटाडोर यूनियन के प्रधान दर्शन सिंह ने कहा कि बस व मेटाडोर की आवाजाही बंद होने पर हर वर्ग परेशान है। विशेष तौर पर गरीब व मध्यवर्गीय परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिस स्थान पर सफर करने के लिए पहले 50 रुपये किराया देना पड़ता था। वहां पर अब 200 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
जिन रूट पर बस व मेटाडोर चलती हैं, वहां पर टैंपों सहित अन्य छोटे वाहन वाले 100 फीसदी से अधिक यात्रियों को बिठा रहे है। इनकी न तो कोई जांच कर रहा है और न ही किसी तरह से कोई कार्रवाई की जा रही है। सरकार व प्रशासन के सारे प्रतिबंध केवल व बस व मेटाडोर के लिए हैं। सरकार व प्रशासन को आम आदमी की परेशानी को ध्यान में रखते उनको वाहन चलाने की अनुमति देनी चाहिए। अगर उनको 75 यात्रियों को बिठाने की भी अनुमति दे देते हैं, तो वह किराए में बढ़ोतरी के बगैर भी वाहन चलाने को तैयार है। उन्होंने कहा कि उनकी हड़ताल का समर्थन करने के लिए अब टैंकर यूनियन भी आ गई है। हो सकता है कि वह भी टैंकर की आवाजाही को बंद कर रोष प्रकट करें।
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गौरतलब है कि सरकारी आदेश के विरोध में बुधवार से बस व मेटाडोर ने आवाजाही को बंद रखा है। इसको लेकर एक बार सरकार के साथ बातचीत हुई, लेकिन बातचीत में किसी तरह से सहमति नहीं बन सकी है। यात्रियों की संख्या या फिर किराए में बढ़ोतरी किए बिना चालक वाहन चलाने को मजबूर नहीं है। मेटाडोर यूनियन के प्रधान दर्शन सिंह ने कहा कि बस व मेटाडोर की आवाजाही बंद होने पर हर वर्ग परेशान है। विशेष तौर पर गरीब व मध्यवर्गीय परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिस स्थान पर सफर करने के लिए पहले 50 रुपये किराया देना पड़ता था। वहां पर अब 200 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
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जिन रूट पर बस व मेटाडोर चलती हैं, वहां पर टैंपों सहित अन्य छोटे वाहन वाले 100 फीसदी से अधिक यात्रियों को बिठा रहे है। इनकी न तो कोई जांच कर रहा है और न ही किसी तरह से कोई कार्रवाई की जा रही है। सरकार व प्रशासन के सारे प्रतिबंध केवल व बस व मेटाडोर के लिए हैं। सरकार व प्रशासन को आम आदमी की परेशानी को ध्यान में रखते उनको वाहन चलाने की अनुमति देनी चाहिए। अगर उनको 75 यात्रियों को बिठाने की भी अनुमति दे देते हैं, तो वह किराए में बढ़ोतरी के बगैर भी वाहन चलाने को तैयार है। उन्होंने कहा कि उनकी हड़ताल का समर्थन करने के लिए अब टैंकर यूनियन भी आ गई है। हो सकता है कि वह भी टैंकर की आवाजाही को बंद कर रोष प्रकट करें।
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