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Udhampur News: अवैध रूप से भारत में रह रहे विदेशी नागरिक की जमानत याचिका खारिज
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उधमपुर। प्रधान सत्र न्यायाधीश ने सोमवार को पासपोर्ट अधिनियम और विदेशी अधिनियम के तहत अपराधों के आरोपी मोहम्मद शाह जलाल को पक्ष और विपक्ष में तर्क, प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर तर्कों पर विचार कर जमानत याचिका को खारिज कर दिया।
आवेदक का तर्क था कि वह 17 जनवरी, 2025 से हिरासत में है। जांच पूरी हो चुकी है और उसे लगातार हिरासत में रखने का कोई उद्देश्य नहीं है। उसका दावा है कि उसका उधमपुर में एक स्थायी निवास है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि वह फरार नहीं होगा और वह किसी भी शर्त का पालन करने का वचन देता है।
अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि अभियुक्त अवैध रूप से भारत में आया है, उसके भागने का खतरा है और वह सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है या गवाहों को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अभियुक्त एक विदेशी नागरिक है जिसे निर्वासित किया जाना चाहिए और जमानत देने से इसी तरह के अपराधों को बढ़ावा मिल सकता है। न्यायालय ने आवेदन, आपत्तियों, आरोप-पत्र और साक्ष्यों की समीक्षा की और पाया कि अभियुक्त बिना कानूनी अनुमति के उधमपुर में रह रहा था, जिसके कारण उस पर पासपोर्ट अधिनियम और विदेशी अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए।
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न्यायालय ने गृह विभाग के उस निर्देश को स्वीकार किया जिसमें आवेदक सहित अवैध अप्रवासियों की पहचान करने और उन्हें निर्वासित करने का निर्देश दिया गया था और यह भी कि आवेदक को निर्वासन के लिए एक हिरासत केंद्र में रखा गया है। न्यायालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा, आवेदक की अवैध अप्रवासी स्थिति, राष्ट्रीय संसाधनों के लिए संभावित खतरे और आवेदक के फरार होने के जोखिम का हवाला देते हुए जमानत याचिका को अस्वीकार कर दिया।
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आवेदक का तर्क था कि वह 17 जनवरी, 2025 से हिरासत में है। जांच पूरी हो चुकी है और उसे लगातार हिरासत में रखने का कोई उद्देश्य नहीं है। उसका दावा है कि उसका उधमपुर में एक स्थायी निवास है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि वह फरार नहीं होगा और वह किसी भी शर्त का पालन करने का वचन देता है।
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अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि अभियुक्त अवैध रूप से भारत में आया है, उसके भागने का खतरा है और वह सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है या गवाहों को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अभियुक्त एक विदेशी नागरिक है जिसे निर्वासित किया जाना चाहिए और जमानत देने से इसी तरह के अपराधों को बढ़ावा मिल सकता है। न्यायालय ने आवेदन, आपत्तियों, आरोप-पत्र और साक्ष्यों की समीक्षा की और पाया कि अभियुक्त बिना कानूनी अनुमति के उधमपुर में रह रहा था, जिसके कारण उस पर पासपोर्ट अधिनियम और विदेशी अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए।
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न्यायालय ने गृह विभाग के उस निर्देश को स्वीकार किया जिसमें आवेदक सहित अवैध अप्रवासियों की पहचान करने और उन्हें निर्वासित करने का निर्देश दिया गया था और यह भी कि आवेदक को निर्वासन के लिए एक हिरासत केंद्र में रखा गया है। न्यायालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा, आवेदक की अवैध अप्रवासी स्थिति, राष्ट्रीय संसाधनों के लिए संभावित खतरे और आवेदक के फरार होने के जोखिम का हवाला देते हुए जमानत याचिका को अस्वीकार कर दिया।