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Udhampur News: भेड़पालकों को वैज्ञानिक तरीके से भेड़ पालन की दी जानकारी
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किश्तवाड़। जिला भेड़ पालन विभाग किश्तवाड़ की ओर से उपमंडल छात्रू में जागरूकता एवं प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। उपायुक्त किश्तवाड़ पंकज कुमार शर्मा के दिशा-निर्देशों के तहत आयोजित इस शिविर में 50 से अधिक भेड़पालकों ने भाग लिया। इस दौरान भेड़पालकों को वैज्ञानिक तरीके से भेड़ पालन, पशुओं की देखभाल, ऊन प्रबंधन, बीमारियों से बचाव तथा विभागीय योजनाओं की जानकारी दी गई। शिविर में भेड़पालकों को निःशुल्क पशु चिकित्सा प्राथमिक उपचार किट भी वितरित की गईं।
जिला भेड़पालन अधिकारी डॉ. अजहर मोमिन बिचू सहित पशु चिकित्सा सहायक सर्जन एवं विभाग के अन्य अधिकारियों ने प्रतिभागियों को पशुओं के उचित पोषण, स्वच्छता, बेहतर आवास व्यवस्था और झुंड प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। अधिकारियों ने समय पर टीकाकरण, नियमित स्वास्थ्य जांच और संक्रामक बीमारियों की रोकथाम पर विशेष जोर दिया। साथ ही राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के महत्व से भी अवगत करवाया।
सर्दियों को देखते हुए ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहने वाले भेड़पालकों को पशुओं के लिए पर्याप्त चारे, सुरक्षित आश्रय और समय पर चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था करने की सलाह दी गई, ताकि प्रतिकूल मौसम के कारण पशुओं को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
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इस अवसर पर पशु चिकित्सा सहायक सर्जन छात्रू डॉ. इदरीस मलिक ने विभाग की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और सहायता कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए पात्र लाभार्थियों से इनका लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने ऊन की वैज्ञानिक तरीके से कटाई, उचित रखरखाव और भंडारण के महत्व पर भी प्रकाश डाला, जिससे ऊन की गुणवत्ता और बाजार में उसकी मांग बेहतर हो सके।
जिला भेड़पालन अधिकारी डॉ. अजहर मोमिन बिचू ने कहा कि विभाग का उद्देश्य दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले भेड़पालकों को वैज्ञानिक जानकारी और बेहतर पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करवाकर उनकी आजीविका को मजबूत बनाना है। उन्होंने भेड़पालकों से विभागीय कर्मचारियों के संपर्क में रहने और सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की। शिविर में भेड़पालकों और विभागीय अधिकारियों के बीच संवाद भी हुआ। विभाग ने भविष्य में जिले के दूरदराज क्षेत्रों में ऐसे जागरूकता एवं प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
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जिला भेड़पालन अधिकारी डॉ. अजहर मोमिन बिचू सहित पशु चिकित्सा सहायक सर्जन एवं विभाग के अन्य अधिकारियों ने प्रतिभागियों को पशुओं के उचित पोषण, स्वच्छता, बेहतर आवास व्यवस्था और झुंड प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। अधिकारियों ने समय पर टीकाकरण, नियमित स्वास्थ्य जांच और संक्रामक बीमारियों की रोकथाम पर विशेष जोर दिया। साथ ही राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के महत्व से भी अवगत करवाया।
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सर्दियों को देखते हुए ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहने वाले भेड़पालकों को पशुओं के लिए पर्याप्त चारे, सुरक्षित आश्रय और समय पर चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था करने की सलाह दी गई, ताकि प्रतिकूल मौसम के कारण पशुओं को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
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इस अवसर पर पशु चिकित्सा सहायक सर्जन छात्रू डॉ. इदरीस मलिक ने विभाग की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और सहायता कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए पात्र लाभार्थियों से इनका लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने ऊन की वैज्ञानिक तरीके से कटाई, उचित रखरखाव और भंडारण के महत्व पर भी प्रकाश डाला, जिससे ऊन की गुणवत्ता और बाजार में उसकी मांग बेहतर हो सके।
जिला भेड़पालन अधिकारी डॉ. अजहर मोमिन बिचू ने कहा कि विभाग का उद्देश्य दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले भेड़पालकों को वैज्ञानिक जानकारी और बेहतर पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करवाकर उनकी आजीविका को मजबूत बनाना है। उन्होंने भेड़पालकों से विभागीय कर्मचारियों के संपर्क में रहने और सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की। शिविर में भेड़पालकों और विभागीय अधिकारियों के बीच संवाद भी हुआ। विभाग ने भविष्य में जिले के दूरदराज क्षेत्रों में ऐसे जागरूकता एवं प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।