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Udhampur News: बसतंगढ़ की पूजा बुटीक से शुरू किया स्वरोजगार
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उधमपुर। बसंतगढ़ में अपनी बुटीक पर महिलाओं को सिलाई सिखाती पूजा देवी: संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। जिले के सुदूरवर्ती इलाके बसंतगढ़ गांव में पूजा देवी (30) ने अपना बुटीक का स्वरोजगार शुरू कर आत्मनिर्भरता की तरफ कदम बढाया है। उसने इस काम के लिए पहले ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से टेलरिंग का प्रशिक्षण लिया।
इसके उपरांत 60 हजार का बैंक लोन और 40 हजार रुपये की अपनी जमापूंजी लगाकर अपना खुद का बुटीक खोलकर अपना स्वरोगजार शुरू कर दिया। करीब 3 साल पहले पूजा ने अपने दृड़ विश्वास और मजबूत हौंसले के लिए इस स्वरोजगार की शुरुआत की थी और अब वे हर महीने 10 से 15 हजार के आसपास आजीविका कमा रहीं हैं।
पूजा देवी कहती हैं कि उनका गांव जिला उधमपुर का अंतिम छोर माना जाता है और यह जिला मुख्यालय से लगभग 95 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। स्नातक की पढ़ाई पूरी होने के बाद स्थानीय केवल कुमार से विवाह हुआ, जो एक निजी दूरसंचार कंपनी में काम करते हैं। अधिक आय नहीं होने के कारण परिवार का भरण-पोषण करने में कठिनाई हुई तो अपने सिलाई के शौक को ही अपने स्वरोजगार का जरिया बनाने की सोची। लेकिन सिलाई इकाई शुरू करने के लिए मेरे पास पर्याप्त कौशल नहीं था। फिर एक दिन एसबीआई ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान की जानकारी मिली और फिर वहां से महिला दर्जी प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस कार्यक्रम ने न केवल उनके सिलाई कौशल को निखारा, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए भी प्रेरित किया। उनका आत्मविश्वास बढ़ा और अब वह न केवल एक साधारण दर्जी, बल्कि अपने गाँव और आसपास के इलाकों में एक प्रसिद्ध सिलाई विशेषज्ञ बन गई हैं।
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पूजा देवी कहती हैं कि पहले के मुकाबले अब उनकी जिंदगी बदल गई। पहले घरेलू कामकाज में ही जिंदगी बीत रही थी और परिवार की कम आय से भरण पोषण में भी कठिनाई आ रही थी। लेकिन बाद में जब मैंने स्वयं सिलाई का व्यवसाय शुरू किया और धीरे-धीरे अपनी आय बढ़ाई। पति की कमाई से अब उनका परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हो गया है। अपनी इकाई पर वे अन्य महिलाओं को सिलाई सिखाती हैं, ताकि वे भी आत्मनिर्भर बन सकें।
पूजा देवी का सफ़र न सिर्फ़ उनके निजी संघर्ष को दर्शाता है, बल्कि आरसेटी जैसी संस्थाओं की अहम भूमिका को भी उजागर करता है, जो समाज में आर्थिक और सामाजिक बदलाव लाने में योगदान देती हैं।
आज पूजा देवी न सिर्फ़ अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में कामयाब रही हैं, बल्कि कई अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत भी बन गई हैं, उन्हें राह दिखा रही हैं। उनकी मेहनत और संघर्ष ने साबित कर दिया है कि अगर इरादा मजबूत हो और सही दिशा में कदम उठाए जाएँ, तो किसी भी स्थिति को बदलना संभव है।
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उधमपुर। जिले के सुदूरवर्ती इलाके बसंतगढ़ गांव में पूजा देवी (30) ने अपना बुटीक का स्वरोजगार शुरू कर आत्मनिर्भरता की तरफ कदम बढाया है। उसने इस काम के लिए पहले ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से टेलरिंग का प्रशिक्षण लिया।
इसके उपरांत 60 हजार का बैंक लोन और 40 हजार रुपये की अपनी जमापूंजी लगाकर अपना खुद का बुटीक खोलकर अपना स्वरोगजार शुरू कर दिया। करीब 3 साल पहले पूजा ने अपने दृड़ विश्वास और मजबूत हौंसले के लिए इस स्वरोजगार की शुरुआत की थी और अब वे हर महीने 10 से 15 हजार के आसपास आजीविका कमा रहीं हैं।
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पूजा देवी कहती हैं कि उनका गांव जिला उधमपुर का अंतिम छोर माना जाता है और यह जिला मुख्यालय से लगभग 95 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। स्नातक की पढ़ाई पूरी होने के बाद स्थानीय केवल कुमार से विवाह हुआ, जो एक निजी दूरसंचार कंपनी में काम करते हैं। अधिक आय नहीं होने के कारण परिवार का भरण-पोषण करने में कठिनाई हुई तो अपने सिलाई के शौक को ही अपने स्वरोजगार का जरिया बनाने की सोची। लेकिन सिलाई इकाई शुरू करने के लिए मेरे पास पर्याप्त कौशल नहीं था। फिर एक दिन एसबीआई ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान की जानकारी मिली और फिर वहां से महिला दर्जी प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस कार्यक्रम ने न केवल उनके सिलाई कौशल को निखारा, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए भी प्रेरित किया। उनका आत्मविश्वास बढ़ा और अब वह न केवल एक साधारण दर्जी, बल्कि अपने गाँव और आसपास के इलाकों में एक प्रसिद्ध सिलाई विशेषज्ञ बन गई हैं।
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पूजा देवी कहती हैं कि पहले के मुकाबले अब उनकी जिंदगी बदल गई। पहले घरेलू कामकाज में ही जिंदगी बीत रही थी और परिवार की कम आय से भरण पोषण में भी कठिनाई आ रही थी। लेकिन बाद में जब मैंने स्वयं सिलाई का व्यवसाय शुरू किया और धीरे-धीरे अपनी आय बढ़ाई। पति की कमाई से अब उनका परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हो गया है। अपनी इकाई पर वे अन्य महिलाओं को सिलाई सिखाती हैं, ताकि वे भी आत्मनिर्भर बन सकें।
पूजा देवी का सफ़र न सिर्फ़ उनके निजी संघर्ष को दर्शाता है, बल्कि आरसेटी जैसी संस्थाओं की अहम भूमिका को भी उजागर करता है, जो समाज में आर्थिक और सामाजिक बदलाव लाने में योगदान देती हैं।
आज पूजा देवी न सिर्फ़ अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में कामयाब रही हैं, बल्कि कई अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत भी बन गई हैं, उन्हें राह दिखा रही हैं। उनकी मेहनत और संघर्ष ने साबित कर दिया है कि अगर इरादा मजबूत हो और सही दिशा में कदम उठाए जाएँ, तो किसी भी स्थिति को बदलना संभव है।