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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Udhampur News ›   TB remains a serious problem in the district, five deaths every month

जिले की गंभीर समस्या बनी टीबी, हर महीने पांच मौतें

Sat, 24 Dec 2016 12:32 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/उधमपुर
ब्यूरो, अमर उजाला/उधमपुर Updated Sat, 24 Dec 2016 12:32 AM IST
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TB remains a serious problem in the district, five deaths every month
टीबी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

टीबी बीमारी को निर्मूल करने के लिए एक तरफ विश्व स्वास्थ्य संगठन जहां गंभीर है, वहीं जिले में इस बीमारी से मौत का आंकड़ा खौफनाक होता जा रहा है। पिछले चार साल में टीबी से 259 मरीजों की मौत हो चुकी है। यानी हर साल औसतन करीब 65 मरीज की जिंदगी टीबी निगल जाती है। इस खतरनाक आंकड़ों के लिए स्वास्थ्य विभाग लोगों में जागरूकता का अभाव मानता है।

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टीबी बीमारियों से लोगों को बचाने और जागरूक करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने डॉट्स (डायरेक्टली ऑबजर्ब्ड ट्रीटमेंट, शॉर्ट क्योर) नाम से एक योजना बनाई। डॉट्स का अस्पतालों में एक अलग ही विभाग होता है। इसके तहत टीबी के संदिग्ध मरीजों की तुरंत जांच कर इलाज शुरू किया जाता है।
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मुफ्त में तब तक दवाइयां भी दी जाती हैं, जब तक मरीज स्वस्थ नहीं हो जाता है। इस योजना के तहत लोगों को जागरूक भी किया जाता है। इन तमाम सुविधाओं के बावजूद टीबी जिले में तेजी से पांव फैला रहा है। इसकी गंभीरता का पता तब चला जब चार साल में टीबी पीड़ितों का आंकड़ा सामने आया। चार साल में 259 मरीजों की मौत अति गंभीर स्थिति को इंगित करता है।
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यह आंकड़े सिर्फ रिकार्ड में हैं। इसके अलावा भी मौतें होती हैं। इसके लिए लोगों में जागरूकता का अभाव और स्वास्थ्य विभाग की पहल नाकाफी जिम्मेदार है। यह स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी मान रहे हैं। लोगों को समय पर इलाज और दवा नहीं मिलती है। कई मामलों में तब तक पता चलता है, तब तक देर हो चुकी होती है।

बता दें िक टीबी अस्पताल में केवल जिले से ही नहीं, जिले के बाहर से आने वाले मरीज भी अपनी जांच करवाते हैं। रियासी के माहौर, कटड़ा और अन्य दूरदराज क्षेत्रों से मरीज आते हैं। मरीजों की संख्या में इजाफा होना विभागीय कार्यप्रणाली की लापरवाही बयां करता है। लोगों को इस गंभीर बीमारी से बचाने के िलए गंभीरता से जागरूकता अिभयान चलाने की जरूरत है।

30 हजार मरीजों की जांच चार वर्षों में हुई
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक चार वर्षों में जिले में तीस हजार से अधिक टीबी मरीजों की जांच की गई। इनमें से दो हजार से अधिक संक्रमित पाए गए। जबकि पांच हजार से अधिक मरीजों का उपचार भी किया गया है। सिर्फ वर्ष 2016 के नवंबर माह तक 33 लोगों की मौत टीबी से हो चुकी है।


चार वर्षों में टीबी मरीजों की संख्या में इजाफा जरूर हुआ। इससे लगता है कि कहीं न कहीं जागरूकता में कमी आई है। हालांकि स्वास्थ्य कर्मी जगह-जगह जाकर लोगों को जागरूक तो करते हैं, लेकिन मरीज अस्पताल में आने की बजाय निजी क्लीनिकों के चक्कर काटते रहते हैं। अस्पताल में टीबी की मरीज का बिना पंजीकरण के उपचार करना संभव नहीं होता है। इस कारण स्वास्थ्य विभाग कोशिश करेगा कि लोगों को इसके प्रति ओर अच्छे तरीके से जागरूक किया जाए।
-डा. चंद्र प्रकाश, सीएमओ उधमपुर

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