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बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों व मंदिर में हुए हमलों के विरोध में इस्कान मंदिर की तरफ से निकाला गया शाति मार्च
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शहर में शांति मार्च निकालते इस्कान मंदिर समिति के सदस्य
- फोटो : UDHAMPUR
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उधमपुर। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों और इस्कॉन मंदिर में हुए हमलों के विरोध में मंगलवार को मंदिर समिति ने नगर में शांति मार्च निकाला। इस दौरान संकीर्तन करते हुए मंदिर समिति के सदस्यों ने धार रोड से दब्बड चौक तक हाथों में बैनर लेकर रोष जताया।
इस दौरान बांग्लादेश में इस्कॉन मंदिर में हुए हमले और एक अनुयायी पार्थ दास की हत्या करने के मामले पर रोष जताते हुए सदस्यों ने गहरा दुख व्यक्त किया। वक्ताओं ने कहा कि सरकार से विनम्र प्रार्थना है कि इस मामले का संज्ञान ले, और पड़ोसी मुल्कों में हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि लोग चुप हैं, इसका यह मतलब नहीं है कि उनके साथ कुछ भी किया जाए।
इसके साथ उन्होंने बांग्लादेश सरकार से भी आग्रह किया कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब बांग्लादेश में इस्कॉन मंदिर में हमला हुआ है। दो साल पहले भी मंदिर को निशाना बनाया गया था। लेकिन, तब किसी भक्त को क्षति नहीं पहुंचाई गई थी। इस बार उनके तीन भक्तों को क्षति पहुंचाई गई है। इसलिए, वह बार-बार ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
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उन्होंने भारत सरकार से निवेदन किया है कि ऐसी घटनाओं की रोकथाम को लेकर कोई उचित कदम उठाए जाए, और विश्व भर के इस्कॉन मंदिरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि इस्कॉन के सदस्य शांतिप्रिय कार्य कर रहे हैं। उनका किसी से कोई बैर नहीं हैं। उनके लिए सभी उनके भाई-बहन हैं। लेकिन, बाकी लोगों को भी यह समझने की जरूरत है।
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इस दौरान बांग्लादेश में इस्कॉन मंदिर में हुए हमले और एक अनुयायी पार्थ दास की हत्या करने के मामले पर रोष जताते हुए सदस्यों ने गहरा दुख व्यक्त किया। वक्ताओं ने कहा कि सरकार से विनम्र प्रार्थना है कि इस मामले का संज्ञान ले, और पड़ोसी मुल्कों में हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि लोग चुप हैं, इसका यह मतलब नहीं है कि उनके साथ कुछ भी किया जाए।
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इसके साथ उन्होंने बांग्लादेश सरकार से भी आग्रह किया कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब बांग्लादेश में इस्कॉन मंदिर में हमला हुआ है। दो साल पहले भी मंदिर को निशाना बनाया गया था। लेकिन, तब किसी भक्त को क्षति नहीं पहुंचाई गई थी। इस बार उनके तीन भक्तों को क्षति पहुंचाई गई है। इसलिए, वह बार-बार ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
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उन्होंने भारत सरकार से निवेदन किया है कि ऐसी घटनाओं की रोकथाम को लेकर कोई उचित कदम उठाए जाए, और विश्व भर के इस्कॉन मंदिरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि इस्कॉन के सदस्य शांतिप्रिय कार्य कर रहे हैं। उनका किसी से कोई बैर नहीं हैं। उनके लिए सभी उनके भाई-बहन हैं। लेकिन, बाकी लोगों को भी यह समझने की जरूरत है।