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आंखों में रोशनी नहीं, पर नाम किया रोशन
राघव बनाथिया, पौनी
Updated Sat, 11 Mar 2017 12:54 AM IST
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टॉपर सुकृति अपने दादा के साथ।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जन्म से ही आंखों में रोशनी नहीं, लेकिन पढ़ाई में गजब की ललक। आखिर उसकी इस ललक ने सुकृति सुरी को कामयाबी की एक सीढ़ी चढ़ा दी। सुकृति ने आठवीं बोर्ड परीक्षा के परिणाम में 244 अंक हासिल कर मैरिट लिस्ट में पहले स्थान पर रही। सुकृति पर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे जिले को गर्व है।
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सुकृति ने कभी अपनी आंखों को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। छोटी उम्र से ही पढ़ाई के प्रति उसका जुनून गजब का था। इसके चलते परिवार के सदस्यों ने उसे और प्रोत्साहित किया। सुकृति के पिता रमन सुरी तथा माता मीना कोचर दोनों अध्यापक हैं। उन्होंने उसकी प्रतिभा को परख लिया। उसे हर तरह से मदद करते रहे। समन सुरी ने कहा कि सुकृति न केवल पढ़ाई में तेज है, बल्कि घर का कामकाज भी पूरी तरह से करती है।
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उसे देखकर ऐसा लगता नहीं है कि वह बचपन से देख नहीं पाती। उन्होंने कहा कि सुकृति के लिए बोर्ड से परीक्षा में लिखने के लिए असिस्टेंट लगाने की अनुमति मांगी थी। प्रश्नों का सुकृति जवाब देती थी और असिस्टेंट लिखता था। ऐसे में उसका टॉपर होना किसी के लिए गर्भ की बात है। सुकृति की बड़ी बहन शिभांगी ने भी आठवीं तथा दसवीं में जिले में जिले में पहला स्थान हासिल किया था। सुकृति के जज्बे को पूरी रियासी सलाम करती है। रिश्तेदारों ने भी शुभकामनाएं दीं।
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