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Udhampur News: चौबीस घंटे में 49 मिमी बारिश, कहीं पुल नहीं, कहीं सड़कें बनीं बाधा
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बुधवार को हो रही तेज बारिश के दौरान शहर के पुराने राजमार्ग से गुजरते दुपहिया वाहन
- फोटो : udhampur news
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उधमपुर। जिले में बीती रात से जारी तेज बारिश ने ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाल संपर्क व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं की तैयारियों की एक बार फिर पोल खोल दी। रात में 32.2 मिलीमीटर और बुधवार सुबह साढ़े 8 बजे से शाम साढ़े 5 बजे तक 16.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। करीब 24 घंटे में हुई 49 मिलीमीटर बारिश के बीच सबसे अधिक परेशानी उन ग्रामीण इलाकों में सामने आई, जहां नदी-नालों पर स्थायी पुल नहीं हैं और सड़कें पहले से ही जर्जर हालत में हैं। इन परिस्थितियों के बीच भारी बारिश में बच्चों के स्कूल पहुंचने और जर्जर स्कूल भवनों में कक्षाओं के संचालन को लेकर भी सुरक्षा पर सवाल खड़े हुए।
ग्रामीण इलाकों में नदी-नालों पर पुलों का अभाव बारिश के दौरान सबसे बड़ी परेशानी बनकर सामने आया। सामान्य दिनों में जिन बरसाती नालों को ग्रामीण किसी तरह पार कर स्कूल, काम और बाजार तक पहुंचते हैं। बारिश के दौरान जलस्तर बढ़ते ही वही रास्ते बंद हो गए। कई स्थानों पर सड़क मार्ग पर बनाए गए डायवर्जन भी बरसाती पानी में डूब गए। तेज बहाव के कारण वाहन चालकों और यात्रियों को रास्ते में रुककर पानी कम होने का इंतजार करना पड़ा। औसू-पखलाई सड़क पर दक्खडू नाला, समरोली के समीप बांत, लड्डा के वार्ड नंबर 2 जैसे कुछ स्थानों पर लोगों को लौटना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि पुलों के निर्माण की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। पुल मंजूर भी हुए हैं लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं होने के कारण हर बारिश में आवाजाही का संकट खड़ा हो जाता है।
जर्जर सड़कों ने बढ़ाई मुश्किल
बारिश ने ग्रामीण सड़कों की खस्ताहालत को भी उजागर कर दिया। चौंतरा माता सड़क, रामनगर-लड़ाना, उधमपुर-जस्सरकोट, जोफड़-कुल्थयां, गुजोड-चिरडी, लाटी-बप्प, बरमीन- धारनू सड़क सहित कई संपर्क मार्गों पर पानी और कीचड़ जमा होने से वाहनों की रफ्तार मंद हो गई। पहले से खराब सड़कों पर जगह-जगह बने गड्ढों में पानी भर जाने से चालकों के लिए खतरा और बढ़ गया। ग्रामीणों के अनुसार सामान्य मौसम में भी इन सड़कों पर आवाजाही आसान नहीं होती लेकिन बारिश के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती है। जर्जर सड़कें, पानी से भरे गड्ढे और उफनते बरसाती नाले मिलकर ग्रामीणों के लिए रोजाना सफर को जोखिम भरा बना देते हैं।
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भारी बारिश में बच्चों की सुरक्षित आवाजाही पर सवाल
बारिश की सबसे गंभीर चिंता स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर सामने आई। ग्रामीण क्षेत्रों में कई विद्यार्थी ऐसे रास्तों से होकर स्कूल पहुंचते हैं, जहां बरसात के दौरान नदी-नालों का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है। पुलों के अभाव और खराब संपर्क मार्गों के बीच बच्चों का स्कूल आना-जाना अभिभावकों के लिए चिंता का कारण बना रहा। ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि स्कूल आने-जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए। उनका सवाल है कि जब रास्तों पर पानी का बहाव तेज हो और कई संपर्क मार्ग बाधित हों तो बच्चों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए क्या पर्याप्त इंतजाम हैं।
जर्जर स्कूल भवनों में कक्षाएं, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
बारिश के बीच जर्जर स्कूल भवनों में कक्षाओं के संचालन ने चिंता को और बढ़ा दिया। भारी बारिश के बीच शहर के भीतर भी जर्जर हो चुके सरकारी मिडिल स्कूल शिव नगर में बच्चे टीन के शेड के नीचे बैठकर पढ़ाई करते नजर आए। यही शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में जर्जर भवनों वाले स्कूलों का भी रहा। अभिभावकों का कहना है कि जिन स्कूल भवनों की हालत पहले से खराब है, वहां तेज बारिश के दौरान बच्चों और शिक्षकों को कक्षाओं में बैठाना सुरक्षा के लिहाज से गंभीर विषय है। बारिश के दौरान भवनों में सीलन, छतों से पानी टपकने और कमजोर ढांचे को लेकर खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में अभिभावकों ने सवाल उठाया कि क्या सभी जर्जर स्कूल भवनों का बारिश से पहले सुरक्षा ऑडिट किया गया है। ग्रामीणों की मांग है कि संवेदनशील भवनों में कक्षाएं संचालित करने के बजाय वैकल्पिक व्यवस्था की जाए और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।
बाजारों पर भी पड़ा बारिश का असर
लगातार बारिश का असर शहर के सामान्य जनजीवन और बाजारों पर भी पड़ा। खराब मौसम और ग्रामीण क्षेत्रों से बाधित आवाजाही के कारण बाजारों में ग्राहकों की आमद कम रही। इससे दुकानदारों के कारोबार पर भी असर पड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों से लोगों के शहर नहीं पहुंच पाने का असर बाजार की गतिविधियों पर साफ दिखाई दिया। शहर और आसपास की गलियों व सड़कों पर बने गड्ढों में पानी भरने से भी आवाजाही चुनौतीपूर्ण रही। कई स्थानों पर जलभराव के कारण पैदल चलने वालों और दोपहिया वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मौसम विभाग के अनुसार 23 अगस्त तक बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना को देखते हुए संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, मलबा गिरने और अचानक बाढ़ जैसी स्थिति का खतरा बना रह सकता है।
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ग्रामीण इलाकों में नदी-नालों पर पुलों का अभाव बारिश के दौरान सबसे बड़ी परेशानी बनकर सामने आया। सामान्य दिनों में जिन बरसाती नालों को ग्रामीण किसी तरह पार कर स्कूल, काम और बाजार तक पहुंचते हैं। बारिश के दौरान जलस्तर बढ़ते ही वही रास्ते बंद हो गए। कई स्थानों पर सड़क मार्ग पर बनाए गए डायवर्जन भी बरसाती पानी में डूब गए। तेज बहाव के कारण वाहन चालकों और यात्रियों को रास्ते में रुककर पानी कम होने का इंतजार करना पड़ा। औसू-पखलाई सड़क पर दक्खडू नाला, समरोली के समीप बांत, लड्डा के वार्ड नंबर 2 जैसे कुछ स्थानों पर लोगों को लौटना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि पुलों के निर्माण की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। पुल मंजूर भी हुए हैं लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं होने के कारण हर बारिश में आवाजाही का संकट खड़ा हो जाता है।
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जर्जर सड़कों ने बढ़ाई मुश्किल
बारिश ने ग्रामीण सड़कों की खस्ताहालत को भी उजागर कर दिया। चौंतरा माता सड़क, रामनगर-लड़ाना, उधमपुर-जस्सरकोट, जोफड़-कुल्थयां, गुजोड-चिरडी, लाटी-बप्प, बरमीन- धारनू सड़क सहित कई संपर्क मार्गों पर पानी और कीचड़ जमा होने से वाहनों की रफ्तार मंद हो गई। पहले से खराब सड़कों पर जगह-जगह बने गड्ढों में पानी भर जाने से चालकों के लिए खतरा और बढ़ गया। ग्रामीणों के अनुसार सामान्य मौसम में भी इन सड़कों पर आवाजाही आसान नहीं होती लेकिन बारिश के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती है। जर्जर सड़कें, पानी से भरे गड्ढे और उफनते बरसाती नाले मिलकर ग्रामीणों के लिए रोजाना सफर को जोखिम भरा बना देते हैं।
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भारी बारिश में बच्चों की सुरक्षित आवाजाही पर सवाल
बारिश की सबसे गंभीर चिंता स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर सामने आई। ग्रामीण क्षेत्रों में कई विद्यार्थी ऐसे रास्तों से होकर स्कूल पहुंचते हैं, जहां बरसात के दौरान नदी-नालों का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है। पुलों के अभाव और खराब संपर्क मार्गों के बीच बच्चों का स्कूल आना-जाना अभिभावकों के लिए चिंता का कारण बना रहा। ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि स्कूल आने-जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए। उनका सवाल है कि जब रास्तों पर पानी का बहाव तेज हो और कई संपर्क मार्ग बाधित हों तो बच्चों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए क्या पर्याप्त इंतजाम हैं।
जर्जर स्कूल भवनों में कक्षाएं, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
बारिश के बीच जर्जर स्कूल भवनों में कक्षाओं के संचालन ने चिंता को और बढ़ा दिया। भारी बारिश के बीच शहर के भीतर भी जर्जर हो चुके सरकारी मिडिल स्कूल शिव नगर में बच्चे टीन के शेड के नीचे बैठकर पढ़ाई करते नजर आए। यही शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में जर्जर भवनों वाले स्कूलों का भी रहा। अभिभावकों का कहना है कि जिन स्कूल भवनों की हालत पहले से खराब है, वहां तेज बारिश के दौरान बच्चों और शिक्षकों को कक्षाओं में बैठाना सुरक्षा के लिहाज से गंभीर विषय है। बारिश के दौरान भवनों में सीलन, छतों से पानी टपकने और कमजोर ढांचे को लेकर खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में अभिभावकों ने सवाल उठाया कि क्या सभी जर्जर स्कूल भवनों का बारिश से पहले सुरक्षा ऑडिट किया गया है। ग्रामीणों की मांग है कि संवेदनशील भवनों में कक्षाएं संचालित करने के बजाय वैकल्पिक व्यवस्था की जाए और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।
बाजारों पर भी पड़ा बारिश का असर
लगातार बारिश का असर शहर के सामान्य जनजीवन और बाजारों पर भी पड़ा। खराब मौसम और ग्रामीण क्षेत्रों से बाधित आवाजाही के कारण बाजारों में ग्राहकों की आमद कम रही। इससे दुकानदारों के कारोबार पर भी असर पड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों से लोगों के शहर नहीं पहुंच पाने का असर बाजार की गतिविधियों पर साफ दिखाई दिया। शहर और आसपास की गलियों व सड़कों पर बने गड्ढों में पानी भरने से भी आवाजाही चुनौतीपूर्ण रही। कई स्थानों पर जलभराव के कारण पैदल चलने वालों और दोपहिया वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मौसम विभाग के अनुसार 23 अगस्त तक बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना को देखते हुए संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, मलबा गिरने और अचानक बाढ़ जैसी स्थिति का खतरा बना रह सकता है।