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Udhampur News: रामनगर की साढ़े 7 किमी लंबी जलेरा-तागन कूहल 43 साल बाद भी नहीं हो पाई पूरी

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jammu kashmir news
जालेरा-तागन कूल के पास खड़े ग्रामीण अपनी व्यथा सुनाते - फोटो : udhampur news
उधमपुर। रामनगर तहसील की पंचायत सत्या में नाला जलेरा से तागन गांव तक किसानों की सुविधा के लिए बनाई जा रही साढ़े 7 किलोमीटर लंबी कूहल (सिंचाई नहर) 43 साल बाद भी पूरी नहीं हो पाई है। इसको लेकर ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ रोष है। उनका कहना है कि ग्रामीण 43 साल से कूहल बनने का इंतजार कर रहे हैं लेकिन आज तक इसका काम पूरा नहीं हो पाया है। बारी-बारी से अब तक इस पर विभिन्न विभागों की तरफ से अब तक 8.19 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं और अब सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग की तरफ से बीते साल 2.15 करोड़ का नया टेंडर जारी किया गया है। इस पैसे को भी कूहल निर्माण का काम पूरा करने की बजाय पहले से बनी कूहल की मरम्मत पर खर्च किया जा रहा है।
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कोट
यह काफी चिंताजनक है कि एक तरफ सरकार गांवों को सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएं बना रही हैं और दूसरी तरफ विकास कार्याें को पूरा करने में इस तरह की देरी से ग्रामीणों की उम्मीदों को तोड़ रही है। जब इस कूहल का काम शुरू हुआ था तब मेरी उम्र 47 साल थी और आज 90 साल की उम्र में भी इस कूहल को बनाने की मांग करनी पड़ रही है।
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-मंदा राम, स्थानीय निवासी

साल 1982 में इस कूहल को बनाने का काम शुरू किया गया था। आज 2025 के अंत तक भी इसका काम पूरा नहीं हो पाया है। पहले जिला सेक्टर, फिर नाबार्ड और इसके बाद एआईबीपी के तहत इसपर अब तक 8.19 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं लेकिन अभी तक यह सिर्फ पांच किलोमीटर ही बन पाई है। अभी नया फंड जो मंजूर हुआ है उसे भी आगे का निर्माण कार्य पूरा करने की बजाय पहले से तैयार हिस्से की मरम्मत पर लगाया जा रहा है।
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-- एससी डोगरा, संयोजक, बीआर आंबेडकर वरिष्ठ नागरिक पेंशनभोगी और कल्याण संघ


इस कूहल को बनाने का उद्देश्य पंचायत के उन गांवाें को भी सिंचाई प्रणाली से जोड़ना था, जहां पानी की कमी के कारण फसलों की बढि़या पैदावार नहीं हो पाती है लेकिन इस कूहल के निर्माण कार्य में इतनी अधिक देरी से तागन गांव के किसान आज भी सिंचाई व्यवस्था से कोसों दूर ही रह रहे हैं। गांव में मुख्य रूप से मक्की, गेहूं और धान की पारंपरिक खेती होती है,और इसके लिए भी बारिश पर ही निर्भर रहना पड़ता है।
- वेद प्रकाश, स्थानीय निवासी
ग्रामीण इलाकों के विकास को सुनिश्चित करने के लिए सरकार को ठोस निगरानी नीति बनानी चाहिए ताकि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी विकास कार्याें की ऐसी दुर्गति न हो। हम बीते लगभग साढ़े चार दशक से कूहल बनने का इंतजार कर रहे हैं। बचपन से जवानी और अब अधेड़ हो चले हैं लेकिन आज भी कूहल का निर्माण कार्य पूरा होने का नाम नहीं है। सरकार को इसकी उच्च स्तरीय जांच करवानी चाहिए।

-- कुलवंत राज, स्थानीय निवासी
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कोट
जलेरा नाले से तागन गांव के लिए कूहल बनाने का काम जोरशोर से चल रहा है। अब यूटी कैपेक्स के तहत 2.15 करोड़ के नए टेंडर के मुताबिक इसकी कुल लंबाई बढ़ाकर 8.5 की जानी है। इससे तागन, लडाना और बारी तीन गांव कवर होंगे। साल 2026 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
--हरपाल सिंह, एक्सईएन, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग उधमपुर
रिपोर्ट-विजय कुमार
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