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उधमपुर में मानवता शर्मसार: बच्चे की मौत के बाद एंबुलेंस के लिए गिड़गिड़ाता रहा पिता, मांगे 1800 रुपये
Sun, 22 Feb 2026 01:25 AM IST
Digvijay Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
Published by: Digvijay Singh
Updated Sun, 22 Feb 2026 01:25 AM IST
सार
उधमपुर में गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में शनिवार को मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई। मौंगरी गांव के एक दो साल के मासूम की उपचार के दौरान मृत्यु हो गई।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उधमपुर में गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में शनिवार को मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई। मौंगरी गांव के एक दो साल के मासूम की उपचार के दौरान मृत्यु हो गई लेकिन शोक संतप्त परिवार को शव घर ले जाने के लिए तीन घंटे तक एंबुलेंस के लिए भटकना पड़ा। आरोप है कि जीएमसी प्रशासन ने गरीब परिवार से एंबुलेंस भेजने के बदले 1,800 रुपये पेट्रोल खर्च की मांग की।
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मजबूर पिता कलेजे के टुकड़े की मृत देह लेकर अस्पताल परिसर में घंटों गुहार लगाता रहा लेकिन किसी का का दिल नहीं पसीजा। जब घटना की जानकारी मिली तो जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुमित मगोत्रा तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने देखा कि बेबस पिता बेटे के शव के साथ बाहर बैठा है और प्रशासन पेट्रोल के पैसों के लिए अड़ा हुआ है। मगोत्रा ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई और निजी तौर पर एंबुलेंस की व्यवस्था कर परिवार को गांव मौंगरी के लिए रवाना किया।
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अस्पताल प्रशासन पर हमलावर हुए सुमित मगोत्रा ने कहा कि जीएमसी बनने के बाद जनता को उम्मीद थी कि सुविधाएं बेहतर होंगी लेकिन यहां तो बुनियादी ढांचा ही चरमरा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मरीजों को सामान्य दवाइयां भी बाजार से खरीदनी पड़ रही हैं। सीटी स्कैन जैसी जरूरी सुविधाओं के लिए निजी केंद्रों पर भेजा जा रहा है। मगोत्रा ने विधायक को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यदि जनप्रतिनिधियों को जनता की बदहाली के बारे में नहीं पता है तो उनका पद पर रहना सही नहीं है।
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एलजी से मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग
मगोत्रा ने पूछा-यह कौन सा सिस्टम है जहां गरीब से उसके बच्चे के शव को ले जाने के लिए पैसे मांगे जा रहे हैं? यदि एंबुलेंस के तेल का खर्च गरीबों से ही लेना है तो जीएमसी का क्या औचित्य? इससे बेहतर तो पुराना जिला अस्पताल ही था। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि ऐसी कोई नीति है जिसमें एंबुलेंस के पेट्रोल का खर्च गरीबों से लिया जा रहा है तो इसे तुरंत बदलना चाहिए। अगर गरीब और मजबूर लोगों के साथ ऐसा व्यवहार जारी रहा तो पार्टी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगी। इसके लिए सड़कों पर उतरने से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने उपराज्यपाल प्रशासन से मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
दस किलोमीटर तक शव स्थानांतरित करने के लिए एंबुलेंस निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है जबकि लंबी दूरी के लिए कोई प्रावधान नहीं है। मौंगरी काफी दूरदराज का इलाका है। घटना के बाद स्थानीय सहयोग से एंबुलेस मुफ्त उपलब्ध करवा दी गई थी लेकिन हर बार इस तरह का दबाव झेलना जीएमसी प्रबंधन के लिए भी संभव नहीं है। -डॉ. संजीव गुप्ता, चिकित्सा अधीक्षक, जीएमसी