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Udhampur News: भद्रवाह में तीन दिवसीय प्राचीन कैलाश कुंड यात्रा संपन्न
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भद्रवाह। तीन दिन की पवित्र कैलाश कुंड की यात्रा पूरी कर वापस भद्रवाह में लौटती छड़ी यात्रा: संव
संवाद न्यूज एजेंसी
भद्रवाह। भद्रवाह में समुद्र तल से 14,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित पवित्र कैलाश कुंड से ऐतिहासिक वासुकी नाग मंदिर गाठा में छड़ी यात्रा की वापसी के साथ तीन दिवसीय प्राचीन कैलाश यात्रा शुक्रवार शाम सफलतापूर्वक संपन्न हो गई।
वार्षिक कैलाश यात्रा के अंतिम दिन हजारों तीर्थयात्री पवित्र बर्फ की झील में डुबकी लगाने के लिए उच्च ऊंचाई वाले कैलाश कुंड में एकत्रित हुए थे। यह यात्रा गाठा भद्रवाह के प्राचीन नाग मंदिर से शुरू हुई थी और रास्ते में भलेसा, बसंतगढ़, बनी, डुडू, बिलावर और मथोला सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों से आधा दर्जन छड़ी यात्राएं भी इसके साथ शामिल हुईं थीं। 20, 21 और 22 अगस्त को क्रमशः हयान, रामतुंड और ऋषि डल में रात्रि विश्राम करने के बाद 21 किलोमीटर लंबी यात्रा के दौरान तीर्थयात्री पवित्र कैलाश कुंड पहुंचे।
यहां उन्होंने भगवान शिव और वासुकी नाग का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए ऊंचाई पर स्थित झील के बर्फीले पानी में स्नान किया। यह कुंड ठंडे और क्रिस्टल जैसे साफ पानी से भरपूर एक विशाल झील है जिसकी परिधि 1.5 मील है और यह समुद्र तल से 14,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।
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स्थानीय मान्यता के अनुसार कैलाश कुंड मूलतः शिव का निवास स्थान था, लेकिन भगवान शिव ने इसे वासुकी नाग को दे दिया और स्वयं भरमौर (हिमाचल प्रदेश) के मणिमहेश में रहने चले गए।
काली नाग, हयान, गण थाक, गौ-पीरा, रामतुंड, शंख पादर और अंत में आज कैलाश कुंड में प्राचीन अनुष्ठान करने के बाद ''छड़ी'' शुक्रवार को भद्रवाह वापस पहुंची, जहां वासुक डेरा में भगवान वासुकी नाग के सैकड़ों उत्साही अनुयायियों ने इसका स्वागत किया।
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भद्रवाह। भद्रवाह में समुद्र तल से 14,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित पवित्र कैलाश कुंड से ऐतिहासिक वासुकी नाग मंदिर गाठा में छड़ी यात्रा की वापसी के साथ तीन दिवसीय प्राचीन कैलाश यात्रा शुक्रवार शाम सफलतापूर्वक संपन्न हो गई।
वार्षिक कैलाश यात्रा के अंतिम दिन हजारों तीर्थयात्री पवित्र बर्फ की झील में डुबकी लगाने के लिए उच्च ऊंचाई वाले कैलाश कुंड में एकत्रित हुए थे। यह यात्रा गाठा भद्रवाह के प्राचीन नाग मंदिर से शुरू हुई थी और रास्ते में भलेसा, बसंतगढ़, बनी, डुडू, बिलावर और मथोला सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों से आधा दर्जन छड़ी यात्राएं भी इसके साथ शामिल हुईं थीं। 20, 21 और 22 अगस्त को क्रमशः हयान, रामतुंड और ऋषि डल में रात्रि विश्राम करने के बाद 21 किलोमीटर लंबी यात्रा के दौरान तीर्थयात्री पवित्र कैलाश कुंड पहुंचे।
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यहां उन्होंने भगवान शिव और वासुकी नाग का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए ऊंचाई पर स्थित झील के बर्फीले पानी में स्नान किया। यह कुंड ठंडे और क्रिस्टल जैसे साफ पानी से भरपूर एक विशाल झील है जिसकी परिधि 1.5 मील है और यह समुद्र तल से 14,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।
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स्थानीय मान्यता के अनुसार कैलाश कुंड मूलतः शिव का निवास स्थान था, लेकिन भगवान शिव ने इसे वासुकी नाग को दे दिया और स्वयं भरमौर (हिमाचल प्रदेश) के मणिमहेश में रहने चले गए।
काली नाग, हयान, गण थाक, गौ-पीरा, रामतुंड, शंख पादर और अंत में आज कैलाश कुंड में प्राचीन अनुष्ठान करने के बाद ''छड़ी'' शुक्रवार को भद्रवाह वापस पहुंची, जहां वासुक डेरा में भगवान वासुकी नाग के सैकड़ों उत्साही अनुयायियों ने इसका स्वागत किया।