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Udhampur News: विधानसभा में उठा घोड़ा-खच्चर, पिट्ठू और पालकी संचालकों का मुद्दा
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विधायक बलदेव राज ने पुनर्वास नीति के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा
कटड़ा। विधायक बलदेव राज शर्मा ने शुक्रवार को विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर कार्यरत पारंपरिक सेवा प्रदाताओं के पुनर्वास का अहम मुद्दा उठाया। उन्होंने घोड़ा-खच्चर, पिट्ठू और पालकी संचालकों के लिए नई पुनर्वास नीति बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। विधानसभा में बलदेव राज ने कहा कि ये सेवा प्रदाता दशक से श्रद्धालुओं की निस्वार्थ सेवा कर रहे हैं, लेकिन बदलते समय, नई आधारभूत संरचनाओं और प्रशासनिक निर्णय के चलते इनके समक्ष गंभीर सामाजिक व आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
सदन का ध्यान इस ओर दिलाया कि वर्तमान में लागू नीतियां और व्यवस्थाएं अपर्याप्त हैं, जिनसे पारंपरिक सेवा प्रदाताओं की आजीविका, सम्मान और भविष्य सुरक्षित नहीं हो पा रहा है। विकास के साथ-साथ उन लोगों के हितों की रक्षा भी उतनी जरूरी है, जिन्होंने वर्षों तक तीर्थयात्रियों की सेवा में जीवन समर्पित किया है। गंभीर मुद्दे पर विधानसभा अध्यक्ष ने संज्ञान लेते हुए सरकार को निर्देश दिए कि मामले की गहन जांच की जाए और पारंपरिक सेवा प्रदाताओं के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी और न्यायसंगत पुनर्वास नीति तैयार करने को आवश्यक कदम उठाए जाएं।
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कटड़ा। विधायक बलदेव राज शर्मा ने शुक्रवार को विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर कार्यरत पारंपरिक सेवा प्रदाताओं के पुनर्वास का अहम मुद्दा उठाया। उन्होंने घोड़ा-खच्चर, पिट्ठू और पालकी संचालकों के लिए नई पुनर्वास नीति बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। विधानसभा में बलदेव राज ने कहा कि ये सेवा प्रदाता दशक से श्रद्धालुओं की निस्वार्थ सेवा कर रहे हैं, लेकिन बदलते समय, नई आधारभूत संरचनाओं और प्रशासनिक निर्णय के चलते इनके समक्ष गंभीर सामाजिक व आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
सदन का ध्यान इस ओर दिलाया कि वर्तमान में लागू नीतियां और व्यवस्थाएं अपर्याप्त हैं, जिनसे पारंपरिक सेवा प्रदाताओं की आजीविका, सम्मान और भविष्य सुरक्षित नहीं हो पा रहा है। विकास के साथ-साथ उन लोगों के हितों की रक्षा भी उतनी जरूरी है, जिन्होंने वर्षों तक तीर्थयात्रियों की सेवा में जीवन समर्पित किया है। गंभीर मुद्दे पर विधानसभा अध्यक्ष ने संज्ञान लेते हुए सरकार को निर्देश दिए कि मामले की गहन जांच की जाए और पारंपरिक सेवा प्रदाताओं के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी और न्यायसंगत पुनर्वास नीति तैयार करने को आवश्यक कदम उठाए जाएं।
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