कश्मीर के रण में दो पूर्व सीएम, दिलचस्प मुकाबला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू-कश्मीर के दो लोकसभा क्षेत्रों में इस बार दिलचस्प मुकाबला है। ये दोनों क्षेत्र हैं श्रीनगर और उधमपुर -डोडा। दोनों सीटों पर सत्ताधारी गठबंधन नेकां से दो पूर्व मुख्यमंत्री चुनाव लड़ रहे हैं। ये दोनों और कोई नहीं बल्कि यूपीए सरकार में कैबिनेट मंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला और गुलाम नबी आजाद हैं।
सत्ताधारी नेशनल कान्फ्रेंस ने डॉ. फारूक अब्दुल्ला को लगातार दूसरी बार श्रीनगर लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया हैं। इन दोनों नेताओं ने अपने - अपने क्षेत्रों में चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया है।
खास बात यह है कि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री गुलाम नबी आजाद अपने सियासी जीवन का पहला लोकसभा चुनाव अपने गृह राज्य और लोकसभा क्षेत्र से लड़ रहे हैं। इसलिए सत्ताधारी और विपक्षी दलों की नजरें उधमपुर - डोडा लोकसभा सीट पर टिक गई हैं।
आजाद की होगी अग्नि परीक्षा
इससे पूर्व आजाद दो दफा लोकसभा के लिए महाराष्ट्र के बाशिम लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस की टिकट पर 1980 और 1984 में निर्वाचित हुए थे। लिहाजा अब आजाद की अपने ही गृह लोकसभा क्षेत्र में अग्निपरीक्षा है। यह बात दीगर है कि आजाद 2006 में राज्य का मुख्यमंत्री बनने के बाद डोडा जिले की भद्रवाह विधानसभा सीट से चुनाव लड़कर विधायक बने थे।
आजाद के मुकाबले में पैंथर्स के प्रो. भीम सिंह, भाजपा के डॉ. जितेंद्र सिंह, बसपा के धर्मपाल बलगोत्रा और जेकेडीएफ के अनिल गुप्ता प्रमुख उम्मीदवार हैं। 2008 में उमर अब्दुल्ला के विधानसभा के लिए निर्वाचित होने और इसके उनके बाद मुख्यमंत्री बनने पर डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने भी नेकां की पारंपरिक लोकसभा सीट श्रीनगर से 2009 में लोकसभा चुनाव लड़ा था।
चुनाव जीतने के बाद डॉ. अब्दुल्ला यूपीए टू की कैबिनेट के सदस्य हैं। नेकां ने दोबारा डॉ. अब्दुल्ला को इसी सीट से अपना प्रत्याशी बनाया है। उनका मुकाबला पीडीपी द्वारा घोषित प्रत्याशी और पूर्व मंत्री तारिक हमीद करा से तय है। तारिक हमीद करा किसी जमाने में नेशनल कान्फ्रेंस के खासमखास लोगों में से एक थे।