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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Terrorists are working on the strategy to build psychological pressure on security forces

मनोवैज्ञानिक दबाव की रणनीति को कश्मीर में अंजाम देने में जुटे आतंकी

Fri, 31 Aug 2018 05:14 PM IST
प्रांजल दीक्षित, जम्मू
प्रांजल दीक्षित, जम्मू Updated Fri, 31 Aug 2018 05:14 PM IST
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Terrorists are working on the strategy to build psychological pressure on security forces
सांकेतिक तस्वीर

जम्मू-कश्मीर में पिछले दिनों सुरक्षाबलों ने जिस अंदाज में दहशतगर्दों पर चौतरफा शिकंजा कसना शुरू किया उससे घबराए आतंकियों ने सुरक्षाबलों के परिवार वालों का बड़ी संख्या में अपहरण कर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश की है। बीते एक साल में सुरक्षाबलों ने बुरहान वानी सहित कई बड़े आतंकियों का खात्मा किया है। इससे कश्मीर में सक्रिय सभी आतंकी संगठनों की रीढ़ टूटती नजर आने लगी है। 

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दक्षिण कश्मीर का इलाका छोड़ दें तो स्थानीय आतंकियों के लिए दूसरी कोई जगह नहीं बची है। अचानक इतने बड़े पैमाने पर पुलिसवालों के रिश्तेदारों का अपहरण सुरक्षाबलों के साथ-साथ राज्य मे पहली बार नियुक्त किए गए राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले राज्यपाल सत्यपाल मलिक पर दबाव बनाने की रणनीति का भी हिस्सा है। क्योंकि घाटी में इससे पहले जितने भी राज्यपाल नियुक्त किए गए वह या तो सेना से रिटायर्ड होते थे या फिर ब्यूरोक्रेसी से जुड़े होते थे। ऐसे में राजनीतिक बैकग्राउंड वाला व्यक्ति आतंकियों को सॉफ्ट पर्सनालिटी लगता है।
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हाल के दिनों की घटनाओं पर नजर डालें तो पता चलता है कि विशेष रूप से दक्षिण कश्मीर के शोपियां, अनंतनाग, कुलगाम, पुलवामा जैसे इलाके जो आतंकियों का गढ़ हैं वहां सुरक्षाबलोंको काफी सफलता मिली है। खासतौर पर जो नए युवा संगठन में शामिल हो रहे हैं वह कुछ ही दिनों में सुरक्षाबलों के हाथो मार दिए जा रहे। इससे आतंकियों के प्रति स्थानीय लोगों में भी आक्रोश पनप रहा है। ये अलग बात है कि परिस्थितियां ऐसी हैं कि आक्रोश खुल कर सामने नहीं आ पा रहा।
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इन परिस्थितियों में आतंकी संगठन यह मानते हैं कि यदि स्थानीय लोगों के मन से भय खत्म हो गया तो उनके पैर और जल्दी उखड़ जाएंगे। दूसरा आतंकियों को लगता है कि उनके बारे में स्थानीय लोग इन्फार्मर की भूमिका निभाते हैं इसलिए उन पर दबाव बनाए रखना जरूरी है। और वह इन अपहरण जैसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।
 

मिशन ऑलआउट से आतंकियों पर बढ़ा दबाव

मिशन ऑलआउट के तहत इस साल जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ जारी मिशन में सुरक्षाबलों ने सेंचुरी मारी है। सुरक्षाबलों ने इस साल के बीते छह महीनों में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 100 आतंकियों को ढेर किया है। गृह राज्य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने प्रभात झा के एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि इस साल 8 जुलाई तक जम्मू कश्मीर में 100 आतंकवादी मारे गए हैं। 

टेरर फंडिंग पर भी सुरक्षाबलों ने कसा शिकंजा

टेरर फंडिंग के लिए आतंकी युवाओं को ड्रग्स बेचकर अपनी फंडिंग का रास्ता निकाल रहे थे। जिसपर नकेल कसते हुए बीते दिनों पुलिस ने जम्मू के नरवाल चौक से 50 किलो हेरोइन के साथ ट्रक के ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ्तार किया गया था। इस हेरोइन की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमत 250 करोड़ आंकी गई थी।

अफगानिस्तान से पाक अधिकृत कश्मीर और उसके बाद कश्मीर में हेरोइन पहुंचने के पीछे आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश करने में भी पुलिस जुटी हुई है। पंजाब में चिट्टे को लेकर पहले से ही गंभीरता जताई जा रही है। पंजाब में सबसे अधिक इसकी खपत होती है। पुलिस इस संभावनाओं से भी इंकार नहीं कर रही है कि पाक प्रायोजित आतंकवाद के बाद पंजाब में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए साजिश तैयारी की जा रही है।

मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए आतंकियों ने पुलिसकर्मियों के परिजनों का शुरू किया अपहरण

दक्षिणी कश्मीर के तीन जिलों कुलगाम, अनंतनाग व पुलवामा से आतंकियों ने गुरुवार से अब तक पुलिसकर्मियों के 11 परिजनों का अपहरण किया है। इनमें एक डीएसपी व एक एसएचओ का भाई है। पिछले 48 घंटे में पुलिसकर्मियों के परिवार वालों के अपहरण होने के बाद पूरी घाटी में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। डीजीपी डॉ. एसपी वैद का कहना है कि मामले की छानबीन की जा रही है। आतंकियों ने पहले भी धमकी दी थी कि यदि उनके परिवार वालों के साथ ज्यादती की गई तो सुरक्षाबलों के परिवार भी सुरक्षित नहीं रह पाएंगे। 

गुरुवार को आतंकी रियाज नायकू के पिता को पूछताछ के लिए उठाए जाने, दो आतंकियों के घर जलाए जाने और आतंकी सैयद सलाहुदीन के दूसरे बेटे को एनआईए की ओर से गिरफ्तार किए जाने के बाद अपहरण की घटनाएं सामने आई हैं। माना जा रहा है कि परिवार वालों के साथ सुरक्षाबलों की ओर से सख्ती किए जाने पर बौखलाए आतंकियों ने अपहरण की वारदातों को अंजाम दिया। गुरुवार को पहले तीन पुलिसकर्मियों के परिजनों के अपहरण की बात सामने आई। फिर यह संख्या बढ़कर पांच हुई और देर रात तक नौ हो गई थी। शुक्रवार सुबह फिर से दो और लोगों के अपहरण की खबर आई, जिनका अपहरण हुआ है।

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