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Samvad 2023: सुरेश रैना और इरफान पठान का जम्मू और कश्मीर से है खास नाता, दिग्गजों ने संवाद में खुलकर की बात

Thu, 30 Nov 2023 02:30 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: विजय पुंडीर Updated Thu, 30 Nov 2023 02:30 PM IST
सार

अमर उजाला की ओर से आयोजित किए गए संवाद कार्यक्रम में भारत के पूर्व दिग्गज क्रिकेटर्स सुरेश रैना और इरफान पठान भी पहुंचे और खेल से जुड़ी यादों को साझा किया। सुरेश रैना और इरफान पठान का जम्मू-कश्मीर से खास रिश्ता रहा है। 

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Suresh Raina and Irfan Pathan participated in Amar Ujala Samvad program
Amar Ujala Samvad - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमर उजाला की ओर से संवाद कार्यक्रम का आयोजन आज कन्वेंशन सेंटर जम्मू में किया जा रहा है। राष्ट्रगान और दीप प्रज्वलित के साथ अमर उजाला संवाद कार्यक्रम की शुरुआत हुई। भारत के पूर्व दिग्गज क्रिकेटर्स सुरेश रैना और इरफान पठान भी कार्यक्रम में पहुंचे हैं और खेल से जुड़ी यादों को साझा किया।

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सुरेश रैना और इरफान पठान का जम्मू और कश्मीर से खास रिश्ता रहा है। जम्मू कश्मीर क्रिकेट संघ (जेकेसीए) ने इरफान पठान को टीम का कोच-कम-मेंटर नियुक्त किया था। वहीं, सुरेश रैना का पैतृक गांव जम्मू और कश्मीर का रैनावारी है। 1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों की हत्या के बाद उनके पिता ने गांव छोड़ दिया था। इसके बाद यह लोग गाजियाबाद के मुरादनगर आ गए थे। अमर उजाला संवाद में दोनों दिग्गजों ने खुलकर बात की।

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सवाल: आपका तो परिवार ही कश्मीर की धरती से आता है, जिसके बारे में कहा जाता है कि धरती पर अगर कहीं स्वर्ग है तो वो कश्मीर में है। आपने यहां जो करारनामा किया है, उसे कैसे देखते हैं?
सुरेश रैना: जम्मू-कश्मीर बहुत ही खूबसूरत जगह है। पिताजी सेना में थे। 2018 में हम जम्मू-कश्मीर बनाम उत्तर प्रदेश का मैच हुआ था। इरफान ने यहां बहुत काम किया है। कई खिलाड़ी यहां से निकले। मैं चाहता था कि जम्मू-कश्मीर को कुछ लौटा सकूं। जब पहली बार खेला था तो यहां से फोन आया कि वापस लौट आओ, लेकिन मैं उत्तर प्रदेश में पैदा हुआ हूं तो पिताजी ने मना किया। भारतीय टीम अभी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। आने वाले समय में हम चाहते हैं कि जम्मू का कोई बच्चा भारतीय टीम में खेले।

सवाल: स्विंग के किंग आप रहे हैं। हमारा पहला नाता जम्मू-कश्मीर से रहा है। आपके प्रयासों के बारे में बताइए। नए खिलाड़ी क्या करें?
इरफान पठान: मुझे और सुरेश रैना को यहां बड़े मंच पर आमंत्रित करने के लिए शुक्रिया। सुरेश रैना भी जम्मू-कश्मीर में आकर कुछ करना चाहते थे इसलिए उन्होंने एमओयू साइन किया। हमने 60 हजार बच्चों को क्रिकेट खिलाया था। फिर कुछ नतीजे मिले। यहां 24 जिले हैं। वहां सभी को क्रिकेट खेलने का मौका मिले, हम यही चाहते थे। दिल्ली के ताज होटल में जम्मू-कश्मीर क्रिकेट संघ के पदाधिकारी थे। साथ ही कपिल देव जी थे। वहां मुझे बुलाया गया था। उस वक्त मेरे हाथ में चार लीग थीं। मैंने सोचा था कि रिटायरमेंट के बाद बाहर जाकर खेलूं। एक बड़ा कमर्शियल पहलू भी था। कपिल देव जी ने एक ही बात बोली कि अगर आप जम्मू-कश्मीर क्रिकेट के साथ जुड़ते हैं तो क्रिकेट को कुछ लौटाने का मौका आपको यहीं मिलेगा। मैंने दो दशक से ज्यादा क्रिकेट खेला हूं। एक हजार विकेट निकाले हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर में दो साल जो मैंने काम किया, वह मेरी जिंदगी के सबसे सुनहरे पल थे।

सवाल: हमें लग रहा था कि विश्व कप हमारा है। फाइनल में कहां चूक हुई?
सुरेश रैना: दिल तो सबका दुखा है। लड़कों ने बहुत मेहनत की थी। हिंदुस्तान की यह विश्व कप में अब तक की सर्वश्रेष्ठ टीम थी। गेंदबाजी देखिए। विराट का 50वां शतक आया। सचिन के होम ग्राउंड पर उनके सामने शतक बनाया। एक मैच खराब गया तो टीम को जज नहीं करना चाहिए। हम अच्छा खेले। रोहित अगर आउट नहीं होते तो हमने 325 रन बना दिए होते। कम स्कोर होता है तो उसे बचाना मुश्किल होता है। अगर चालीस-पचास रन और बने होते तो स्टेडियम गूंज रहा होता। वहां विकेट स्लो था। ऑस्ट्रेलिया की गेंदबाजी की तारीफ करनी होगी। ट्रेविस हेड ने बहुत अच्छा कैच पकड़ा। 

सवाल: फाइनल मैच को आप कैसे देखते हैं? पिच पढ़ने में क्या गलती हुई?
इरफान पठान: मैच के एक दिन पहले कुछ सवालों के जवाब दिए थे। मेरा यही कहना था कि पूरी टीम सोच रही होगी कि टॉस जीतकर बल्लेबाजी करें। मैं अहमदाबाद की पिच जानता हूं। वहां लक्ष्य का पीछा करना ज्यादा सही रहता। पाकिस्तान को हमने 200 भी नहीं बनाने दिए। न्यूजीलैंड भी लक्ष्य का पीछा करते हुए जीता था। हर मौसम में वहां की पिच अलग तरह से बिहेव करती है। नमी की वजह से भी पिच सैटल हो जाती है। मेरा मानना था कि टीम को टॉस जीतकर लक्ष्य का पीछा करना चाहिए। हालांकि, फिर भी हमने लड़ाई की। जब हम बैटिंग कर रहे थे तो देख रहे थे कि ज्यादा बल्लेबाजी नहीं बची है। जब रोहित आउट हुए, उसके बाद भी हम 300 बना सकते थे। जब हमने 240 बनाए तो खेल वहीं खत्म हो गया।

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