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Srinagar News: वर्ष 2003 के धोखाधड़ी मामले में सात आरोपी बरी

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Srinagar, Local Court, Fraud Case, 2003, 7 Accused Released
संवाद न्यूज एजेंसी
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श्रीनगर। जिले की एक अदालत ने वर्ष 2003 में क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज किए गए एक धोखाधड़ी के मामले में दो भाइयों और राजस्व अधिकारियों सहित पांच अन्य लोगों को बरी कर दिया है। यह मामला एसआरओ-43 के तहत अनुकंपा नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं को लेकर दर्ज किया गया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान तीन आरोपियों की मौत हो गई थी।

सिटी जज तरुण महाजन की अदालत ने आरोपियों को बरी करते हुए यह टिप्पणी की कि अभियोजन पक्ष आरोपियों की संलिप्तता को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है।
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अदालत ने कहा, इस अदालत का मानना है कि अभियोजन पक्ष आरोपियों को अपराध से जोड़ने में विफल रहा है, क्योंकि आपराधिक कानून के तहत किसी भी व्यक्ति को तब तक दोषी नहीं ठहराया जा सकता जब तक कि पेश किए गए सबूत उसकी संलिप्तता को उचित संदेह से परे निर्णायक रूप से साबित न कर दें।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार 21 मई 1990 को श्रीनगर के हवाल इलाके में हुई क्रॉस-फायरिंग में अपनी मां की मृत्यु के बाद, 22 नवंबर 2002 को श्रीनगर के डिप्टी कमिश्नर की ओर से इरफान अहमद नामक एक व्यक्ति को एसआरओ-43 के तहत सरकारी नौकरी दी गई थी। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि उसके दो भाइयों इश्तियाक अहमद और इम्तियाज अहमद ने भी उसी मृत्यु के आधार पर उसी प्रावधान के तहत पहले ही सरकारी नौकरियां हासिल कर ली थीं। एसआरओ-43 के तहत, किसी परिवार का केवल एक ही सदस्य अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र होता है।

अभियोजन पक्ष ने यह भी कहा कि परिवार को सरकार से 1 लाख रुपये की अनुग्रह राशि मिली थी। उसने आरोप लगाया कि तीनों भाइयों ने डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके, और जाली दस्तावेजों तथा झूठे गवाहों की मदद से, तीन अलग-अलग सरकारी नौकरियां हासिल कर लीं।

इन आरोपों के बाद क्राइम ब्रांच ने 25 अक्टूबर 2003 को आरपीसी की धाराओं 420, 468, 471 और 120-बी के तहत एक एफआईआर दर्ज की और जांच शुरू कर दी। जांच पूरी होने के बाद, क्राइम ब्रांच ने इरफान अहमद, इम्तियाज अहमद, गुलाम अहमद (जिनकी अब मृत्यु हो चुकी है), तत्कालीन पटवारी अब्दुल राशिद (मृत), तत्कालीन गिरदावर मोहम्मद यासीन, स्थानीय निवासी बशीर अहमद और मोहम्मद बशीर खान (मृत) जो उस समय डीसी कार्यालय, श्रीनगर में राहत अनुभाग के प्रभारी थे, के खिलाफ चार्जशीट दायर की।

मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 29 गवाहों से पूछताछ की, जिनमें राजस्व अधिकारी, क्राइम ब्रांच के कर्मचारी और फोरेंसिक विशेषज्ञ शामिल थे। हालांकि, अदालत को गवाहों के बयानों में कई विरोधाभास मिले और उसने यह माना कि जालसाजी, धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश या जाली दस्तावेज के इस्तेमाल के आरोपों को साबित करने के लिए सबूत अपर्याप्त थे। इसके अलावा, यह भी सामने आया कि इश्तियाक अहमद की नियुक्ति उनकी मां की मृत्यु से चार महीने पहले ही हो गई थी।

अदालत ने यह टिप्पणी की कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि इम्तियाज़ अहमद लांगू ने वास्तव में एसआरओ-43 के तहत नियुक्ति प्राप्त की थी, या यह कि इरफान अहमद लांगू ने सरकारी अधिकारियों के साथ साजिश रचकर धोखाधड़ी से नौकरी हासिल की थी। अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
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