{"_id":"591735e74f1c1bf207851d64","slug":"srinagar-hydroelectric-power-project-built-in-trouble","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुसीबत बनी श्रीनगर जल विद्युत परियोजना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुसीबत बनी श्रीनगर जल विद्युत परियोजना
ब्यूरो/अमर उजाला, श्रीनगर
Updated Sat, 13 May 2017 10:05 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्रीनगर जल विद्युत परियोजना लोगों के लिए मुसीबत बन गई है। जहां अलकनंदा नदी के पानी का अधिकांश हिस्सा परियोजना शक्ति नहर में चले जाने के कारण श्रीनगर व श्रीकोट में लोग दूषित पेयजल पी रहे हैं। वहीं अकसर झील से ज्यादा पानी छोड़े जाने की वजह से लोग नदी में फंस जाते हैं। हफ्ते में दो-तीन ऐसी घटनाएं होने के बावजूद प्रशासन सख्त कदम नहीं उठा रहा है।
विज्ञापन
जल विद्युत परियोजना ने आईटीआई के समीप शमशान घाट व श्रीयंत्र टापू को सुरक्षा की दृष्टि से अति संवेदनशील बना दिया है। इस घाट पर जहां पौड़ी जिले के सौ से अधिक गांवों के लोग शवों का अंतिम संस्कार करते हैं। वही इसी से कुछ दूरी पर पास खनन पट्टें में खनन कार्य भी किया रहा है, जिससे इस क्षेत्र में आए दिन काफी संख्या में लोग मौजूद रहते हैं। यहां से करीब एक किमी दूर परियोजना कंपनी का पावर हाउस है।
विज्ञापन
भले ही कंपनी की ओर से पानी छोड़ने से पूर्व साइरन बजा कर चेतावनी दी जाती है, लेकिन इसकी आवाज श्रीयंत्र टापू तक नहीं पहुंच पाती है। इसके चलते यहां मौजूद लोगों को साइरन की आवाज का पता ही नहीं चलता। आए दिन खनन में लगे मजदूर व शव का अंतिम संस्कार करते लोग बीच नदी की धारा में फंस जाते हैं। स्थानीय पुलिस की मदद से टापू के बीच फंसे लोगों को राफ्ट की मदद से सुरक्षित निकाला जाता है। स्थानीय निवासी विक्रम सिंह, जयवीर सिंह, रघुनाथ सेमवाल, प्रदीप कैंतुरा और तोता राम उनियाल का कहना है कि यहां हर समय जान का खतरा बना रहता है।
विज्ञापन
हमारी परियोजना रन ऑफ द रीवर है। झील में पानी जमा नहीं होता है। जितना पानी नदी में ऊपर से आता है, उतना ही छोड़ा जाता है। नदी किनारे चेतावनी बोर्ड भी लगाए गए हैं।
वाईआर शर्मा, जनसंपर्क अधिकारी श्रीनगर जल विद्युत परियोजना।
समस्या को गंभीरता से लिया जाएगा। पानी छोड़ने से पूर्व कंपनी की ओर से वहां पर सूचना की व्यवस्था की जानी चाहिए।
सुशील कुमार, जिलाधिकारी पौड़ी।