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सुरक्षा और संवेदना साथ-साथ चलनी चाहिए : इत्तू
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- मंत्री ने श्रीनगर-अनंतनाग-कुलगाम-काजीगुंड हाईवे पर काफिले की आवाजाही से लोगों को हो रही परेशानियों को किया उजागर
- एम्बुलेंस फंस जाती हैं, छात्र कक्षाएं नहीं ले पाते, उपराज्यपाल से की व्यावहारिक ट्रैफिक प्रबंधन उपायों की अपील
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इत्तू ने श्रीनगर-अनंतनाग-कुलगाम-काजीगुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर काफिले की आवाजाही के कारण लोगों को हो रही असुविधा पर चिंता जताई है। मंत्री ने कहा, सुरक्षा सर्वोपरि है लेकिन हमारे लोगों की भलाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। सुरक्षा और संवेदना साथ-साथ चलनी चाहिए।
उन्होंने उपराज्यपाल तथा संबंधित अधिकारियों से व्यावहारिक यातायात प्रबंधन उपायों पर विचार करने का आग्रह किया है। मंत्री इत्तू ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि राजमार्ग पर बार-बार काफिले की आवाजाही से यात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है जिसमें एम्बुलेंस फंस जाती हैं। छात्र कक्षाओं से वंचित रह जाते हैं और आम नागरिकों को यातायात बहाल होने के लिए 15 से 30 मिनट और कभी-कभी घंटों तक इंतजार करना पड़ता है।
लोगों की ओर से झेली जा रही कठिनाइयों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और संबंधित अधिकारियों से ऐसे उपायों पर विचार करने की अपील की जो आवश्यक सुरक्षा प्रोटोकॉल को बनाए रखते हुए एम्बुलेंस के निर्बाध आवागमन को सुनिश्चित करें और यात्रियों को होने वाली असुविधा को कम करें।
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उन्होंने आगे जोर दिया कि शासन को नागरिकों के रोजमर्रा के जीवन में गरिमा, संवेदनशीलता और सार्थक राहत के माध्यम से प्रतिबिंबित होना चाहिए।
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- एम्बुलेंस फंस जाती हैं, छात्र कक्षाएं नहीं ले पाते, उपराज्यपाल से की व्यावहारिक ट्रैफिक प्रबंधन उपायों की अपील
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इत्तू ने श्रीनगर-अनंतनाग-कुलगाम-काजीगुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर काफिले की आवाजाही के कारण लोगों को हो रही असुविधा पर चिंता जताई है। मंत्री ने कहा, सुरक्षा सर्वोपरि है लेकिन हमारे लोगों की भलाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। सुरक्षा और संवेदना साथ-साथ चलनी चाहिए।
उन्होंने उपराज्यपाल तथा संबंधित अधिकारियों से व्यावहारिक यातायात प्रबंधन उपायों पर विचार करने का आग्रह किया है। मंत्री इत्तू ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि राजमार्ग पर बार-बार काफिले की आवाजाही से यात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है जिसमें एम्बुलेंस फंस जाती हैं। छात्र कक्षाओं से वंचित रह जाते हैं और आम नागरिकों को यातायात बहाल होने के लिए 15 से 30 मिनट और कभी-कभी घंटों तक इंतजार करना पड़ता है।
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लोगों की ओर से झेली जा रही कठिनाइयों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और संबंधित अधिकारियों से ऐसे उपायों पर विचार करने की अपील की जो आवश्यक सुरक्षा प्रोटोकॉल को बनाए रखते हुए एम्बुलेंस के निर्बाध आवागमन को सुनिश्चित करें और यात्रियों को होने वाली असुविधा को कम करें।
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उन्होंने आगे जोर दिया कि शासन को नागरिकों के रोजमर्रा के जीवन में गरिमा, संवेदनशीलता और सार्थक राहत के माध्यम से प्रतिबिंबित होना चाहिए।