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Jammu Kashmir: सोमनाथ भारत की आस्था और शक्ति का प्रतीक, आक्रमणों के बावजूद अडिग रहा, बोले एलजी मनोज सिन्हा

Mon, 11 May 2026 04:59 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर Published by: Nikita Gupta Updated Mon, 11 May 2026 04:59 PM IST
सार

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पर पूजा-अर्चना कर मंदिर को भारत की आस्था, संस्कृति और संकल्प का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि कई बार हमलों के बावजूद सोमनाथ मंदिर हमेशा भारत को नई दिशा और प्रेरणा देने वाला केंद्र बना रहा है।

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Somnath remains guiding light ushering Bharat towards new horizons
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा - फोटो : संवाद

विस्तार

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के अवसर पर पूजा-अर्चना की। यह पर्व सोमनाथ मंदिर की 1000 वर्षों की अटूट आस्था और संघर्ष की स्मृति में मनाया गया।

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इस अवसर पर लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होते हुए एलजी सिन्हा ने कहा कि कई हमलों और आक्रमणों के बावजूद सोमनाथ मंदिर भारत को नई दिशा दिखाने वाली प्रेरणा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि 11 मई 1951 को पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से यह आस्था का केंद्र हर भारतीय के भीतर नई ऊर्जा और संकल्प जगाता रहा है।
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एलजी ने कहा कि सोमनाथ मंदिर भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, समर्पण, श्रद्धा और सत्य की खोज का प्रतीक है। इतिहास में सोमनाथ मंदिर को 17 बार लूटा और तोड़ा गया लेकिन हर बार यह फिर से खड़ा हुआ। महमूद गजनवी से लेकर अलाउद्दीन खिलजी और जफर खान तक कई आक्रमणकारियों ने इसे नुकसान पहुंचाया, फिर भी इसकी आस्था कभी कमजोर नहीं हुई।
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मनोज सिन्हा ने मंदिर की रक्षा और पुनर्निर्माण में योगदान देने वाले भीम देव, जयपाल, आनंदपाल, महाराजा धारसेन और सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद सरदार पटेल के निर्देश पर मंदिर का पुनर्निर्माण शुरू हुआ और 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इसकी प्राण प्रतिष्ठा की थी। सोमनाथ मंदिर हमें अतीत से प्रेरणा लेकर भारत के स्वर्णिम भविष्य के निर्माण का संदेश देता है।

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