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पाक की नापाक चाल: कश्मीर में युवाओं को धर्म के नाम पर भड़का रहा, आतंक को जिंदा रखना चुनौती

Sun, 20 Mar 2022 05:28 PM IST
kumar गुलशन कुमार पीटीआई, श्रीनगर
पीटीआई, श्रीनगर Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Sun, 20 Mar 2022 05:28 PM IST
सार

एक वरिष्ट अधिकारी ने बताया कि अब पाकिस्तान घाटी के युवाओं को धर्म के नाम पर भड़काने और उनका ब्रेनवॉश करने के हथकंडे अपना रहा है, जिसमें उसे कभी कामयाबी नहीं मिलेगी।

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pakistan brainwashing youth exploiting religious fault lines to keep terrorism alive in jammu kashmir
घाटी में युवाओं का ब्रेनवॉश कर आतंकी की ओर धकेला रहा पाकिस्तान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू कश्मीर में आतंकवाद को जिंदा रखना पाकिस्तान के लिए चुनौती बन गया है। उसकी साजिशों के बारे में लोग धीरे-धीरे जानने लगे हैं। ऐसे में पाकिस्तान नई चाल चल रहा है। अब पाकिस्तान ने प्रदेश में तीन दशक से चल रहे सीमा पार से आतंकवाद को भड़काने की अपनी रणनीति में बदलाव किया है। एक वरिष्ट अधिकारी ने बताया कि अब पाकिस्तान घाटी के युवाओं को धर्म के नाम पर भड़काने और उनका ब्रेनवॉश करने के हथकंडे अपना रहा है, जिसमें उसे कभी कामयाबी नहीं मिलेगी।

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अधिकारी ने कहा कि इस रणनीति में बदलाव को पाकिस्तान की हताशा के तौर पर भी देखा जाना चाहिए। उसे वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) की ग्रे सूची से बाहर निकलने के कोशिश में अब तक निराशा हाथ लगी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की जासूसी एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) की तरफ से 'आजादी' और 'आत्मनिर्णय के अधिकार की आड़' में शुरू किया गया आतंकी आंदोलन लगातार कम होता जा रहा है। यह आतंकी आंदोलन धर्म और कट्टरता के स्तंभ पर खड़ा किया गया है, जिसे घाटी के लोग धीरे-धीरे समझने लगे हैं।
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2016 से खुद को एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से बाहर निकालने के लिए आईएसआई ने द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ), कश्मीर टाइगर्स (केटी), द पीपुल्स एंटी-फासिस्ट फोर्स (पीएएफएफ) और कश्मीर जांबाज फोर्स (केजेएफ) जैसे कई छद्म आतंकवादी समूह बनाए। ये समूह और कुछ नहीं बल्कि प्रतिबंधित आतंकी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी), जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) और हिजबुल मुजाहिदीन के ही छोटे समूह की तरह हैं। जिन्हें एफएटीएफ प्रतिबंधों से पाकिस्तान को बचाने के लिए स्थापित किया गया है। पाकिस्तान कश्मीर में आतंकवाद को फिर से बढ़ाना चाहता है और उसे स्थानीय चेहरा देने की साजिश रच रहा है।
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एक अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान न केवल घाटी में युवाओं को धर्म के नाम पर बरगलाने की कोशिश कर रहा है। बल्कि, देश के भीतर मौजूद धार्मिक सद्भाव को भी बिगाड़ने के लिए जोड़-तोड़ कर रहा है। पिछले साल सितंबर में अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी की मौत के बाद स्थानीय लोगों को लामबंद करने में अपनी विफलता को देखते हुए अब आईएसआई कश्मीर में धर्म कट्टरता के एजेंडे पर आगे बढ़ना चाह रहा है।

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