श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में जीसीसी स्थापित करें कंपनियां, सीएम उमर अब्दुल्ला ने निवेशकों को दिया न्योता
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कंपनियों से जम्मू-कश्मीर में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) स्थापित करने की अपील करते हुए कहा कि क्षेत्र की नकारात्मक छवि अतीत की विरासत है और सरकार निवेश बढ़ाने के लिए प्रयासरत है।
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मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कंपनियों से जम्मू-कश्मीर में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) स्थापित करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को लेकर बनी नकारात्मक धारणा पिछले तीन दशकों के हालात की विरासत है, न कि वर्तमान वास्तविकता। सरकार क्षेत्र में निवेश और आर्थिक विकास को बढ़ावा देकर इस छवि को बदलने का प्रयास कर रही है।
उमर अब्दुल्ला शुक्रवार को आईआईएम जम्मू की ओर से जम्मू-कश्मीर सरकार और नैसकॉम के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय जम्मू-कश्मीर ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स समिट-2026 को वर्चुअल माध्यम से संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है और इसकी सफलता को केवल शुरुआत में स्थापित होने वाले केंद्रों की संख्या से नहीं मापा जाना चाहिए। सबसे जरूरी है कि निवेश की एक स्थायी प्रक्रिया शुरू हो।
शांति और स्थिरता से बदलेगा निवेश का माहौल
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2002 से 2005 के बीच श्रीनगर में आयोजित एक निवेश कार्यक्रम का जिक्र करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद और इंफोसिस के संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति के बीच हुई बातचीत को याद किया। उन्होंने बताया कि उस समय नारायण मूर्ति ने निवेश के लिए क्षेत्र में शांति और स्थिरता को जरूरी बताया था।
उमर ने कहा कि अब जम्मू-कश्मीर में शांति के दौर को दिनों या हफ्तों में नहीं, बल्कि वर्षों के आधार पर देखा जा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बेहतर माहौल से कंपनियां यहां निवेश के लिए आगे आएंगी।
दूसरे शहरों के अनुभवों से सीखने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर जीसीसी क्षेत्र में देर से प्रवेश कर रहा है लेकिन इसे नुकसान के बजाय अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। दूसरे क्षेत्रों के अनुभवों से सीखकर यहां निवेश की संभावनाओं को बेहतर बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर फिलहाल हैदराबाद, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे स्थापित आईटी केंद्रों से सीधे मुकाबला करने की स्थिति में नहीं है। हालांकि, जयपुर, पुणे और मोहाली जैसे दूसरे और तीसरे स्तर के शहरों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए जीसीसी निवेश आकर्षित करने की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं।
स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में आईआईटी जम्मू, श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय, जम्मू विश्वविद्यालय, कश्मीर विश्वविद्यालय और इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान प्रतिभाशाली युवाओं को तैयार कर रहे हैं। लेकिन पर्याप्त अवसरों की कमी के कारण कई युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि यदि जम्मू-कश्मीर में जीसीसी केंद्र स्थापित होते हैं तो स्थानीय युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे और क्षेत्र की प्रतिभा को यहीं बनाए रखने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि कंपनियां जम्मू-कश्मीर में निवेश का फैसला यहां की आर्थिक क्षमता और कारोबार के अनुकूल माहौल को देखकर करें न कि क्षेत्र के अतीत के प्रति सहानुभूति के आधार पर। उन्होंने विश्वास जताया कि एक केंद्र की स्थापना से शुरुआत होगी और धीरे-धीरे निवेश का दायरा बढ़ सकता है।