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हंदवाड़ा में मौन धरना: बडगाम की नाबालिग पीड़िता के लिए न्याय की मांग
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कुपवाड़ा। उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के हंदवाड़ा के चिल्ड्रन्स पार्क में डॉ. आबिदा वार के नेतृत्व में जेकेएसईडब्ल्यूडब्ल्यूए (जम्मू कश्मीर सोशल एम्पावरमेंट एंड वेलफेयर वुमेन एसोसिएशन) के सदस्यों और सहयोगियों ने 12 मिनट का मौन धरना प्रदर्शन किया। इस धरने के माध्यम से हाल ही में बडगाम में हुए अपराध की नाबालिग पीड़िता के प्रति एकजुटता व्यक्त की गई और समाज में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों की घटनाओं पर गहरी चिंता जताई गई।
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने दुष्कर्म, घरेलू हिंसा, दहेज से संबंधित उत्पीड़न, नशीले पदार्थों का बढ़ता चलन और अन्य सामाजिक बुराइयों जैसे जघन्य सामाजिक अपराधों के विरोध स्वरूप पूर्ण मौन धारण किया। इस सभा में इस बात पर जोर दिया गया कि ऐसी घटनाओं पर चुप्पी साधने से अपराधियों का हौसला ही बढ़ता है और अन्याय के खिलाफ हमारी सामूहिक लड़ाई कमजोर पड़ती है।
इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. आबिदा वार ने बडगाम मामले में फास्ट-ट्रैक अदालत की कार्यवाही की मांग की और अधिकारियों से आग्रह किया कि वे आरोपियों को कठोर और अनुकरणीय दंड सुनिश्चित करें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समाज को अपराधों के खिलाफ मूक दर्शक बने रहने के बजाय दृढ़ता से प्रतिक्रिया देनी चाहिए। वक्ताओं ने हर मोहल्ले और इलाके के लोगों से भी आह्वान किया कि वे अन्याय के खिलाफ एकजुट हों और महिलाओं तथा बच्चों की सुरक्षा के लिए मिलकर काम करें।
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नैतिक परवरिश के महत्व को रेखांकित करते हुए डॉ. वार ने माता-पिता से अपील की कि वे युवा पीढ़ी को मजबूत नैतिक मूल्य प्रदान करें। विशेष रूप से महिलाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने माताओं और परिवारों से आग्रह किया कि वे लड़कियों की परवरिश ऐसे आत्मविश्वास से भरी और साहसी व्यक्तियों के रूप में करें जो सामाजिक बुराइयों और अपराधों के खिलाफ अपनी रक्षा स्वयं करने में सक्षम हों।
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि इस मौन धरने का उद्देश्य समाज को संवेदनशील बनाना और यह जागरूकता फैलाना था कि हर नागरिक की यह जिम्मेदारी है कि वह अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं। महिलाओं और बच्चों की गरिमा, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा करें।
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प्रदर्शन में शामिल लोगों ने दुष्कर्म, घरेलू हिंसा, दहेज से संबंधित उत्पीड़न, नशीले पदार्थों का बढ़ता चलन और अन्य सामाजिक बुराइयों जैसे जघन्य सामाजिक अपराधों के विरोध स्वरूप पूर्ण मौन धारण किया। इस सभा में इस बात पर जोर दिया गया कि ऐसी घटनाओं पर चुप्पी साधने से अपराधियों का हौसला ही बढ़ता है और अन्याय के खिलाफ हमारी सामूहिक लड़ाई कमजोर पड़ती है।
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इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. आबिदा वार ने बडगाम मामले में फास्ट-ट्रैक अदालत की कार्यवाही की मांग की और अधिकारियों से आग्रह किया कि वे आरोपियों को कठोर और अनुकरणीय दंड सुनिश्चित करें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समाज को अपराधों के खिलाफ मूक दर्शक बने रहने के बजाय दृढ़ता से प्रतिक्रिया देनी चाहिए। वक्ताओं ने हर मोहल्ले और इलाके के लोगों से भी आह्वान किया कि वे अन्याय के खिलाफ एकजुट हों और महिलाओं तथा बच्चों की सुरक्षा के लिए मिलकर काम करें।
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नैतिक परवरिश के महत्व को रेखांकित करते हुए डॉ. वार ने माता-पिता से अपील की कि वे युवा पीढ़ी को मजबूत नैतिक मूल्य प्रदान करें। विशेष रूप से महिलाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने माताओं और परिवारों से आग्रह किया कि वे लड़कियों की परवरिश ऐसे आत्मविश्वास से भरी और साहसी व्यक्तियों के रूप में करें जो सामाजिक बुराइयों और अपराधों के खिलाफ अपनी रक्षा स्वयं करने में सक्षम हों।
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि इस मौन धरने का उद्देश्य समाज को संवेदनशील बनाना और यह जागरूकता फैलाना था कि हर नागरिक की यह जिम्मेदारी है कि वह अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं। महिलाओं और बच्चों की गरिमा, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा करें।