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प्रदेश के भीतर सक्रिय नार्को-आतंक के इकोसिस्टम के खिलाफ कार्रवाई तेज करें : एलजी
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श्रीनगर। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बुधवार को प्रशासन को निर्देश दिया कि वह प्रदेश के भीतर सक्रिय नार्को-आतंक के इकोसिस्टम के खिलाफ कार्रवाई को और तेज करे। उपराज्यपाल श्रीनगर के लोक भवन में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
इस बैठक में मुख्य सचिव अटल डुल्लू, डीजीपी नलिन प्रभात, वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शैलेंद्र कुमार, लोक निर्माण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनिल कुमार सिंह, विद्युत विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अश्विनी कुमार, गृह विभाग के प्रधान सचिव चंद्रकर भारती, उपराज्यपाल के प्रधान सचिव डॉ. मनदीप के भंडारी, स्कूल शिक्षा विभाग के आयुक्त सचिव राम निवास शर्मा, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के आयुक्त सचिव एम राजू, उद्योग एवं वाणिज्य के आयुक्त सचिव विक्रमजीत सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
उपराज्यपाल ने चल रहे ''''नशा मुक्त जम्मू कश्मीर अभियान'''' की प्रगति का जायजा लिया और एक मजबूत नशा-विरोधी तंत्र की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया कि वे अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती करके ''''नशा-विरोधी कार्य बल'''' को और अधिक सुदृढ़ करें। नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के पीड़ितों के पुनर्वास उपायों की समीक्षा करते हुए उपराज्यपाल ने निर्देश दिया कि पूरे यूटी में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित नशा-मुक्ति और पुनर्वास केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि स्वास्थ्य अधिकारी उचित परामर्श और उपचार के लिए इन केंद्रों की नियमित निगरानी करें।
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उन्होंने आगे निर्देश दिया कि सुनसान इमारतों और नदी के किनारों (तटबंधों) जैसे संवेदनशील स्थानों की पहचान की जाए और उन पर नजर रखी जाए ताकि नशीले पदार्थों से संबंधित गतिविधियों के लिए उनका दुरुपयोग रोका जा सके। उन्होंने नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधों को रोकने और लोगों में अधिक जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से बड़े नशा तस्करों की जानकारी सार्वजनिक करने का आह्वान किया। उपराज्यपाल ने स्कूल और उच्च शिक्षा विभागों को यह जिम्मेदारी सौंपी कि वे खेलों के टूर्नामेंट और युवाओं को जोड़ने वाले कार्यक्रमों का आयोजन करें ताकि युवाओं को नशीले पदार्थों के दुरुपयोग से दूर रखा जा सके।
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इस बैठक में मुख्य सचिव अटल डुल्लू, डीजीपी नलिन प्रभात, वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शैलेंद्र कुमार, लोक निर्माण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनिल कुमार सिंह, विद्युत विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अश्विनी कुमार, गृह विभाग के प्रधान सचिव चंद्रकर भारती, उपराज्यपाल के प्रधान सचिव डॉ. मनदीप के भंडारी, स्कूल शिक्षा विभाग के आयुक्त सचिव राम निवास शर्मा, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के आयुक्त सचिव एम राजू, उद्योग एवं वाणिज्य के आयुक्त सचिव विक्रमजीत सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
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उपराज्यपाल ने चल रहे ''''नशा मुक्त जम्मू कश्मीर अभियान'''' की प्रगति का जायजा लिया और एक मजबूत नशा-विरोधी तंत्र की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया कि वे अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती करके ''''नशा-विरोधी कार्य बल'''' को और अधिक सुदृढ़ करें। नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के पीड़ितों के पुनर्वास उपायों की समीक्षा करते हुए उपराज्यपाल ने निर्देश दिया कि पूरे यूटी में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित नशा-मुक्ति और पुनर्वास केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि स्वास्थ्य अधिकारी उचित परामर्श और उपचार के लिए इन केंद्रों की नियमित निगरानी करें।
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उन्होंने आगे निर्देश दिया कि सुनसान इमारतों और नदी के किनारों (तटबंधों) जैसे संवेदनशील स्थानों की पहचान की जाए और उन पर नजर रखी जाए ताकि नशीले पदार्थों से संबंधित गतिविधियों के लिए उनका दुरुपयोग रोका जा सके। उन्होंने नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधों को रोकने और लोगों में अधिक जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से बड़े नशा तस्करों की जानकारी सार्वजनिक करने का आह्वान किया। उपराज्यपाल ने स्कूल और उच्च शिक्षा विभागों को यह जिम्मेदारी सौंपी कि वे खेलों के टूर्नामेंट और युवाओं को जोड़ने वाले कार्यक्रमों का आयोजन करें ताकि युवाओं को नशीले पदार्थों के दुरुपयोग से दूर रखा जा सके।