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Srinagar News: इंजीनियर रशीद ने 7 वर्षों के बाद अपने गांव में मनाई ईद-उल-अजहा
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कुपवाड़ा। अवामी इतिहाद पार्टी (एआईपी) के प्रमुख और बारामुला के सांसद इंजीनियर रशीद ने करीब 7 वर्षों के बाद अपने पैतृक गांव मावर में अपने घर पर ईद-उल-अजहा का त्यौहार मनाया। रशीद जो दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं, को उनके पिता के निधन के बाद अदालत ने जमानत दी थी।
ईद के मौके पर लंगेट के मावर में एक सभा को संबोधित करते हुए इंजीनियर रशीद ने कहा कि उनके लिए असली ईद उस दिन होगी जब कश्मीरी लोग गरिमा और आत्म-सम्मान के साथ जी पाएंगे। उन्होंने कहा कि भले ही उन्हें अपनी पूरी जिंदगी जेल में बितानी पड़े, वह कश्मीर के लोगों के लिए यह कुर्बानी देने को तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि उनका संघर्ष किसी व्यक्ति या राष्ट्र के खिलाफ नहीं है बल्कि कश्मीरियों की गरिमा और अधिकारों के लिए है। रशीद ने जोर देकर कहा कि कश्मीरी आतंकवाद के खिलाफ है और उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से दमन और अन्याय के खिलाफ एक शांतिपूर्ण और राजनीतिक संघर्ष में एकजुट होने का आह्वान किया।
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अपने भाषण के दौरान, उन्होंने कहा कि उनकी असली खुशी उस दिन होगी जब कश्मीरी युवाओं को बार-बार वेरिफिकेशन जांच से नहीं गुजरना पड़ेगा, जब किसी सैनिक का शव घर वापस नहीं आएगा और जब विस्थापित कश्मीरी पंडित अपने पुश्तैनी गांवों में लौट आएंगे।
कश्मीरी पंडित समुदाय से अपील करते हुए इंजीनियर रशीद ने कहा कि कश्मीर जितना उनका है, उतना ही उनका भी है और उन्होंने उनसे लौटने का आग्रह किया। उन्होंने भारत और पाकिस्तान दोनों से भी अपील की कि वे कश्मीर को युद्ध का मैदान न बनाएं और इसके बजाय कश्मीर के लोगों को शांति से रहने दें।
उन्होंने आगे कहा कि सीमाएं दोस्ती में बाधा नहीं बननी चाहिए और इस बात पर जोर दिया कि कश्मीर शांति, भाईचारे और मानवता की धरती बनी रहनी चाहिए।
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ईद के मौके पर लंगेट के मावर में एक सभा को संबोधित करते हुए इंजीनियर रशीद ने कहा कि उनके लिए असली ईद उस दिन होगी जब कश्मीरी लोग गरिमा और आत्म-सम्मान के साथ जी पाएंगे। उन्होंने कहा कि भले ही उन्हें अपनी पूरी जिंदगी जेल में बितानी पड़े, वह कश्मीर के लोगों के लिए यह कुर्बानी देने को तैयार हैं।
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उन्होंने कहा कि उनका संघर्ष किसी व्यक्ति या राष्ट्र के खिलाफ नहीं है बल्कि कश्मीरियों की गरिमा और अधिकारों के लिए है। रशीद ने जोर देकर कहा कि कश्मीरी आतंकवाद के खिलाफ है और उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से दमन और अन्याय के खिलाफ एक शांतिपूर्ण और राजनीतिक संघर्ष में एकजुट होने का आह्वान किया।
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अपने भाषण के दौरान, उन्होंने कहा कि उनकी असली खुशी उस दिन होगी जब कश्मीरी युवाओं को बार-बार वेरिफिकेशन जांच से नहीं गुजरना पड़ेगा, जब किसी सैनिक का शव घर वापस नहीं आएगा और जब विस्थापित कश्मीरी पंडित अपने पुश्तैनी गांवों में लौट आएंगे।
कश्मीरी पंडित समुदाय से अपील करते हुए इंजीनियर रशीद ने कहा कि कश्मीर जितना उनका है, उतना ही उनका भी है और उन्होंने उनसे लौटने का आग्रह किया। उन्होंने भारत और पाकिस्तान दोनों से भी अपील की कि वे कश्मीर को युद्ध का मैदान न बनाएं और इसके बजाय कश्मीर के लोगों को शांति से रहने दें।
उन्होंने आगे कहा कि सीमाएं दोस्ती में बाधा नहीं बननी चाहिए और इस बात पर जोर दिया कि कश्मीर शांति, भाईचारे और मानवता की धरती बनी रहनी चाहिए।