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Srinagar News: जम्मू के बाद कश्मीर के खिलाड़ियों ने भी लगाए नौकरी में पक्षपात के आरोप
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में खिलाड़ियों की नियुक्तियों के लिए स्पोर्ट्स काउंसिल की तरफ से जारी की गई एसओ-12 प्रोविजनल लिस्ट को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। जम्मू के बाद कश्मीर के खिलाड़ियों ने इस सूची को फर्जी करार देते हुए काउंसिल और ब्यूरोक्रेट्स पर भाई-भतीजावाद के गंभीर आरोप लगाए हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि मेधावी और योग्य एथलीटों को दरकिनार कर रसूखदार अधिकारियों और नेताओं के रिश्तेदारों को रेवड़ियों की तरह नौकरियां बांटी गई हैं।
शनिवार को प्रेस कॉलोनी पहुंचे नौकरी से वंचित खिलाड़ियों के दल में से वाटर स्पोर्ट्स की खिलाड़ी श्रीनगर की तंजीला और रुहीना का आरोप है कि 2022 में जारी पहले नोटिफिकेशन में साफ तौर पर लिखा था कि 5 गैजेटेड (राजपत्रित) पदों के लिए ओलंपिक स्पोर्ट्स से जुड़े खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
इसके विपरीत कुल 5 गैजेटेड पदों में से 4 पद ''''पेनचक सिलाट नाम के एक नॉन-ओलंपिक खेल के खिलाड़ियों को दे दिए गए हैं। यह खेल न तो एशियन गेम्स का हिस्सा है और न ही कॉमनवेल्थ गेम्स का। इस खेल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहली ही फाइट हारने वाले को भी मेडल मिल जाता है, जबकि ओलंपिक खेलों के एथलीटों के नेशनल स्तर के मुकाबले भी इनसे कहीं ज्यादा कड़े होते हैं।
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खिलाड़ियों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि इस सूची में शामिल अधिकतर नाम किसी न किसी बड़े ब्यूरोक्रेट या स्पोर्ट्स काउंसिल के अधिकारियों से जुड़े हैं। एक प्रशासनिक अधिकारी जो हाल ही में रिटायर हुए हैं, उनके बेटे को महज 10+2 (बारहवीं) की योग्यता पर गैजेटेड पोस्ट दे दी गई है, जबकि पहले न्यूनतम योग्यता ग्रेजुएशन हुआ करती थी।
एथलीटों ने स्पोर्ट्स काउंसिल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पेनचक सिलाट खेल को जम्मू-कश्मीर स्पोर्ट्स काउंसिल में 27 अप्रैल 2021 को मान्यता मिली। लेकिन इस लिस्ट में शामिल करने के लिए खिलाड़ियों के 2014, 2018 और 2019 के सर्टिफिकेट्स को भी मान्य कर दिया गया है। जब खेल ही 2021 में रजिस्टर्ड हुआ, तो उसके पहले के सर्टिफिकेट्स के आधार पर नियुक्तियां कैसे की जा सकती हैं।
खिलाड़ियों का कहना है कि उनकी जेन्युइन नेशनल और इंटरनेशनल सर्टिफिकेट्स, जिनकी बाकायदा स्पोर्ट्स काउंसिल द्वारा स्क्रीनिंग की गई थी, उन्हें रद्दी के भाव डाल दिया गया। इसके विपरीत, कश्मीर से एक साथ 70 बच्चों को ले जाकर मेडल जिताने वाले फर्जीवाड़े को तवज्जो दी गई।
खिलाड़ियों ने बताया कि इस सूची के विरोध में उन्होंने अधिकारियों के सामने अपनी बात रखी थी। उन्होंने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। अधिकारियों ने माना कि डिपार्टमेंट से गलती हुई होगी, लेकिन समाधान करने के बजाय खिलाड़ियों को कोर्ट जाने और पिटीशन लगाने की सलाह दे दी। लिस्ट को जानबूझकर ऐसे समय पर सार्वजनिक किया गया जब कोर्ट की छुट्टियां चल रही हैं, ताकि खिलाड़ी तुरंत इस पर स्टे न ला सकें। खिलाड़ियों ने मांग की है कि इस पूरी सूची की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
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शनिवार को प्रेस कॉलोनी पहुंचे नौकरी से वंचित खिलाड़ियों के दल में से वाटर स्पोर्ट्स की खिलाड़ी श्रीनगर की तंजीला और रुहीना का आरोप है कि 2022 में जारी पहले नोटिफिकेशन में साफ तौर पर लिखा था कि 5 गैजेटेड (राजपत्रित) पदों के लिए ओलंपिक स्पोर्ट्स से जुड़े खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
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इसके विपरीत कुल 5 गैजेटेड पदों में से 4 पद ''''पेनचक सिलाट नाम के एक नॉन-ओलंपिक खेल के खिलाड़ियों को दे दिए गए हैं। यह खेल न तो एशियन गेम्स का हिस्सा है और न ही कॉमनवेल्थ गेम्स का। इस खेल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहली ही फाइट हारने वाले को भी मेडल मिल जाता है, जबकि ओलंपिक खेलों के एथलीटों के नेशनल स्तर के मुकाबले भी इनसे कहीं ज्यादा कड़े होते हैं।
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खिलाड़ियों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि इस सूची में शामिल अधिकतर नाम किसी न किसी बड़े ब्यूरोक्रेट या स्पोर्ट्स काउंसिल के अधिकारियों से जुड़े हैं। एक प्रशासनिक अधिकारी जो हाल ही में रिटायर हुए हैं, उनके बेटे को महज 10+2 (बारहवीं) की योग्यता पर गैजेटेड पोस्ट दे दी गई है, जबकि पहले न्यूनतम योग्यता ग्रेजुएशन हुआ करती थी।
एथलीटों ने स्पोर्ट्स काउंसिल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पेनचक सिलाट खेल को जम्मू-कश्मीर स्पोर्ट्स काउंसिल में 27 अप्रैल 2021 को मान्यता मिली। लेकिन इस लिस्ट में शामिल करने के लिए खिलाड़ियों के 2014, 2018 और 2019 के सर्टिफिकेट्स को भी मान्य कर दिया गया है। जब खेल ही 2021 में रजिस्टर्ड हुआ, तो उसके पहले के सर्टिफिकेट्स के आधार पर नियुक्तियां कैसे की जा सकती हैं।
खिलाड़ियों का कहना है कि उनकी जेन्युइन नेशनल और इंटरनेशनल सर्टिफिकेट्स, जिनकी बाकायदा स्पोर्ट्स काउंसिल द्वारा स्क्रीनिंग की गई थी, उन्हें रद्दी के भाव डाल दिया गया। इसके विपरीत, कश्मीर से एक साथ 70 बच्चों को ले जाकर मेडल जिताने वाले फर्जीवाड़े को तवज्जो दी गई।
खिलाड़ियों ने बताया कि इस सूची के विरोध में उन्होंने अधिकारियों के सामने अपनी बात रखी थी। उन्होंने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। अधिकारियों ने माना कि डिपार्टमेंट से गलती हुई होगी, लेकिन समाधान करने के बजाय खिलाड़ियों को कोर्ट जाने और पिटीशन लगाने की सलाह दे दी। लिस्ट को जानबूझकर ऐसे समय पर सार्वजनिक किया गया जब कोर्ट की छुट्टियां चल रही हैं, ताकि खिलाड़ी तुरंत इस पर स्टे न ला सकें। खिलाड़ियों ने मांग की है कि इस पूरी सूची की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।