{"_id":"6a15f3898a097ac89209f4f7","slug":"jammu-kashmir-news-srinagar-news-c-10-1-agr1010-922628-2026-05-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Srinagar News: दिल्ली हाईकोर्ट ने इंजी. राशिद को पिता की मृत्यु के बाद की रस्मों के लिए दी अंतरिम जमानत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Srinagar News: दिल्ली हाईकोर्ट ने इंजी. राशिद को पिता की मृत्यु के बाद की रस्मों के लिए दी अंतरिम जमानत
विज्ञापन
श्रीनगर। दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को जेल में बंद बारामुला के सांसद शेख अब्दुल राशिद (इंजीनियर राशिद) को 25 जून से 30 जून तक अंतरिम जमानत दे दी, ताकि वे श्रीनगर में अपने पिता की मृत्यु के बाद की रस्मों में शामिल हो सकें।
जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस मधु जैन की एक डिवीजन बेंच ने निर्देश दिया कि राशिद 2 जून को सरेंडर करेंगे। यह निर्देश 18 मई को उनके पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए दी गई पिछली अंतरिम जमानत की अवधि समाप्त होने के बाद दिया गया।
राशिद के वकील ने कोर्ट से गुजारिश की थी कि उनकी अंतरिम रिहाई की अवधि बढ़ाई जाए ताकि वे अपने पिता को दफनाने के 40वें दिन होने वाली धार्मिक रस्मों में शामिल हो सकें।
विज्ञापन
कोर्ट ने कहा, 2 जून को अंतरिम जमानत की अवधि समाप्त होने के बाद अपीलकर्ता सरेंडर करेगा। हालांकि 25 जून से 30 जून की अवधि के लिए अपीलकर्ता को 40वें दिन होने वाली रस्मों और समारोहों में शामिल होने में सक्षम बनाने के लिए फिर से अंतरिम जमानत दी जाती है।
बेंच ने स्पष्ट किया कि यह नई अंतरिम जमानत उन्हीं शर्तों के अधीन रहेगी जो उनकी वर्तमान रिहाई की अवधि के दौरान लगाई गई थीं। 18 मई को हाईकोर्ट ने राशिद को कई पाबंदियों के साथ अंतरिम जमानत दी थी। इसमें यह शर्त भी शामिल थी कि तिहाड़ जेल से निकलने से लेकर श्रीनगर से लौटने तक उनके साथ सादे कपड़ों में कम से कम दो पुलिसकर्मी मौजूद रहेंगे।
कोर्ट ने उनकी आवाजाही पर भी पाबंदी लगाई थी। उन्हें सिर्फ कब्रिस्तान या पूजा स्थल पर जाने की अनुमति दी थी। निर्देश दिया था कि वे अपने घर के अलावा कहीं और यात्रा न करें।
इससे पहले 28 अप्रैल को कोर्ट ने राशिद को श्रीनगर में अपने बीमार पिता से मिलने के लिए एक हफ़्ते की अंतरिम जमानत दी थी। बाद में जब उनके पिता को इलाज के लिए नई दिल्ली के एम्स में शिफ़्ट किया गया तो यह राहत 10 मई तक बढ़ा दी गई थी।
इंजीनियर राशिद 2019 से तिहाड़ जेल में बंद हैं। उन्हें 2017 के एक मामले के सिलसिले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने गिरफ़्तार किया था। उन पर गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियमके प्रावधानों और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मुक़दमा चल रहा है। जांच एजेंसियों ने उन पर जम्मू-कश्मीर में गैर-कानूनी गतिविधियों को फंड देने और उनका समर्थन करने का आरोप लगाया है।
विज्ञापन
जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस मधु जैन की एक डिवीजन बेंच ने निर्देश दिया कि राशिद 2 जून को सरेंडर करेंगे। यह निर्देश 18 मई को उनके पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए दी गई पिछली अंतरिम जमानत की अवधि समाप्त होने के बाद दिया गया।
विज्ञापन
राशिद के वकील ने कोर्ट से गुजारिश की थी कि उनकी अंतरिम रिहाई की अवधि बढ़ाई जाए ताकि वे अपने पिता को दफनाने के 40वें दिन होने वाली धार्मिक रस्मों में शामिल हो सकें।
विज्ञापन
कोर्ट ने कहा, 2 जून को अंतरिम जमानत की अवधि समाप्त होने के बाद अपीलकर्ता सरेंडर करेगा। हालांकि 25 जून से 30 जून की अवधि के लिए अपीलकर्ता को 40वें दिन होने वाली रस्मों और समारोहों में शामिल होने में सक्षम बनाने के लिए फिर से अंतरिम जमानत दी जाती है।
बेंच ने स्पष्ट किया कि यह नई अंतरिम जमानत उन्हीं शर्तों के अधीन रहेगी जो उनकी वर्तमान रिहाई की अवधि के दौरान लगाई गई थीं। 18 मई को हाईकोर्ट ने राशिद को कई पाबंदियों के साथ अंतरिम जमानत दी थी। इसमें यह शर्त भी शामिल थी कि तिहाड़ जेल से निकलने से लेकर श्रीनगर से लौटने तक उनके साथ सादे कपड़ों में कम से कम दो पुलिसकर्मी मौजूद रहेंगे।
कोर्ट ने उनकी आवाजाही पर भी पाबंदी लगाई थी। उन्हें सिर्फ कब्रिस्तान या पूजा स्थल पर जाने की अनुमति दी थी। निर्देश दिया था कि वे अपने घर के अलावा कहीं और यात्रा न करें।
इससे पहले 28 अप्रैल को कोर्ट ने राशिद को श्रीनगर में अपने बीमार पिता से मिलने के लिए एक हफ़्ते की अंतरिम जमानत दी थी। बाद में जब उनके पिता को इलाज के लिए नई दिल्ली के एम्स में शिफ़्ट किया गया तो यह राहत 10 मई तक बढ़ा दी गई थी।
इंजीनियर राशिद 2019 से तिहाड़ जेल में बंद हैं। उन्हें 2017 के एक मामले के सिलसिले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने गिरफ़्तार किया था। उन पर गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियमके प्रावधानों और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मुक़दमा चल रहा है। जांच एजेंसियों ने उन पर जम्मू-कश्मीर में गैर-कानूनी गतिविधियों को फंड देने और उनका समर्थन करने का आरोप लगाया है।