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जम्मू-कश्मीर जल्द शुरू करेगा अंतर्देशीय जल परिवहन सेवाएं : डुल्लू
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में अंतर्देशीय जल परिवहन सेवाएं जल्द शुरू होंगी। मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने वीरवार को अंतर्देशीय जल परिवहन बुनियादी ढांचे के विकास के लिए प्रगति और भविष्य के रोडमैप की समीक्षा की।
बैठक का मुख्य फोकस केंद्र शासित प्रदेश की प्रमुख नदियों में टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल और आधुनिक जल परिवहन प्रणालियों को बढ़ावा देना था। इसमें जम्मू और कश्मीर में अधिसूचित राष्ट्रीय जलमार्गों पर क्रूज पर्यटन, शहरी जल परिवहन सुविधाओं और नौवहन बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष जोर दिया गया।
मुख्य सचिव ने उन मुद्दों की समीक्षा की जिनके लिए अंतर-विभागीय समन्वय की आवश्यकता है। इनमें पुलों के नीचे से कॉफर बांधों को हटाना, एचटी और एलटी बिजली लाइनों को ऊपर उठाना, टर्मिनलों पर बिजली और पानी के कनेक्शन की व्यवस्था करना, जोड़ने वाली सड़कों का निर्माण, प्रमुख घाटों पर सीवेज उपचार सुविधाएं और पेड़ काटने तथा निर्माण गतिविधियों से संबंधित अनुमतियां शामिल हैं।
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जम्मू और कश्मीर में अंतर्देशीय जलमार्गों की अपार पर्यटन, आर्थिक और पर्यावरणीय क्षमता पर जोर देते हुए मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे परियोजना के सभी घटकों को समय पर पूरा करने के लिए भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के साथ मिलकर काम करें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक जल परिवहन बुनियादी ढांचे का विकास न केवल परिवहन का एक टिकाऊ साधन प्रदान करेगा, बल्कि पर्यटन की क्षमता को भी काफी बढ़ाएगा, रोजगार के अवसर पैदा करेगा और केंद्र शासित प्रदेश में नदी के किनारों पर आर्थिक गतिविधियों के लिए नए रास्ते खोलेगा।
केंद्रीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के अध्यक्ष सुनील पालीवाल की तरफ से दिए गए प्रस्तुतीकरण के दौरान स्पष्ट किया गया कि झेलम नदी पर राष्ट्रीय जलमार्ग-49 के विकास में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। यहां पंथा चौक से वुलर झील तक लगभग 76 किलोमीटर लंबा एक रिवर क्रूज कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। झेलम कॉरिडोर के साथ-साथ आठ फ्लोटिंग जेट्टी का निर्माण कार्य चल रहा है और इसके जुलाई 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। इससे जुड़े तटवर्ती बुनियादी ढांचे के विकास का लक्ष्य जुलाई 2027 तक पूरा करना है, जबकि नेविगेशनल सहायता (नेविगेशन एड्स) की स्थापना जुलाई 2026 तक पूरी करने का कार्यक्रम है। नदी के इस हिस्से में जलमार्ग (फेयरवे) का रखरखाव भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण और जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। इसके लिए ड्रेजर तैनात किए गए हैं, ताकि सुरक्षित और बिना किसी रुकावट के नेविगेशन सुनिश्चित किया जा सके।
बैठक में बताया गया कि भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण द्वारा 20 यात्रियों की क्षमता वाली दस हाइब्रिड इलेक्ट्रिक नावों की खरीद की प्रक्रिया चल रही है। वर्तमान में इनकी बोलियों (बिड्स) का मूल्यांकन किया जा रहा है। इस अनुबंध के मई 2026 तक दिए जाने की संभावना है, जबकि इन नावों की डिलीवरी मार्च 2027 तक होने की उम्मीद है।
जम्मू क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की समीक्षा करते हुए, मुख्य सचिव को बताया गया कि राष्ट्रीय जलमार्ग-26 के तहत चिनाब नदी पर भी क्रूज पर्यटन के बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है। रियासी से अखनूर किले तक नौ किलोमीटर लंबे रिवर क्रूज मार्ग का प्रस्ताव है, जहाँ दो जेट्टी के निर्माण का ठेका पहले ही दिया जा चुका है और इसके जुलाई 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है।
इसके अलावा, तटवर्ती सुविधाओं के विकास का कार्य इंडियन पोर्ट रेल एंड रोप-वे कॉर्पोरेशन लिमिटेड को सौंपा गया है। इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने का काम वर्तमान में चल रहा है। इसके जून 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। बैठक में बताया गया कि प्रस्तावित मार्ग में क्रूज संचालन के लिए पूरे वर्ष पर्याप्त जल-गहराई उपलब्ध रहती है।
इसी तरह, राष्ट्रीय जलमार्ग-84 के तहत रावी नदी पर जम्मू जिले के सोहार में पंद्रह किलोमीटर लंबा रिवर क्रूज कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। जेट्टी के निर्माण का ठेका पहले ही दिया जा चुका है और इसके जुलाई 2026 तक पूरा होने की संभावना है। तटवर्ती सुविधाओं के लिए डीपीआर तैयार करने का काम भी आईपीआरसीएल के माध्यम से प्रगति पर है। इसके जून 2026 तक अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है, जबकि नेविगेशनल सहायता के लिए जुलाई 2026 तक टेंडर जारी करने और दिसंबर 2026 तक काम पूरा करने का प्रस्ताव है।
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बैठक का मुख्य फोकस केंद्र शासित प्रदेश की प्रमुख नदियों में टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल और आधुनिक जल परिवहन प्रणालियों को बढ़ावा देना था। इसमें जम्मू और कश्मीर में अधिसूचित राष्ट्रीय जलमार्गों पर क्रूज पर्यटन, शहरी जल परिवहन सुविधाओं और नौवहन बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष जोर दिया गया।
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मुख्य सचिव ने उन मुद्दों की समीक्षा की जिनके लिए अंतर-विभागीय समन्वय की आवश्यकता है। इनमें पुलों के नीचे से कॉफर बांधों को हटाना, एचटी और एलटी बिजली लाइनों को ऊपर उठाना, टर्मिनलों पर बिजली और पानी के कनेक्शन की व्यवस्था करना, जोड़ने वाली सड़कों का निर्माण, प्रमुख घाटों पर सीवेज उपचार सुविधाएं और पेड़ काटने तथा निर्माण गतिविधियों से संबंधित अनुमतियां शामिल हैं।
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जम्मू और कश्मीर में अंतर्देशीय जलमार्गों की अपार पर्यटन, आर्थिक और पर्यावरणीय क्षमता पर जोर देते हुए मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे परियोजना के सभी घटकों को समय पर पूरा करने के लिए भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के साथ मिलकर काम करें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक जल परिवहन बुनियादी ढांचे का विकास न केवल परिवहन का एक टिकाऊ साधन प्रदान करेगा, बल्कि पर्यटन की क्षमता को भी काफी बढ़ाएगा, रोजगार के अवसर पैदा करेगा और केंद्र शासित प्रदेश में नदी के किनारों पर आर्थिक गतिविधियों के लिए नए रास्ते खोलेगा।
केंद्रीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के अध्यक्ष सुनील पालीवाल की तरफ से दिए गए प्रस्तुतीकरण के दौरान स्पष्ट किया गया कि झेलम नदी पर राष्ट्रीय जलमार्ग-49 के विकास में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। यहां पंथा चौक से वुलर झील तक लगभग 76 किलोमीटर लंबा एक रिवर क्रूज कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। झेलम कॉरिडोर के साथ-साथ आठ फ्लोटिंग जेट्टी का निर्माण कार्य चल रहा है और इसके जुलाई 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। इससे जुड़े तटवर्ती बुनियादी ढांचे के विकास का लक्ष्य जुलाई 2027 तक पूरा करना है, जबकि नेविगेशनल सहायता (नेविगेशन एड्स) की स्थापना जुलाई 2026 तक पूरी करने का कार्यक्रम है। नदी के इस हिस्से में जलमार्ग (फेयरवे) का रखरखाव भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण और जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। इसके लिए ड्रेजर तैनात किए गए हैं, ताकि सुरक्षित और बिना किसी रुकावट के नेविगेशन सुनिश्चित किया जा सके।
बैठक में बताया गया कि भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण द्वारा 20 यात्रियों की क्षमता वाली दस हाइब्रिड इलेक्ट्रिक नावों की खरीद की प्रक्रिया चल रही है। वर्तमान में इनकी बोलियों (बिड्स) का मूल्यांकन किया जा रहा है। इस अनुबंध के मई 2026 तक दिए जाने की संभावना है, जबकि इन नावों की डिलीवरी मार्च 2027 तक होने की उम्मीद है।
जम्मू क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की समीक्षा करते हुए, मुख्य सचिव को बताया गया कि राष्ट्रीय जलमार्ग-26 के तहत चिनाब नदी पर भी क्रूज पर्यटन के बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है। रियासी से अखनूर किले तक नौ किलोमीटर लंबे रिवर क्रूज मार्ग का प्रस्ताव है, जहाँ दो जेट्टी के निर्माण का ठेका पहले ही दिया जा चुका है और इसके जुलाई 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है।
इसके अलावा, तटवर्ती सुविधाओं के विकास का कार्य इंडियन पोर्ट रेल एंड रोप-वे कॉर्पोरेशन लिमिटेड को सौंपा गया है। इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने का काम वर्तमान में चल रहा है। इसके जून 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। बैठक में बताया गया कि प्रस्तावित मार्ग में क्रूज संचालन के लिए पूरे वर्ष पर्याप्त जल-गहराई उपलब्ध रहती है।
इसी तरह, राष्ट्रीय जलमार्ग-84 के तहत रावी नदी पर जम्मू जिले के सोहार में पंद्रह किलोमीटर लंबा रिवर क्रूज कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। जेट्टी के निर्माण का ठेका पहले ही दिया जा चुका है और इसके जुलाई 2026 तक पूरा होने की संभावना है। तटवर्ती सुविधाओं के लिए डीपीआर तैयार करने का काम भी आईपीआरसीएल के माध्यम से प्रगति पर है। इसके जून 2026 तक अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है, जबकि नेविगेशनल सहायता के लिए जुलाई 2026 तक टेंडर जारी करने और दिसंबर 2026 तक काम पूरा करने का प्रस्ताव है।