श्रीनगर: हाईकोर्ट ने कहा- सभी महिलाएं 180 दिन के मातृत्व अवकाश का दावा नहीं कर सकतीं
हाईकोर्ट ने कहा कि कोरोना महामारी में डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की छुट्टियां रद्द की गई हैं। ऐसे में एक डॉक्टर को 180 दिन का मातृत्व अवकाश देने से पूर्व संबंधित प्राधिकारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि काम प्रभावित न हो।
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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने महिलाओं के लिए 180 दिन के मातृत्व अवकाश प्रावधान से जुड़ी याचिका पर अहम फैसला सुनाया है। न्यायाधीश मोहम्मद अकरम चौधरी ने सुनवाई के दौरान कहा कि एसआरओ 353 में 180 दिन के मातृत्व अवकाश का प्रावधान जरूर है, लेकिन हर महिला इसके लिए अधिकार के रूप में दावा नहीं कर सकती। यह भी देखना जरूरी है कि महिला कर्मचारी कौन सी ड्यूटी कर रही है।
उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी में डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की छुट्टियां रद्द की गई हैं। ऐसे में एक डॉक्टर को 180 दिन का मातृत्व अवकाश देने से पूर्व संबंधित प्राधिकारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि काम प्रभावित न हो। लिहाजा अदालत 180 दिन के अवकाश का आदेश देने की मांग की याचिका खारिज करती है। हालांकि आदेश में कहा गया है कि मंजूर किए गए 45 दिन के अवकाश को परिस्थितियों को देख संभव समय के लिए बढ़ाया जा सकता है।
श्रीनगर के स्किम्स सौरा अस्पताल में तैनात महिला डॉक्टर ने 180 दिन का मातृत्व अवकाश मांगा था, जिन्हें 11 दिसंबर 2021 से 24 जनवरी 2022 तक 45 दिन के अवकाश की मंजूरी मिली। उन्होंने याचिका में कहा - चूंकि 180 दिन का मातृत्व अवकाश उनका अधिकार है, लिहाजा संबंधित प्राधिकारी को निर्देश दिए जाएं कि 45 दिन के बजाय 180 दिन का अवकाश स्वीकृत किया जाए। जम्मू-कश्मीर सरकार ने 6 अक्तूबर 2015 को एसआरओ-353 जारी कर महिलाओं के लिए 180 दिन के मातृत्व अवकाश का प्रावधान किया था।