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Interview: सोनम वांगचुक ने कहा- भाजपा की केंद्र सरकार ने हमसे किया वादा नहीं निभाया तो करना पड़ा अनशन

Sun, 19 May 2024 02:28 PM IST
विजय पुंडीर नितिन यादव, अमर उजाला, लद्दाख
नितिन यादव, अमर उजाला, लद्दाख Published by: विजय पुंडीर Updated Sun, 19 May 2024 02:28 PM IST
सार

लद्दाख को पूर्ण राज्य और संविधान की छठी अनुसूची लागू करने की मांग को लेकर दो माह से ज्यादा अनशन करने वाले सोनम वांगचुक लगातार चर्चा में हैं। उनकी जिंदगी पर थ्री इडियट्स फिल्म भी बन चुकी है। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर उनके मुद्दों और मांगों पर बात की नितिन यादव ने...

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Sonam Wangchuk said that the central government did not keep its promise so she had to go on a fast
सोनम वांगचुक (फाइल) - फोटो : एजेंसी

विस्तार

लद्दाख को पूर्ण राज्य और संविधान की छठी अनुसूची लागू करने की मांग को लेकर दो माह से ज्यादा अनशन करने वाले सोनम वांगचुक लगातार चर्चा में हैं। उनकी जिंदगी पर थ्री इडियट्स फिल्म भी बन चुकी है। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर उनके मुद्दों और मांगों पर बात की नितिन यादव ने...

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केंद्रशासित क्षेत्र की मांग पूरी होने के बाद भी धरना-प्रदर्शन की जरूरत क्यों हुई?
जब 2019 में केंद्रशासित क्षेत्र की मांग पूरी हुई तो यहां के लोग बहुत कृतज्ञ हुए। भाजपा की केंद्र सरकार ने वचन दिया था कि विशेष दर्जा हमें छठी अनुसूची में दिया जाएगा। स्थानीय चुनावों में भी वादा किया गया, पर बाद में सब मुकरने लगे। अंतत: अनशन और प्रदर्शन हमारी मजबूरी हो गई।
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यह छठी अनुसूची कहीं अनुच्छेद 370 की तरह तो नहीं?
यह ऐसा है भी और नहीं भी। अनुच्छेद 370 तो राज्यों को दिया जाता है, जैसे जम्मू और दूसरे राज्यों को दिया गया। यह जो छठीं अनुसूची है वह जनजातीय लोगों के अधिकारों के लिए बना है। यह राज्य के अंदर जनजातीय लोगों को विशेष अधिकार देगा। वे अपनी सामाजिक रीतियों और जमीन पर अलग से कानून बना सकेंगे। राज्य के कानून उस पर नहीं चलेंगे।
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क्या इस तरह की मांग सिर्फ लद्दाख में है या कहीं दूसरी जगह भी?
पहले यह बनाया गया था असम राज्य के लिए। बाद में त्रिपुरा, असम, मेघालय और मिजोरम बन गए। इन चार राज्यों में छठी अनुसूची है। संविधान संशोधन कर इसे यहां भी लागू कर सकते हैं।

कहीं ऐसा तो नहीं है कि यह विकास विरोधी है?
मैं विकास विरोधी नहीं हूं। मैं चाहता हूं कि यहां उद्योग लगें और खूब खनन भी हो, लेकिन जो हो यहां के लोगों की मर्जी से हो। हम छठे शेड्यूल से लद्दाख को बंद नहीं करना चाहते। योजनाओं में यहां के लोगों को शामिल किया जाए। उन्हें लाभ लगे तो हां करें और न लगे तो ना करें। अभी यहां पर एक पावर प्रोजेक्ट लग रहा है लेकिन उन्होंने जो जमीन चुनी है, वह चरवाहों के लिए सबसे बेहतर जगह है। अच्छा होता कि यहां के लोग बताते कि पावर प्रोजेक्ट कहां लगे। कोई भी उद्योगपति 15 साल निचौड़ के चला जाएगा और यहां की जनता देखती रह जाएगी। इसलिए यहां के लोगों के हाथ में ही निर्णय रहना चाहिए।

कहीं आप राजनेता तो नहीं बनना चाहते हैं?
मैं राजनीति को खराब नहीं मानता हूं। पवित्र जगह है, बस लोग गलत आ गए हैं। मैं इसमें नहीं आना चाहता लेकिन यह इच्छा है कि सही लोग इसका हिस्सा बनें। मैं खुद कोई पद लूं तो ऐसा मैं कभी नहीं करूंगा।

चुनाव में क्या असर होगा, लेह व कारगिल के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता दिख रही है?
देखिए मैं तो चाहता हूं कि किसी तरह से बंटवारा न हो। यह बदकिस्मती है कि ऐसा हो रहा है। मैं चाहता हूं कि इस बार मुद्दों पर लोग वोट करें। पहले की तरह आज भी भाजपा के लोग वादा करें और निभाएं तो लोग उनका समर्थन करें। ऐसा नहीं है तो फिर कौन किसको वोट दे, यह उसकी मर्जी है।  

आपने आंदोलन या धरना खत्म क्यों कर दिया?
यह अनशन और धरना 66 दिन तक चला। हम अपनी मांग तो रखना चाहते हैं, लेकिन चुनाव के वक्त ऐसे संवेदनशील समय में कोई व्यवधान उत्पन्न करना नहीं चाहते थे। हमारा उद्देश्य था कि लोग अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों। जब नई सरकार आएगी, तो जून में 4 बिंदुओं पर फिर सरकार से बात की जाएगी। अभी अर्धविराम है, पूर्ण विराम नहीं।

आपने सबसे ज्यादा काम किस क्षेत्र में किया है?
मैंने शिक्षा में सबसे ज्यादा काम किया है। पर्यावरण पर काम करूं या आंदोलन तो मंशा रहती है कि लोगों को शिक्षा मिले। सरकारी विद्यालयों में ऐसे छात्रों के लिए काम करते हैं, जो उतने प्रतिभाशाली नहीं हैं। उन्हें नए नजरिए से आगे बढ़ने का मौका देते हैं। हमने ऐसे भवन बनाए जो बाहर के तापमान से अलग-अलग मौसम में भी ऐसे ही रहते हैं। हमारे यहां पर जो लोग स्थानीय मिट्टी से घर की दीवार बनाते हैं वह छह सौ साल तक चल सकती है। सूरज और मिट्टी के मेल से हर गरीब को मजबूत घर मिल सकता है।

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