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विधानसभा में चर्चा की भी इजाजत नहीं मिली
जम्मू/ब्यूरो
Updated Sat, 16 Mar 2013 01:04 AM IST
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संसद में जिस मुद्दे पर निंदा प्रस्ताव पारित किया गया, विधानसभा में उस पर चर्चा की भी अनुमति नहीं मिली।
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पाकिस्तान की नेशनल असेम्बली द्वारा अफजल मामले में निन्दा प्रस्ताव पारित किए जाने पर जम्मू-कश्मीर विधानसभा में भाजपा, जसमो और पैंथर्स विधायकों ने जबरदस्त गुस्से का इजहार करते हुए निंदा प्रस्ताव पारित करने की मांग की, लेकिन कांग्रेस और नेकां समेत अन्य सभी दल चुप्पी साधे रहे।
डिप्टी स्पीकर सरताज मदनी ने इसे दूसरे देश का मामला बताते हुए चर्चा की इजाजत नहीं दी तो तीनों दलों ने वाकआउट कर दिया। इन दलों के विधायकों ने शहीद सीआरपीएफ जवानों के अंतिम संस्कार में किसी भी मंत्री के शामिल नहीं होने पर भी कड़ा एतराज जताया।
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दोनों मुद्दों पर सदन में देर तक हंगामा और शोरगुल होता रहा। ये विधायक चाहते थे कि सदन एक प्रस्ताव पारित कर पाकिस्तान की हरकत की निन्दा करे। बाद में विधानसभा से बाहर विधायकों ने राज्य सरकार पर शहीदों के अपमान का आरोप लगाते हुए उसे बर्खास्त करने की मांग की।
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भाजपा विधायक जुगल किशोर ने कहा कि राज्य सरकार के मंत्री आतंकवादियों के सम्मान में उसके नाम के आगे साहब शब्द लगाते हैं और शहीदों का अपमान किया जाता है। श्रीनगर हमले में शहीद जवानों के अंतिम संस्कार में मंत्री या कोई जिम्मेदार अधिकारी शामिल नहीं हुए, जबकि आंतकवादियों की मौत पर आंसू बहाए जाते हैं। इससे सुरक्षा बलों का मनोबल गिर रहा है।
पैथर्स विधायक हर्षदेव हंगामे के क्रम में अपनी सीट के पास मेज पर खड़े हो गए और पाकिस्तान के खिलाफ निन्दा प्रस्ताव की मांग की। उन्होंने शहीद जवानों के अंतिम संस्कार में मुख्यमंत्री के शामिल न होने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। सदन की बैठक शुरू होते ही भाजपा विधायकों ने कहा कि पाकिस्तान ने भारत के अंदरुनी मामले में दखलअंदाजी की है।
इस पर सरकार को उचित कार्रवाई करनी चाहिए। विधायकों ने विधानसभा द्वारा प्रस्ताव पारित कर पाकिस्तान के प्रस्ताव की निन्दा पर जोर दिया। विधायकों ने कहा कि पाकिस्तान हमारे देश को डिक्टेट नहीं कर सकता। सदस्य वेल की ओर भी बढ़े।
विधायक अशोक खजूरिया ने कहा कि पाकिस्तान के प्रस्ताव से स्पष्ट हो गया है कि आंतकी हमले में उसका हाथ है।
पाकिस्तान ने अपने प्रस्ताव में भारतीय संसद पर हमले के आरोपी अफजल गुरु के शव को उसके परिवार को सौंपने की सलाह दी है। इससे साफ हो गया है कि संसद पर हमले में भी उसका हाथ था। हंगामे और विरोध में भाजपा के निलंबित सदस्य भी शामिल थे। बाद में इन सदस्यों ने सदन का बहिष्कार किया। सदन के बाहर भाजपा विधायक ने कहा कि नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस की सरकार अब देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए खतरा बन गई है। यह सरकार आंतकवाद पर नरम है। इसलिए इसे बर्खास्त किया जाना चाहिए।