{"_id":"67b24e51e84a1f53700ebabc","slug":"devotees-gathered-in-shri-ram-katha-rajouri-news-c-273-1-now1001-101061-2025-02-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rajouri News: श्रीराम कथा में उमड़े श्रद्धालु","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rajouri News: श्रीराम कथा में उमड़े श्रद्धालु
Mon, 17 Feb 2025 02:15 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, राजौरी
संवाद न्यूज एजेंसी, राजौरी
Updated Mon, 17 Feb 2025 02:15 AM IST
विज्ञापन
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान में श्रीराम कथा सुनते श्रद्धालु। संवाद
- फोटो : naushera
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कालाकोट के खेल मैदान में पांच दिवसीय श्रीराम कथा का समापन
नौशेरा। कालाकोट के खेल मैदान में आयोजित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से आयोजित पांच दिवसीय श्रीराम कथा के पांचवें दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा व्यास साध्वी गरिमा भारती ने श्रीराम कथा का व्याख्यान किया और आध्यात्मिक जागरण का संदेश दिया।
कथा के दौरान साध्वी ने कहा कि ईश्वर निर्गुण और निराकार होते हैं, लेकिन जब मानव दिशाहीन हो जाता है, तो वह उन्हें सही मार्ग दिखाने के लिए मानवीय रूप में अवतरित होते हैं। रावण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विनाश काले विपरीत बुद्धि, यानी जब विनाश निकट होता है, तो बुद्धि भी विपरीत हो जाती है।
साध्वी ने कहा कि श्रीराम के आदर्शों को अपनाने के लिए हमें पहले अपने अंदर के रावण (अहंकार, लोभ, क्रोध) को मिटाना होगा।
कथा के दौरान श्रद्धालु भावविभोर हो गए और बड़ी संख्या में भक्तों ने प्रवचनों को श्रवण किया। कथा का समापन प्रभु श्रीराम की आरती के साथ हुआ। इस अवसर पर स्वामी सुचेतानंद, स्वामी महेश्वरानंद, स्वामी हरिदासानंद, सरदारी लाल, विजय सूरी, एडवोकेट विनोद शर्मा, तिलक राज और पुरुषोत्तम शर्मा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
नौशेरा। कालाकोट के खेल मैदान में आयोजित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से आयोजित पांच दिवसीय श्रीराम कथा के पांचवें दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा व्यास साध्वी गरिमा भारती ने श्रीराम कथा का व्याख्यान किया और आध्यात्मिक जागरण का संदेश दिया।
कथा के दौरान साध्वी ने कहा कि ईश्वर निर्गुण और निराकार होते हैं, लेकिन जब मानव दिशाहीन हो जाता है, तो वह उन्हें सही मार्ग दिखाने के लिए मानवीय रूप में अवतरित होते हैं। रावण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विनाश काले विपरीत बुद्धि, यानी जब विनाश निकट होता है, तो बुद्धि भी विपरीत हो जाती है।
विज्ञापन
साध्वी ने कहा कि श्रीराम के आदर्शों को अपनाने के लिए हमें पहले अपने अंदर के रावण (अहंकार, लोभ, क्रोध) को मिटाना होगा।
कथा के दौरान श्रद्धालु भावविभोर हो गए और बड़ी संख्या में भक्तों ने प्रवचनों को श्रवण किया। कथा का समापन प्रभु श्रीराम की आरती के साथ हुआ। इस अवसर पर स्वामी सुचेतानंद, स्वामी महेश्वरानंद, स्वामी हरिदासानंद, सरदारी लाल, विजय सूरी, एडवोकेट विनोद शर्मा, तिलक राज और पुरुषोत्तम शर्मा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
विज्ञापन