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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Power crisis in Jammu Kashmir, demand of 3200 MW per day, supply is not even half

बिजली संकट गहराया : जम्मू कश्मीर में 15 घंटे लग रहे कट, प्रतिदिन 3200 मेगावाट की मांग, आधी भी नहीं हो रही आपूर्ति 

Thu, 28 Apr 2022 06:59 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: विमल शर्मा Updated Thu, 28 Apr 2022 06:59 PM IST
सार

जम्मू और कश्मीर दोनों संभागों में खपत के मुकाबले बिजली आपूर्ति आधे से भी कम हो रही है। प्रदेश में 3200 मेगावाट बिजली की मांग थी, लेकिन ग्रिड से महज 1300 मेगावाट बिजली ही मिली।

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Power crisis in Jammu Kashmir, demand of 3200 MW per day, supply is not even half
जम्मू में बिजली कटौती के खिलाफ प्रदर्शन करते लोग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चिलचिलाती गर्मी के बीच में जम्मू-कश्मीर में बिजली संकट गहरा गया है। केंद्र शासित प्रदेश में इन दिनों रोज औसतन करीब 3200 मेगावाट बिजली की मांग है, जबकि इससे आधी बिजली भी नहीं मिल रही है। इसके चलते कई इलाकों में रोज 13 से 15 घंटे तक बिजली कट लग रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में हालात ज्यादा खराब हैं। जम्मू संभाग में 40 डिग्री तापमान के बीच बिजली संकट से बेहाल लोग सड़कों पर उतर रहे हैं। जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं।

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संकट के बीच कई इलाकों में घंटों बिजली कट लग रहे

जम्मू और कश्मीर दोनों संभागों में खपत के मुकाबले बिजली आपूर्ति आधे से भी कम हो रही है। प्रदेश में 3200 मेगावाट बिजली की मांग थी, लेकिन ग्रिड से महज 1300 मेगावाट बिजली ही मिली। पिछले कई दिनों से चल रहे संकट के बीच कई इलाकों में घंटों बिजली कट लग रहे हैं। चिंताजनक यह है कि बिजली का यह संकट अगले एक माह तक जारी रह सकता है।

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कश्मीर संभाग में 1700 मेगावाट बिजली की मांग

बुधवार को जम्मू संभाग में 1500 मेगावाट बिजली की मांग थी, लेकिन 600 मेगावाट बिजली ही मिल पाई। इसी तरह से कश्मीर संभाग में 1700 मेगावाट बिजली की मांग के मुकाबले महज 700 मेगावाट बिजली की आपूर्ति हुई। 

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प्रदेश में चल रहे 28 प्रोजेक्ट, 50 फीसदी तक घटा उत्पादन

जम्मू-कश्मीर में पन बिजली उत्पादन की 28 परियोजनाएं चल रही हैं। इनसे कुल 4400 मेगावाट बिजली तैयार होती है। ज्यादातर बड़ी परियोजनाएं एनएचपीसी की हैं, जहां से बिजली राष्ट्रीय ग्रिड में भेजी जाती है। प्रदेश को अपनी परियोजनाओं के अलावा राष्ट्रीय ग्रिड से बिजली खरीदनी पड़ती है। कम बारिश के चलते प्रदेश की परियोजनाओं में उत्पादन 50 फीसदी तक प्रभावित हुआ है। अधिकारियों के अनुसार नदियों में पानी का स्तर कम हुआ है। जैसे-जैसे जलस्तर बढ़ेगा, बिजली उत्पादन के आंकड़ों में सुधार होगा। 

छात्र, नमाजी, मरीज भी परेशान

बढ़ती गरमी के बीच बिजली संकट ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। रमजान माह में मुस्लिम समुदाय को सहरी और इफ्तार के वक्त बिजली संकट से जूझना पड़ रहा है। सीबीएसई की परीक्षाएं दे रहे विद्यार्थी बिजली संकट में ठीक से तैयारी नहीं कर पा रहे हैं। वहीं सामान्य जनजीवन भी दिन और रात बिजली के बिना परेशानियां झेल रहा है। बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। 
 

बिजली परियोजनाओं से बिजली उत्पादन खासा प्रभावित हो गया है। 15 दिन में जलस्तर बढ़ने की उम्मीद है। इन परियोजनाओं से 20 फीसदी बिजली जम्मू-कश्मीर को मिलती है। - अश्वनी, मुख्य अभियंता, जेपीडीसीएल कॉमर्शियल विंग

 

मांग की तुलना में बिजली की आपूर्ति बहुत कम हो रही है। उपलब्ध बिजली को देखते हुए ही बिजली कट लगाए जा रहे हैं। पर्याप्त बिजली मिलने तक कटौती जारी रहेगी। प्रयास हालांकि जारी हैं लेकिन इस स्थिति में कब तक सुधार होगा, यह कहना मुश्किल। - प्रदीप सेठ, मुख्य अभियंता, जेपीडीसीएल वितरण


 

स्मार्ट मीटर लगाने पर भी लोग बिजली संकट झेल रहे हैं। श्रीनगर शहर में भी हालात खराब हैं। सर्दियों में शेड्यूल के अनुसार बिजली की आपूर्ति मिलती थी। गैर मीटर वाले इलाकों में तो स्थिति और भी खराब थी।-  उमर अब्दुल्ला,पूर्व मुख्यमंत्री 

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